नयी दिल्ली. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अब रद्द की जा चुकी दिल्ली आबकारी नीति से संबंधित एक मामले में पूछताछ के लिए बृहस्पतिवार को प्रवर्तन निदेशाल (ईडी) के समक्ष पेश नहीं हुए. उन्होंने केंद्रीय जांच एजेंसी को पत्र लिखकर उन्हें भेजे गए समन को ”वापस लेने” की मांग की और कहा कि नोटिस ”अस्पष्ट, (राजनीति से) प्रेरित और कानून के मुताबिक विचारणीय नहीं” है.
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, ईडी मुख्यमंत्री के जवाब की समीक्षा कर रहा है. ईडी से जुड़े सूत्रों ने संकेत दिया कि केजरीवाल को नयी तारीख दी जा सकती है क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने हाल में अभियोजन पक्ष की ओर से दिए गए आश्वासन का संज्ञान लिया है कि मामले की सुनवाई अगले 6-8 महीनों के भीतर समाप्त हो जाएगी.
केंद्रीय एजेंसी ने केजरीवाल को कथित दिल्ली आबकारी नीति मामले में पूछताछ के लिए बुलाया था और वह धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत उनका बयान दर्ज करने वाली थी. इस मामले में आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया और संजय सिंह पहले से ही न्यायिक हिरासत में हैं.
दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने कहा कि जांच एजेंसी के नोटिस पर अपने जवाब में केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि समन ”गैरकानूनी, राजनीति से प्रेरित” है और इसका उद्देश्य उन्हें चुनावी राज्यों में चुनाव प्रचार अभियान में हिस्सा लेने से रोकना है.
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि यह ”अस्पष्ट, (राजनीति से) प्रेरित और कानून के मुताबिक विचारणीय नहीं” है. उन्होंने दावा किया कि अनावश्यक पूछताछ के लिए उन्हें यह नोटिस भाजपा के इशारे पर भेजा गया है.
दिन में आम आदमी पार्टी (आप) नेता केजरीवाल ने मध्य प्रदेश में सिंगरौली का दौरा किया और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ एक रोडशो में हिस्सा लिया. पीएमएलए के अनुसार, कोई व्यक्ति ईडी के समन को तीन बार नजरअंदाज कर सकता है और उसके बाद, ईडी के पास अदालत से गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) मांगने का विकल्प होता है.
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि यह स्पष्ट नहीं है कि जांच एजेंसी ने उन्हें किस हैसियत से पूछताछ के लिए बुलाया है? उन्होंने कहा, ”उक्त समन में यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें एक गवाह या संदिग्ध, किस हैसियत से पूछताछ के लिए बुलाया गया है.” उन्होंने इसे प्रवर्तन निदेशालय की ह्लबेबुनियादह्व कवायद करार दिया.
केजरीवाल ने कहा, ”उक्त समन में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मुझे एक व्यक्ति के तौर पर बुलाया गया है या दिल्ली के मुख्यमंत्री के आधिकारिक पद पर बैठे व्यक्ति के तौर पर अथवा आप के राष्ट्रीय संयोजक के तौर पर.” मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि प्रतीत होता है कि नोटिस (राजनीति से) प्रेरित है.
उन्होंने कहा, ”30.10.2023 की दोपहर समन के साथ ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेताओं ने बयान देना शुरू कर दिया कि जल्द मुझे तलब किया जाएगा और गिरफ्तार किया जाएगा. उसी दिन शाम तक मुझे आपका समन प्राप्त हुआ.” केजरीवाल ने आरोप लगाया, ”इसलिए प्रतीत होता है कि मेरी छवि और प्रतिष्ठा धूमिल करने के लिए उक्त समन की जानकारी भाजपा के कुछ नेताओं को लीक की गई और इसे केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी के इशारे पर जारी किया गया है.” उन्होंने दावा किया कि भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने 30 अक्टूबर को ”खुलेआम” कहा था कि मुख्यमंत्री को गिरफ्तार किया जाएगा.
केजरीवाल ने कहा कि वह दिल्ली के मुख्यमंत्री होने के साथ साथ आप के राष्ट्रीय संयोजक भी हैं और उनका मिजोरम, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान एवं तेलंगाना में अपनी पार्टी के ”स्टार प्रचारक” के तौर पर यात्रा करना जरूरी है, जहां इस महीने विधानसभा चुनाव होने हैं. उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में उनकी आधिकारिक प्रतिबद्धताओं के मद्देनजर उनकी उपस्थिति आवश्यक है, विशेषकर नवंबर के दूसरे सप्ताह में दिवाली के त्योहार पर. उन्होंने ईडी से उन्हें भेजा गया समन वापस लेने का अनुरोध किया.
आरोप है कि शराब व्यापारियों को लाइसेंस देने के लिए दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी नीति को कुछ डीलरों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाया गया था जिन्होंने कथित तौर पर इसके लिए रिश्वत दी थी. आप ने इस आरोप का बार-बार खंडन किया है.
बाद में नीति को रद्द कर दिया गया और दिल्ली के उप राज्यपाल ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की सिफारिश की, जिसके बाद ईडी ने धन शोधन रोकथाम अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया.
केजरीवाल के ईडी के सामने पेश होने से इनकार करने पर भाजपा ने आप के राष्ट्रीय संयोजक पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह भाग गए क्योंकि वह सच्चाई का सामना नहीं करना चाहते थे. दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि यह भाजपा द्वारा एक ह्लराजनीतिक साजिशह्व थी. पार्टी ने दावा किया कि विपक्षी नेताओं को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है. भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”अरविंद केजरीवाल ईडी के समन से भाग गए. वह सच्चाई का सामना नहीं करना चाहते… यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि दिल्ली के शराब घोटाले के ‘राजा’ ने स्वीकार कर लिया है कि वह शराब घोटाले और भ्रष्टाचार में शामिल थे.” पात्रा ने कहा कि ईडी तथ्यों और सबूतों के आधार पर समन जारी करता है लेकिन केजरीवाल जांच एजेंसी के सवालों का सामना करने से भाग रहे हैं क्योंकि वह सच्चाई जानते हैं.
भाजपा नेता ने आरोप लगाया, ”आज यह साबित हो गया है कि जो ‘कट्टर’ बेईमान है, वह ‘कट्टर’ बेशर्म भी है. हमारा दृढ़ विश्वास है कि ईडी या किसी अन्य एजेंसी द्वारा केजरीवाल को समन किसी आधार पर भेजा गया था.” वहीं आप ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि यह उसके द्वारा रची गई ”राजनीतिक साजिश” है.
आप नेता सौरभ भारद्वाज ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने एक समाचार एजेंसी से साक्षात्कार में यह कैसे कहा कि केजरीवाल को गिरफ्तार किया जाएगा? इसका मतलब है कि यह एक राजनीतिक साजिश है. पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं और राष्ट्रीय संयोजक होने के नाते केजरीवाल को प्रचार के लिए जाना है.” उन्होंने कहा, ”पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं और राष्ट्रीय संयोजक होने के नाते केजरीवाल को प्रचार के लिए जाना है.” भारद्वाज ने आरोप लगाया कि यह भाजपा का एक ”राजनीतिक षड्यंत्र” है और वह विपक्षी दलों के नेताओं को निशाना बना रही है.
‘आप’ के दिल्ली प्रदेश संयोजक गोपाल राय ने भाजपा से जांच एजेंसी का ”दुरुपयोग” रोकने की अपील की. उन्होंने कहा, ”दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ईडी के समन का जवाब भेजा है. उन्होंने इसे वापस लेने की मांग की है, लेकिन ईडी का जवाब नहीं आया. इसके बजाय, भाजपा प्रवक्ताओं ने ईडी को भेजे केजरीवाल के पत्र का जवाब देना शुरू कर दिया है. आज ईडी को भाजपा से और भाजपा को ईडी से अलग करना मुश्किल हो गया है.” इस बीच, भाजपा की दिल्ली इकाई के नेताओं ने महात्मा गांधी की समाधि राजघाट के निकट बृहस्पतिवार को धरना दिया और कथित आबकारी नीति घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे की मांग की.