
नयी दिल्ली. कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के तीसरे कार्यकाल के 100 दिन पूरा होने पर मंगलवार को सरकार पर बेरोजगारी का संकट पैदा करने का आरोप लगाया और दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में रोजग़ार को ख.त्म करने वाला विकास (जॉबलॉस ग्रोथ) हुआ है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री और उनकी सरकार बेरोजगारी की समस्या को न सिर्फ दूर करने में विफल रहे, बल्कि इस चुनौती को स्वीकार तक नहीं कर रहे हैं.
रमेश ने एक बयान में कहा, ”सोमवार को इस अस्थिर और संकटों से घिरी सरकार के सौ दिन पूरे हो गए. कई यू-टर्न और कई घोटालों के बीच यह एक बार फ.रि भारत में बड़े पैमाने पर बेरोजग़ारी संकट को लेकर कुछ भी करने में विफल रही है.” उन्होंने आरोप लगाया कि बेरोजगारी का संकट सरकार ने ख.ुद पैदा किया है.
उनका कहना था, ”तुगलकी नोटबंदी के कारण रोजग़ार सृजन करने वाले एमएसएमई के ख.त्म होने, ज.ल्दबाज.ी में लागू जीएसटी, बिना तैयारी के लगाए गए कोविड-19 लॉकडाउन और चीन से बढ़ते आयात के कारण बेरोजग़ारी ने निश्चित रूप से भयावह रूप धारण कर लिया है. भारत की बेरोजग़ारी दर आज 45 वर्षों में सबसे अधिक है, स्नातक युवाओं के बीच बेरोजग़ारी दर 42 प्रतिशत है.” रमेश ने कहा, ”इसे साबित करने के लिए डेटा भरे पड़े हैं. रोजग़ार के पर्याप्त अवसर पैदा करने में विफलता दिख रही है. हर साल लगभग 70-80 लाख युवा श्रम बल में शामिल होते हैं, लेकिन 2012 और 2019 के बीच, रोजग़ार में वृद्धि लगभग न के बराबर हुई, यह केवल 0.01 प्रतिशत है.” उनके अनुसार, एक रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि 2022 में शहरी युवाओं (17.2 प्रतिशत) के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं (10.6 प्रतिशत) के बीच भी बेरोजग़ारी दर बहुत अधिक थी. शहरी क्षेत्रों में महिला बेरोजग़ारी दर 21.6 प्रतिशत के साथ काफी ज़्यादा थी.
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि सिटी ग्रुप की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि भारत को अपने युवाओं को रोजग़ार देने के लिए अगले 10 वर्षों तक हर साल 1.2 करोड़ नौकरियों के अवसर पैदा करने होंगे. उन्होंने दावा किया कि नियमित वेतन वाली औपचारिक नौकरियों का सृजन नहीं हो रहा है.
रमेश ने कहा, ”अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की इस रिपोर्ट से पता चलता है कि मोदी सरकार ने कम वेतन वाले अनौपचारिक क्षेत्र के रोजग़ार का प्रतिशत बढ़ा दिया है, जिनमें किसी तरह की सामाजिक सुरक्षा नहीं होती है. 2019-22 तक औपचारिक रोजग़ार 10.5 प्रतिशत से घटकर 9.7 प्रतिशत हो गया.” उन्होंने आरोप लगाया कि कई दशकों में पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ”कुप्रबंधन” के कारण कृषि में श्रमिकों की वास्तविक संख्या बढ़ रही है.
कांग्रेस जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिलाएगी: खरगे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए जारी पार्टी के घोषणापत्र का उल्लेख करते हुए मंगलवार को कहा कि उनका दल यह सुनिश्चित करेगा कि पूर्ण राज्य का दर्जा का बहाल हो. कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए सोमवार को अपना घोषणा पत्र जारी किया, जिसमें पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली, किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए कई कल्याणकारी कदम उठाने का वादा किया गया है.
खरगे ने मंगलवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”जम्मू-कश्मीर के हक. के लिए कांग्रेस की गारंटी. हम दिलाएंगे पूर्ण राज्य का दर्जा! एक लाख सरकारी नौकरियां देकर युवाओं को देंगे नई ऊर्जा! हर परिवार के लिए 25 लाख रुपये का मुफ़्त इलाज, हर ज.लिे में सुपर-स्पेशलिटी अस्पताल, बनेगा स्वस्थ समाज.
उन्होंने कहा, ”कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए डॉ मनमोहन सिंह जी की योजना का होगा विस्तार, ओबीसी वर्ग के सुरक्षित करेंगे संविधान अनुरूप अधिकार. परिवार की मुखिया महिला को हर माह ?3000 से मिलेगी आर्थिक रक्षा, 11 किलो अनाज से परिवार के हर सदस्य के लिए खाद्य सुरक्षा.” जम्मू-कश्मीर में तीन चरणों में चुनाव हो रहे हैं. पहले चरण में 24 सीट के लिए मतदान बुधवार को होगा, उसके बाद 25 सितंबर को दूसरे चरण में 26 सीट के लिए मतदान होगा. तीसरे चरण में 40 सीट के लिए मतदान एक अक्टूबर को होगा, जबकि वोटों की गिनती आठ अक्टूबर को की जाएगी.
क्या वित्त मंत्री को सेबी प्रमुख से जुड़े तथ्यों की जानकारी पहले से थी: कांग्रेस ने किया सवाल
कांग्रेस ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की प्रमुख माधवी पुरी बुच के मामले पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की प्रतिक्रिया के बाद मंगलवार को कहा कि सेबी प्रमुख और उनके पति के वित्तीय लेन-देन को लेकर जो तथ्य सामने आए हैं, अब तक उनका किसी ने खंडन नहीं किया है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह सवाल भी किया कि क्या वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 2022 से ही इन तथ्यों की जानकारी थी? वित्त मंत्री ने सोमवार को कहा था कि सेबी प्रमुख माधवी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच अपना बचाव कर रहे हैं और ऐसे तथ्य सामने रख रहे हैं जो कांग्रेस के आरोपों के विपरीत हैं.
माधवी पुरी बुच और धवल बुच ने अनियमितता बरतने और हितों के टकराव को लेकर कांग्रेस की तरफ से लगाए गए आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि ये आरोप ”झूठे और साख बिगाड़ने” की कोशिश हैं. रमेश ने मंगलवार को ‘एक्स’ पर लिखा, ”सेबी प्रमुख के व्यक्तिगत वित्तीय लाभ के मुद्दे पर वित्त मंत्री ने आखिरकार केंद्र सरकार की चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने कहा है कि सेबी प्रमुख और श्री बुच ‘हितों के टकराव के आरोपों पर जवाब दे रहे हैं’ लेकिन ये जवाब और भी सवाल खड़े करते हैं. सेबी प्रमुख और उनके पति के वित्तीय लेन-देन को लेकर जो तथ्य सामने आए हैं, अब तक उनका किसी ने खंडन नहीं किया है.” उन्होंने कहा कि अब सवाल यह है कि क्या वित्त मंत्री और “नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री” को कम से कम 2022 से ही इन तथ्यों की जानकारी थी.
रमेश ने सवाल किया, “क्या वे वास्तव में सोचते हैं कि ये तथ्य बहुत हल्के हैं और किसी भी तरह से पूंजी बाजार नियामक की कार्यप्रणाली से समझौता नहीं करते हैं? क्या अदाणी समूह की उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्देशित सेबी जांच वास्तव में सही, निष्पक्ष और पूरी हुई है? उन्होंने कहा, “इस मामले का अभी अंत नहीं हुआ है और भी बहुत कुछ कहने को है!”



