
नयी दिल्ली. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में वाम एकता ने बृहस्पतिवार को अपना दबदबा बरकरार रखते हुए छात्र संघ चुनाव में केंद्रीय पैनल के सभी पदों पर जीत हासिल कर ली. ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा)’, ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई)’ और ‘डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (डीएसएफ)’ के गठबंधन ने छात्र संघ चुनाव में भारी जीत हासिल की है और जेएनयू परिसर में अपना दबदबा फिर कायम किया. अदिति मिश्रा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) सर्मिथत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के विकास पटेल को 449 मतों से हराकर अध्यक्ष चुनी गईं.
किझाकूट गोपिका बाबू ने तान्या कुमारी को हराकर उपाध्यक्ष पद जीता, जबकि सुनील यादव और दानिश अली ने अपने दक्षिणपंथी प्रतिद्वंद्वियों क्रमश: राजेश्वर कांत दुबे और अनुज को हराकर महासचिव और संयुक्त सचिव पद जीते. इस साल लगभग 9,043 विद्यार्थी मतदान के लिए पात्र थे. चुनाव में 67 प्रतिशत मतदान हुआ, जो पिछले चुनाव के 70 प्रतिशत से थोड़ा कम है. जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में की ज.ोरदार भागीदारी देखी गई, विद्यार्थी छात्रावासों और स्कूलों के बाहर नारे, ढोल-नगाड़ों और चुनावी गीतों के बीच कतारों में खड़े थे.
यह छात्रसंघ परिणाम अभाविप के लिए एक झटका है, जिसने पिछले साल वैभव मीणा के संयुक्त सचिव पद पर जीत के साथ जेएनयूएसयू केंद्रीय पैनल में वापसी की थी. यह एक दशक में संगठन की पहली जीत थी. इससे पहले, 2015 में सौरभ शर्मा की जीत ने इस दक्षिणपंथी संगठन के 14 साल के सूखे को खत्म किया था.
इससे पहले, अध्यक्ष पद पर अभाविप की एकमात्र जीत 2000-01 में हुई थी, जब संदीप महापात्रा ने वामपंथियों के प्रभुत्व को ध्वस्त किया था. इस वर्ष के परिणाम के साथ, वामएकता ने अपना राजनीतिक प्रभुत्व पुन? स्थापित किया है और जेएनयू में नेतृत्व की अपनी लंबी परंपरा को जारी रखा है . जेएनूय एक ऐसा परिसर है जिसे अक्सर बहस, असहमति और छात्र सक्रियता का केंद्र माना जाता है.



