कर्ज घोटाला मामला: न्यायालय ने वधावन बंधुओं को दी गई जमानत रद्द की

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Wed, 24 Jan 2024 02:12 PM
कर्ज घोटाला मामला: न्यायालय ने वधावन बंधुओं को दी गई जमानत रद्द की
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नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने करोड़ों रुपये के बैंक कर्ज घोटाला मामले में दीवान हाउंिसग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) के पूर्व प्रवर्तकों कपिल वधावन और उनके भाई धीरज वधावन को मिली जमानत बुधवार को रद्द कर दी।

न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति एस सी शर्मा की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय और निचली अदालत ने उन्हें जमानत देते हुए त्रुटि की। पीठ ने कहा, ‘‘हमें यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि प्रतिवादी आरोपियों के खिलाफ निर्धारित समयसीमा में आरोपपत्र दाखिल किए जाने और उनके द्वारा किए कथित अपराधों पर विशेष अदालत द्वारा उचित समय पर संज्ञान लिए जाने के बाद, प्रतिवादी इस आधार पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 167 (2) के तहत जमानत के वैधानिक अधिकार का दावा नहीं कर सकते कि अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच अभी चल रही है।’’

उसने वधावन बंधुओं को तुरंत हिरासत में लिए जाने का निर्देश दिया। इससे पहले केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कपिल वधावन और उसके भाई धीरज को निचली अदालतों द्वारा वैधानिक जमानत दिए जाने का उच्चतम न्यायालय में विरोध किया था।

सीबीआई की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस वी राजू ने कहा था कि मामले में आरोपपत्र 90 दिन की वैधानिक अवधि के भीतर दाखिल किया गया लेकिन फिर भी आरोपियों को वैधानिक जमानत दी गयी।

दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत अगर जांच एजेंसी 60 या 90 दिनों की अवधि के भीतर किसी आपराधिक मामले में जांच के निष्कर्ष पर आरोप पत्र दाखिल करने में विफल रहती है तो आरोपी वैधानिक जमानत पाने का हकदार हो जाता है।

इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने प्राथमिकी दर्ज करने के 88वें दिन आरोप पत्र दाखिल किया जिसके बाद निचली अदालत ने आरोपी को जमानत दे दी और दिल्ली उच्च न्यायालय ने आदेश को बरकरार रखा।

एएसजी ने कहा था कि अन्य पहलुओं पर और कुछ अन्य आरोपियों के खिलाफ सीबीआई की जांच जारी है और निचली अदालतों ने कहा कि आरोपपत्र अंतिम नहीं है और उन्होंने आरोपियों को जमानत दे दी। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी की याचिका के समर्थन में कई फैसले हैं।

इससे पहले 30 मई को दिल्ली उच्च न्यायालय ने करोड़ों रुपये के बैंक ऋण घोटाला मामले में डीएचएफएल प्रवर्तकों को दी गई वैधानिक जमानत को बरकरार रखा था। उच्च न्यायालय ने पिछले साल तीन दिसंबर के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि उन्हें जमानत देने का निर्णय ‘‘बेहतर तर्कों और कारणों’’ पर आधारित था।

वधावन बंधुओं को पिछले साल 19 जुलाई को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। मामले में 15 अक्टूबर 2022 को आरोप पत्र दाखिल किया गया और इस पर संज्ञान लिया गया। मामले में प्राथमिकी यूनियन बैंक आॅफ इंडिया द्वारा की गई एक शिकायत पर आधारित थी।

आरोप है कि डीएचएफएल, उसके तत्कालीन सीएमडी कपिल वधावन, तत्कालीन निदेशक धीरज वधावन और अन्य आरोपी व्यक्तियों ने यूनियन बैंक आॅफ इंडिया के नेतृत्व वाले 17 बैंकों के संघ को धोखा देने के लिए एक आपराधिक साजिश रची और आरोपियों एवं अन्य लोगों ने आपराधिक साजिश के तहत बैंकों के संघ को कुल 42,871.42 करोड़ रुपये के भारी ऋण स्वीकृत करने के लिए प्रेरित किया। शिकायकर्ता ने आरोप लगाया कि इस घोटाले से बैंकों के संघ को 34,615 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

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