
नयी दिल्ली. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ‘लेटरल एंट्री’ के माध्यम से भर्ती को लेकर सोमवार को केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा और दावा किया कि यह आरक्षण छीनकर संविधान को बदलने का ”भाजपाई चक्रव्यूह” है.
खरगे ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”मोदी सरकार का, लेटरल एंट्री का प्रावधान संविधान पर हमला क्यों है? सरकारी महकमों में रिक्तियां भरने के बजाय, पिछले 10 वर्षों में अकेले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में ही भारत सरकार के हिस्सों को बेच-बेच कर, 5.1 लाख पद भाजपा ने ख.त्म कर दिए है.”
उन्होंने दावा किया, ”अनुबंधित भर्ती में 91 प्रतिशत इजाफा हुआ है. अजा, अजजा, ओबीसी के 2022-23 तक 1.3 लाख पद कम हुए है. हम लेटरल एंट्री गिने-चुने विशेषज्ञों को कुछ विशेष पदों में उनकी उपयोगिता के अनुसार नियुक्त करने के लिए लाए थे. पर मोदी सरकार ने लेटरल एंट्री का प्रावधान सरकार में विशेषज्ञ नियुक्त करने के लिए नहीं, बल्कि दलित, आदिवासी व पिछड़े वर्गों का अधिकार छीनने के लिए किया है.” खरगे ने आरोप लगाया, ”अजा, अजजा, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस के पद अब आरएसएस के लोगों को मिलेंगे. यह आरक्षण छीनकर संविधान को बदलने का भाजपाई चक्रव्यूह है.”
केंद्र सरकार ने ‘लेटरल एंट्री’ के माध्यम से 45 विशेषज्ञों की विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों में संयुक्त सचिव, निदेशक और उपसचिव जैसे प्रमुख पदों पर नियुक्ति करने की घोषणा की है. आमतौर पर ऐसे पदों पर अखिल भारतीय सेवाओं-भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय वन सेवा (आईएफओएस) और अन्य ‘ग्रुप ए’ सेवाओं के अधिकारी तैनात किए जाते हैं.
भाजपा का राम राज्य का विकृत संस्करण बहुजनों से आरक्षण छीनना चाहता है : राहुल गांधी
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ‘लेटरल एंट्री’ के जरिये लोक सेवकों की भर्ती को लेकर सोमवार को एक फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि भाजपा का राम राज्य का विकृत संस्करण संविधान नष्ट करना चाहता है और बहुजनों से आरक्षण छीनना चाहता है.
राहुल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “लेटरल एंट्री दलितों, ओबीसी और आदिवासियों पर हमला है. भाजपा का राम राज्य का विकृत संस्करण संविधान को नष्ट करना चाहता है और बहुजनों से आरक्षण छीनना चाहता है.” पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने रविवार को आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ”संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के बजाय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के माध्यम से लोक सेवकों की भर्ती करके संविधान पर हमला कर रहे हैं.”
सरकारी नियुक्तियों में आरक्षण जरूरी, इसमें कोई किंतु-परंतु नहीं : चिराग पासवान
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने ‘लेटरल एंट्री’ के जरिए सरकारी पदों पर नियुक्तियों के किसी भी कदम की सोमवार को आलोचना करते हुए कहा कि वह केंद्र के समक्ष यह मुद्दा उठाएंगे. लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब हाल ही में केंद्र सरकार ने ‘लेटरल एंट्री’ के माध्यम से 45 विशेषज्ञों की विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों में संयुक्त सचिव, निदेशक और उपसचिव जैसे प्रमुख पदों पर अनुबंध आधार पर नियुक्ति करने की घोषणा की. आमतौर पर ऐसे पदों पर अखिल भारतीय सेवाओं – भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय वन सेवा (आईएफओएस) – और अन्य ‘ग्रुप ए’ सेवाओं के अधिकारी तैनात होते हैं.
विपक्ष का आरोप है कि ‘लेटरल एंट्री’ के जरिये लोक सेवकों की भर्ती करने का यह कदम ”राष्ट्र विरोधी कदम” है और इस तरह की कार्रवाई से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण ”खुलेआम छीना जा रहा है.” चिराग पासवान ने इस मुद्दे को लेकर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”किसी भी सरकारी नियुक्ति में आरक्षण का प्रावधान होना चाहिए. इसमें कोई किंतु-परंतु नहीं है. निजी क्षेत्र में आरक्षण नहीं है और अगर सरकारी पदों पर भी इसे लागू नहीं किया जाता है… यह जानकारी रविवार को मेरे सामने आई और यह मेरे लिए चिंता का विषय है.” पासवान केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार में सहयोगी हैं.



