‘लेटरल एंट्री’ अब भी अमल में, आरक्षण के लिए ‘रास्ता खुला’ है: जितेंद्र सिंह

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 16 Jul 2025 10:10 PM
‘लेटरल एंट्री’ अब भी अमल में, आरक्षण के लिए ‘रास्ता खुला’ है: जितेंद्र सिंह
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नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बुधवार को कहा कि नौकरशाही में ‘लेटरल एंट्री’ को रद्द नहीं किया गया है और सरकार आरक्षण के लिए ”अब भी तैयार” है, हालांकि पहले इसे व्यावहारिक नहीं पाया गया था. ‘पीटीआई’ के साथ एक विशेष वीडियो साक्षात्कार में सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘लेटरल एंट्री’ र्भितयों को संस्थागत बनाने का श्रेय दिया.

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ‘लेटरल एंट्री’ के जरिये सीधे उन पदों पर उम्मीदवारों की नियुक्ति करता है, जिन पदों पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों की तैनाती होती है. इसमें निजी क्षेत्रों से अलग-अलग क्षेत्र के विशेषज्ञों को विभिन्न मंत्रालयों व विभागों में सीधे संयुक्त सचिव और निदेशक व उप सचिव के पद पर नियुक्ति दी जाती है. आरक्षण प्रावधान की कमी को लेकर राजनीतिक विवाद के बाद, संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने पिछले वर्ष अगस्त में सरकारी विभागों में ‘लेटरल एंट्री’ के माध्यम से प्रमुख पदों को भरने के लिए अपना विज्ञापन रद्द कर दिया था.

केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्री सिंह ने कहा, ”हमने सोचा था कि यह (लेटरल एंट्री में आरक्षण) व्यावहारिक नहीं है. लेकिन अगर कुछ विकल्प हैं जिन्हें व्यवहार्य बनाया जा सकता है, तो हम अब भी तैयार हैं.” सिंह ने हालांकि कहा कि सरकार के ‘लेटरल एंट्री’ कार्यक्रम को न तो छोड़ा गया है और न ही समाप्त किया गया है. उन्होंने कहा कि पहले भी सरकार में ‘लेटरल एंट्री’ के उदाहरण रहे हैं और सबसे बड़ा उदाहरण पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत मनमोहन सिंह का है, जब उन्हें सरकार का मुख्य आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया गया था.

सिंह ने कहा, ”पहले यह व्यक्तिपरक होता था, लेकिन मोदी सरकार ने ऐसी र्भितयों के लिए एक संस्थागत ढांचा तैयार किया और उन्हें यूपीएससी के माध्यम से कराया.” उन्होंने कहा, ”हमने कुछ नियम, शर्तें, अनुभव और योग्यताएं तय की थीं. इसलिए, आप जानते हैं, उस समय चयन प्रक्रिया स्थगित कर दी गई थी, क्योंकि कुछ लोगों ने कहा था कि इसमें आरक्षण होना चाहिए.” उन्होंने कहा, “उदाहरण के लिए, यदि आप ‘पीटीआई’ के मुख्य संपादक की तलाश कर रहे हैं, तो आप पहले से तय निर्णय नहीं ले सकते कि उम्मीदवार दलित होगा या ओबीसी या सामान्य वर्ग का होगा.”

उन्होंने कहा, ”यदि आप यह भी कहें कि मैं इसे बारी-बारी से करूंगा और इस वर्ष मेरे पास एक दलित संपादक होगा, अगले वर्ष एक ओबीसी, उसके बाद मेरे पास सामान्य उम्मीदवार होगा, तो भ्रांति यह है कि यदि मुझे एक वर्ष में एक विशेष श्रेणी का उम्मीदवार नहीं मिला तो क्या होगा.” सिंह ने कहा, ”तो क्या मुझे संपादक की कुर्सी चाहिए? मुझे लगता है कि ऐसा हर जगह हो रहा है, यहां तक कि निजी क्षेत्र में भी. ये उस तरह की नियुक्तियां होती है जिसमें आपको किसी क्षेत्र में विशेषज्ञ की जरूरत होती है.” उन्होंने कहा कि सरकार ने फिर भी लोकतंत्र की सच्ची भावना के अनुरूप उसे उचित अवसर देने का निर्णय लिया है.

सिंह ने कहा, ”यदि कोई विकल्प उपलब्ध है तो आप हमें बताएं, हम उस पर चर्चा करेंगे.” उन्होंने कहा, ”हमने सोचा था कि यह (उस समय) संभव नहीं था. लेकिन यदि कुछ विकल्प हैं जिन्हें संभव बनाया जा सकता है, तो हम अभी भी इसके लिए तैयार हैं. इसीलिए हमने इस (लेटरल एंट्री भर्ती) को रोक दिया है.” यूपीएससी ने 17 अगस्त, 2024 को ‘लेटरल एंट्री’ के माध्यम से 45 पदों – 10 संयुक्त सचिवों और 35 निदेशकों या उप सचिवों – की भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की थी.

इस निर्णय की हालांकि विपक्षी दलों ने आलोचना की थी, जिनका दावा था कि इससे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के आरक्षण अधिकारों को कमजोर किया गया है. भाजपा की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख एवं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी कहा था कि प्रस्तावित भर्ती उनके लिए ”चिंता का विषय” है और वह इस मामले को केंद्र के समक्ष उठाएंगे. यूपीएससी ने पिछले साल 20 अगस्त को विज्ञापन रद्द कर दिया था.

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