लोकसभा अध्यक्ष ने सदन के भीतर पक्ष-विपक्ष के बीच आपसी संवाद बढ़ाने की जरूरत पर दिया जोर

इंदौर. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्थानीय निकायों से लेकर संसद तक पक्ष और विपक्ष के बीच आपसी संवाद बढ़ाने की जरूरत पर मंगलवार को बल दिया और कहा कि सदनों के भीतर सहमति और असहमति की अभिव्यक्ति देश के लोकतंत्र की शक्ति है. बिरला ने संसद के 22 जुलाई से शुरू होने वाले बजट सत्र से पहले यह उम्मीद भी जताई कि 18वीं लोकसभा के सभी दलों के सदस्य जनता की समस्याओं और चुनौतियों पर उच्च स्तरीय संवाद करेंगे. राजस्थान के कोटा-बूंदी क्षेत्र से चुनाव जीतने वाले बिरला लगातार दूसरी बार लोकसभा अध्यक्ष चुने गए हैं.

उन्होंने इंदौर में अपने नागरिक अभिनंदन समारोह में कहा, ”(लोकसभा अध्यक्ष के तौर पर) मेरे नये कार्यकाल के दौरान मेरी कोशिश रहेगी कि संसद के प्रति लोगों का विश्वास और बढ़े. मेरी सभी दलों से अपेक्षा रहेगी कि संसद में लोगों की समस्याओं, कठिनाइयों और चुनौतियों पर उच्च कोटि की चर्चा और संवाद हो और हम संसद में भारत के साथ ही दुनिया की चुनौतियों के समाधान का रास्ता भी निकालें.” उन्होंने कहा कि मतदाता बड़ी अपेक्षाओं और आकांक्षाओं के साथ जन प्रतिनिधियों को चुनकर लोकसभा भेजते हैं, लिहाजा वह कोशिश करेंगे कि सदन में सभी सदस्यों के मत तथा विचार सामने आएं और अच्छा संवाद हो सके.

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा,”पक्ष-प्रतिपक्ष और सहमति-असहमति हमारे लोकतंत्र की ताकत है. भारत की लोकतांत्रिक यात्रा आपसी संवाद के जरिये ही 18वीं लोकसभा तक पहुंची है तथा देश विकास की राह पर आगे बढ़ा है.” इससे पहले, बिरला ने स्थानीय जन प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के कार्यक्रम में भी सदनों के भीतर पक्ष और विपक्ष के बीच आपसी संवाद बढ़ाने की जरूरत को रेखांकित किया.

उन्होंने कहा,”मैं चाहता हूं कि इंदौर नगर निगम का सदन उच्च कोटि के संवाद और नवाचारों के कारण अन्य नगर पालिकाओं, नगर परिषदों और पंचायतों के लिए मार्गदर्शक बने क्योंकि नियोजित गतिरोध या सदन की आसंदी के पास आकर हल्ला-गुल्ला और नारेबाजी करने से लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा.” उन्होंने कहा कि लोगों की समस्याओं का समाधान सदनों में पक्ष-विपक्ष के बीच संवाद के जरिये सहमति-असहमति जताने से होगा.

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ”सदनों में सबके विचार और मत सामने आने से हमें कार्य करने में स्पष्टता हासिल होती है, सरकार और प्रशासन की जवाबदेही तय होती है, कार्यपालिका में निष्पक्षता आती है और इसमें ईमानदारी लाने के लिए जवाबदेही भी तय की जा सकती है.” उन्होंने भारत की सशक्त लोकतांत्रिक परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि नयी दिल्ली में जी-20 संसदीय अध्यक्षों के पिछले साल आयोजित शिखर सम्मेलन (पी-20) के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह लोकतांत्रिक पद्धति के बारे में चर्चा की थी जिसके बाद कई देशों के प्रतिनिधिमंडल पिछले लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया के गवाह बनने के लिए भारत आए.

बिरला ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है. लोकसभा अध्यक्ष ने कहा,”स्थानीय निकायों की भी जिम्मेदारी है कि वे जनता की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं पर खरे उतरते हुए इस भरोसे में इजाफा करें. इसके लिए हमें स्थानीय निकायों के सदनों में एक तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है.” बिरला ने यह भी कहा कि नगर निगमों की परिषदों की बैठकों की कार्यवाही भी विधानसभाओं के स्तर की होनी चाहिए जिसमें प्रश्नकाल और शून्यकाल में पानी और सीवरेज जैसी बुनियादी समस्याओं के साथ ही नवाचारों पर पूरे दिन चर्चा होनी चाहिए.

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