कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने एमयूडीए में किसी भी तरह की गड़बड़ी से किया इनकार

बेंगलुरु. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने मैसुरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) द्वारा उनकी पत्नी पार्वती सहित जमीन खोने वालों को भूखंड आवंटित करने में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की भाजपा की मांग को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया.

सिद्धरमैया ने विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को ‘राजनीतिक’ करार देते हुए सवाल किया कि क्या उनके परिवार को सिर्फ इसलिए अपनी जमीन छोड़नी होगी क्योंकि वह मुख्यमंत्री हैं. भाजपा ने आरोप लगाया है कि मैसुरु के एक पॉश इलाके में पार्वती को वैकल्पिक स्थान भी आवंटित किया गया था, जिसका मूल्य उनकी जमीन की तुलना में अधिक था जिसे एमयूडीए द्वारा ”अधिग्रहित” किया गया था. भाजपा ने इन आरोपों को लेकर मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांगा है.

एमयूडीए ने पार्वती को उनकी तीन एकड़ से अधिक क्षेत्रफल की जमीन के बदले में 50:50 अनुपात योजना के तहत भूखंड आवंटित किए थे, जहां एमयूडीए ने आवासीय योजना का खाका तैयार किया था. विवादास्पद योजना में अधिग्रहित अविकसित भूमि के बदले में भूमि खोने वाले को 50 प्रतिशत विकसित भूमि आवंटित करने की परिकल्पना की गई है. भाजपा ने आरोप लगाया है कि एमयूडीए द्वारा भूमि खोने वालों को भूखंड वितरित करने में 4,000 करोड़ रुपये की अनियमितता हुई है.

भाजपा के एक नेता ने दावा किया, ”जाहिर तौर पर 4,500-5,000 भूखंड मानदंडों का उल्लंघन कर आवंटित किए गए हैं. ” भाजपा ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री के गृह जिले मैसुरु में विरोध प्रदर्शन किया और वहां एमयूडीए कार्यालय का घेराव करने की कोशिश की. लेकिन, पुलिस ने पार्टी कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया और बाद में उन्हें रिहा कर दिया.

सिद्धरमैया ने सीबीआई जांच की भाजपा की मांग से संबंधित एक सवाल के जवाब में कहा, ”क्या उन्होंने (भाजपा) अपने कार्यकाल में कोई मामला (सीबीआई को) दिया है? मैंने सात मामले दिए हैं (इनमें, मुख्यमंत्री के तौर पर उनके पहले के कार्यकाल के मामले भी शामिल हैं). यह ऐसा मामला नहीं है जो सीबीआई को दिया जाए…हमने भी मांग की थी, क्या उन्होंने (सीबीआई को जांच के लिए कोई मामला दिया). ” आधिकारिक सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने आज कैबिनेट की बैठक में खुद को सही ठहराने की कोशिश करते हुए कहा कि उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है.

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