
नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को इस्तीफा मांगने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर तंज कसा और कहा कि उनके ‘आनंद’ के लिए वह पद छोड़ भी दें तो इससे उनकी समस्या का अंत नहीं होने वाला है क्योंकि उन्हें कम से कम 15 साल विपक्ष में ही बैठना है.
राष्ट्रीय राजधानी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुख्यालय में संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए शाह ने यह भी कहा कि उनके इस्तीफे से ‘खरगे साहब’ की दाल नहीं गलने वाली है. खरगे ने कांग्रेस मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था कि यदि शाह इस्तीफा नहीं देते हैं तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनका बचाव करने के बजाय आज रात 12 बजे तक मंत्रिमंडल से उन्हें बर्खास्त कर देना चाहिए.
कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री को बाबासाहेब के प्रति थोड़ी भी श्रद्धा है तो उन्हें यह कदम उठाना चाहिए. उन्होंने शाह से पूरे देश से माफी मांगने की भी मांग की. इस बारे में पूछे एक सवाल के जवाब में शाह ने कहा, ”खरगे जी मेरा इस्तीफा मांग रहे हैं. उनको आनंद होता है तो शायद मैं दे भी दूं. लेकिन इससे समस्या का अंत नहीं है. अभी 15 साल तक कम से कम उनको इस जगह पर बैठना है, जहां वह बैठे हैं. खरगे साहब, मेरे इस्तीफे से आपकी दाल नहीं गलने वाली है.” इससे पहले, शाह ने कांग्रेस पर राज्यसभा में बाबा साहेब आंबेडकर पर दिए गए उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया और कहा कि वह सपने में भी संविधान निर्माता का अपमान नहीं कर सकते.
शाह ने कहा, ”जिन्होंने जीवन भर बाबा साहेब का अपमान किया, जिन्होंने जीवन भर बाबा साहेब के सिद्धांतों को दरकिनार किया, जिन्होंने सत्ता में रहने तक बाबा साहब को भारत रत्न मिलने नहीं दिया, जिन्होंने सत्ता में बने रहने के दौरान आरक्षण के सिद्धांतों की धज्जियां उड़ाई, वे लोग आज बाबा साहेब आंबेडकर के नाम पर भ्रांति फैलाना चाहते हैं.” केंद्रीय गृह मंत्री ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता खरगे पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें कांग्रेस के इस ‘कुत्सित प्रयास’ का समर्थन नहीं करना चाहिए था.
उन्होंने कहा, ”मैं कांग्रेस के अध्यक्ष खरगे जी से भी कहना चाहता हूं. खरगे साहब, आपका तो कम से कम दायित्व बनता है क्योंकि आप उस वर्ग से आते हैं जिस वर्ग के लिए बाबा साहेब आंबेडकर जी ने पूरा जीवन सर्मिपत कर दिया.” उन्होंने कहा, ”आपको कांग्रेस के इस कुत्सित प्रयास का समर्थन नहीं करना चाहिए था. मुझे बहुत दुख है कि राहुल गांधी के दबाव में आप भी इसमें शामिल हो गए हैं.”



