
नयी दिल्ली/चंडीगढ़. कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद कंगना रनौत की एक टिप्पणी को लेकर बुधवार को सत्तारूढ़ पार्टी पर तीखा प्रहार किया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह निरस्त किये जा चुके तीनों ‘काले’ कृषि कानूनों को फिर से लाना चाहते हैं या नहीं. मुख्य विपक्षी दल ने यह भी कहा कि यदि भाजपा कंगना के रुख से सहमत नहीं है तो उन्हें पार्टी से निष्कासित करे.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कंगना रनौत की एक टिप्प्णी को लेकर आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पार्टी की रग-रग में किसान विरोधी नफ.रती मानसिकता बसी हुई है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी के ख.लिाफ. है.
खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”750 किसानों की शहादत के बाद भी किसान विरोधी भाजपा और मोदी सरकार को अपने घोर अपराध का अहसास नहीं हुआ. किसान-विरोधी तीन काले कानूनों को फिर से लागू करने की बात की जा रही है. कांग्रेस पार्टी इसका कड़ा विरोध करती है.” लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री ने उन कानूनों को फिर से लाने जैसा कोई कदम उठाया तो ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) उसका पुरजोर विरोध करेगा और उन्हें एक बार फिर माफी मांगनी पड़ेगी.
गांधी ने एक वीडियो में कहा, ”भाजपा के लोग विचारों को लेकर जांच-परख करते रहते हैं. वे किसी से कहते हैं कि सार्वजनिक रूप से विचार रखिए और फिर देखते हैं कि प्रतिक्रिया क्या होती है. यही हुआ है. इनके एक सांसद ने काले कृषि कानूनों को फिर से लाने की बात की है.”
उन्होंने कहा, ”मोदी जी स्पष्ट कीजिए कि क्या आप उन कानूनों को फिर से लाना चाहते हैं. आप फिर से ‘बदमाशी’ तो नहीं करेंगे?” उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने शहीद किसानों के लिए संसद में दो मिनट का मौन भी नहीं रखने दिया था.
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”सरकार की नीति कौन तय कर रहा है? एक भाजपा सांसद या प्रधानमंत्री मोदी? सात सौ से ज्यादा किसानों, खासकर हरियाणा और पंजाब के किसानों की शहादत लेकर भी भाजपा वालों का मन नहीं भरा.” गांधी ने कहा, ” ‘इंडिया’ गठबंधन हमारे अन्नदाताओं के विरुद्ध भाजपा का कोई भी षड्यंत्र कामयाब नहीं होने देगा. यदि किसानों को नुकसान पहुंचाने के लिए कोई भी कदम उठाया जाएगा तो मोदी जी को फिर से माफी मांगनी पड़ेगी.” गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल ने संवाददाताओं से कहा, ”कंगना रनौत का बयान किसानों की शहादत का अपमान है. हमारी मांग है कि कंगना को भाजपा से निष्कासित किया जाए.”
उन्होंने कहा, ”अगर कंगना को निष्कासित नहीं किया जाता, तो ये माना जाएगा कि भाजपा और नरेन्द्र मोदी किसानों की शहादत का अपमान कर रहे हैं तथा मोदी अपने मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए तीनों काले कानून वापस लाने की साजिश रच रहे हैं.” कंगना रनौत ने मंगलवार को कहा था, ”किसान भारत की प्रगति के शक्तिस्तंभ हैं. केवल चंद राज्यों में ही उन्होंने कृषि कानूनों का विरोध किया. मैं हाथ जोड़कर अपील करती हूं कि किसानों के हित में इन कृषि कानूनों को वापस लाया जाए.” हालांकि विवाद बढ़ने के बाद भाजपा सांसद ने 2021 में निरस्त किये गये कृषि कानूनों को वापस लाने की मांग संबंधी अपना बयान बुधवार को वापस ले लिया और कहा कि ये उनके ‘निजी’ विचार हैं और पार्टी के रूख को प्रर्दिशत नहीं करते हैं.
किसान नेता पंढेर ने भाजपा सांसद कंगना के खिलाफ कार्रवाई की मांग की
पंजाब के किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने 2021 में निरस्त किए गए तीन कृषि कानूनों पर भाजपा सांसद कंगना रनौत की कथित टिप्पणी के लिए बुधवार को उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की. अपने बयान को लेकर प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दलों की आलोचना का सामना करने के बाद, अभिनेत्री एवं भाजपा नेता रनौत ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा है कि कृषि कानूनों पर उनके विचार निजी हैं और वे उनकी पार्टी के रुख का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं.
किसान मजदूर मोर्चा का नेतृत्व करने वाले पंढेर ने कहा, ह्लअगर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने पहले ही उन कानूनों को निरस्त कर दिया है और अगर पार्टी की सांसद ने उन कानूनों पर कोई बयान दिया है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. क्या कोई नीतिगत मामलों पर बोल सकता है और फिर कह सकता है कि यह उसका निजी विचार था?ह्व उन्होंने कहा, ”इस मुद्दे पर भाजपा बेनकाब हो गई है.” कांग्रेस ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर रनौत का एक बिना तारीख वाला वीडियो साझा किया, जिसमें वह कथित तौर पर हिंदी में कह रही हैं, ”जो कृषि कानून निरस्त किए गए हैं उन्हें वापस लाया जाना चाहिए. मुझे लगता है कि यह विवादास्पद हो सकता है. किसानों के हित में कानून वापस लाए जाएं. किसानों को खुद इसकी मांग करनी चाहिए, ताकि उनकी समृद्धि में कोई रुकावट नहीं रहे.”
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पंजाब में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि वह रनौत को ह्लविवादास्पद कृषि कानूनों की बहाली की वकालत करने के लिए एक प्रवक्ता के रूप मेंह्व इस्तेमाल कर रही है.
बाजवा ने मंगलवार को कहा, ह्लभाजपा अपने किसान विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए रनौत का ढाल के तौर पर इस्तेमाल कर रही है. अगर केंद्र की भाजपा सरकार अपनी मंडी की सांसद द्वारा दिए गए बयानों के पीछे खड़ी नहीं होती है, तो पार्टी को उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए.ह्व उन्होंने कहा कि रनौत लगातार किसान समुदाय को निशाना बना रही हैं, जबकि भाजपा मूकदर्शक बनी हुई है. कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, ह्लयह कोई संयोग नहीं है, यह एक सोची-समझी रणनीति है. भाजपा उनकी बयानबाजी के जरिए किसानों पर परोक्ष हमला कर रही है.ह्व
तीन कानून – कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) अधिनियम; कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार अधिनियम; तथा आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम – को नवंबर 2021 में निरस्त कर दिया गया था. किसानों का प्रदर्शन नवंबर 2020 के अंत में शुरू हुआ था और संसद द्वारा तीनों कानूनों को निरस्त करने के बाद समाप्त हुआ. ये कानून जून 2020 में लागू हुए थे और नवंबर 2021 में निरस्त कर दिए गए.



