वक्फ विधेयक पर विचार कर रही समिति की बैठकों में कोरम की कमी : विपक्षी सांसद

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 10 Nov 2024 09:39 PM
वक्फ विधेयक पर विचार कर रही समिति की बैठकों में कोरम की कमी : विपक्षी सांसद
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नयी दिल्ली. वक्फ (संशोधन) विधेयक पर विचार कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में शामिल कई विपक्षी सांसदों ने दावा किया है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात के बाद उन्हें जो आश्वासन मिला था, उसे पूरा नहीं किया गया. विपक्षी सांसदों ने समिति के अध्यक्ष जगदम्बिका पाल पर आरोप लगाया है कि उनकी बैठकों में कोरम पूरा नहीं होने के बावजूद वह राज्यों का दौरा कर रहे हैं.

हालांकि, पाल ने विपक्षी सांसदों के आरोपों को खारिज करते हुए तर्क दिया है कि संसदीय समितियों के “अध्ययन दौरे” एक  नौपचारिक अभ्यास हैं, जिनमें कोरम पर अमल जैसी औपचारिकताओं को पूरा करने की बाध्यता नहीं होती. पाल की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति विभिन्न हितधारकों से बात करने के लिए पांच राज्यों के दौरे पर है. हालांकि, विपक्षी सांसदों ने इसका बहिष्कार किया है.

पाल ने रविवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि वह तय समयसीमा में यानी 25 नवंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र के पहले हफ्ते के आखिरी दिन तक समिति की रिपोर्ट सौंपने को लेकर आश्वस्त हैं. पाल ने बताया कि उन्होंने 200-250 पन्नों की रिपोर्ट पहले ही तैयार कर ली है. हालांकि, समिति में शामिल विपक्षी सांसदों ने पाल की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद पाल, सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं.

विपक्षी सदस्यों ने बताया कि उन्होंने पहले खुद को समिति के काम से अलग करने की धमकी भी दी थी. उन्होंने समिति की आए दिन होने वाली दिनभर की बैठकों पर मुख्य रूप से आपत्ति जताई है, जिससे उन्हें पर्याप्त तैयारी करने का मौका नहीं मिलता. विपक्षी सदस्यों ने पाल पर “मनमाने ढंग से काम करने” का आरोप लगाते हुए कहा है कि समिति के समक्ष अपने विचार रखने के लिए किसे बुलाया जाए, इसके निर्धारण में उनसे विचार-विमर्श नहीं किया जा रहा है.

मंगलवार को बिरला से मुलाकात के बाद विपक्षी सांसदों ने अपनी चर्चा को सार्थक बताया था. सासंदों ने उनकी बात को धैर्यपूर्वक सुनने और उनकी शिकायतों पर विचार करने का आश्वासन देने के लिए बिरला की तारीफ की थी. सूत्रों ने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष को नौ नवंबर को भेजे गए अलग-अलग पत्रों में कुछ विपक्षी सांसदों ने कहा कि पांच नवंबर को उनके (ओम बिरला) साथ हुई बैठक के बाद उन्हें उम्मीद थी कि भाजपा सांसद की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति के पांच राज्यों के दौरे को टाला जा सकता है, क्योंकि समिति की रिपोर्ट सौंपने की “तत्काल आवश्यकता” नहीं है.

सूत्रों के मुताबिक, बिरला को भेजे पत्रों में विपक्षी सांसदों ने दौरे पर निराशा और आश्चर्य व्यक्त किया है. उन्होंने कहा है कि गुवाहाटी में समिति की बैठक में केवल पांच सदस्यों ने हिस्सा लिया था, जो कि कोरम से भी “बहुत कम” है. सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखने वाले विपक्षी सांसदों में द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के ए राजा, कांग्रेस के मोहम्मद जावेद और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कल्याण बनर्जी शामिल हैं.

जगदम्बिका पाल ने कहा कि समिति के अध्यक्ष के रूप में वह विपक्षी सांसदों के बहिष्कार से खुश नहीं हैं, जबकि दक्षिणी राज्यों के पिछले अध्ययन दौरे के दौरान वे इसका हिस्सा थे. भाजपा सांसद ने दावा किया कि उनका एकमात्र मकसद अधिक से अधिक हितधारकों के विचार जानना है, क्योंकि उनमें से कई दिल्ली नहीं आ सकते हैं.

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें भरोसा है कि समिति तय समयसीमा पर अपनी रिपोर्ट सौंप देगी, पाल ने कहा कि वह “बिल्कुल आश्वस्त हैं.” सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा अध्यक्ष को लिखे अपने पत्रों में विपक्षी सांसदों ने कहा है कि उनसे मुलाकात के बाद उन्हें लगा था कि समिति की बैठकें अब हफ्ते में एक दिन या पखवाड़े में लगातार दो दिन होंगी, ताकि उन्हें इसकी बैठकों में दिए जाने वाले सुझावों को तैयार करने और उन पर विचार करने का मौका मिल सके. सूत्रों के अनुसार, विपक्षी सदस्यों ने कहा है कि उनमें “उम्मीद की एक किरण” जगी थी कि उनकी शिकायतों का समाधान किया जाएगा, लेकिन पाल ने दौरा जारी रखा, जिससे वे निराश और हैरत में हैं.

विपक्षी सांसदों ने बिरला को समन्वित रूप से तीसरी बार ऐसे पत्र भेजे हैं, जिनमें पाल की कार्यशैली पर आपत्ति जताई गई है.
एक सांसद ने अपने पत्र में लिखा है, “हम इस बात को रेखांकित करना चाहते हैं कि जेपीसी के अध्यक्ष ने संवैधानिक नैतिकता और सुस्थापित संसदीय परंपराओं का पूर्ण उल्लंघन करते हुए समिति की कार्यवाही को मजाक बनाकर रख दिया है.” विपक्षी सांसदों के आरोपों पर निराशा व्यक्त करते हुए जगदम्बिका पाल ने दावा किया कि “उनसे बड़ा कोई लोकतंत्रवादी” है ही नहीं. भाजपा सांसद ने कहा कि उन्होंने विपक्षी सदस्यों को समिति की बैठकों में हर बार जितने चाहे उतने मुद्दे उठाने और जितने चाहे उतने सवाल पूछने की इजाजत दी.

पाल ने कहा, “असदुद्दीन औवैसी (एआईएमआईएम) से पूछिए, जो बहुत तैयारी के साथ समिति की बैठकों में हिस्सा लेते हैं. मैंने उन्हें हमेशा अपनी बात रखने की अनुमति दी है. सैयद नसीर हुसैन (कांग्रेस) और कल्याण बनर्जी (टीएमसी) के मामले में भी ऐसा ही है.” उन्होंने कहा, “अध्ययन दौरों का बहिष्कार करने का कोई औचित्य नहीं है, जिनमें हम केवल हितधारकों के विचार दर्ज करते हैं.”

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