यौन उत्पीड़न के आरोपों में कई मलयालम अभिनेताओं पर गिरी गाज

मलयालम अभिनेता मुकेश को दुष्कर्म मामले में गिरफ्तारी से राहत मिली

तिरुवनंतपुरम/कोच्चि. सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के विधायक एम. मुकेश और अभिनेता जयसूर्या समेत मलयालम फिल्मों की नामचीन हस्तियों के खिलाफ बलात्कार और यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया गया है जिसके बाद सत्तारूढ़ गठबंधन ने बृहस्पतिवार को मांग की कि मुकेश को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना चाहिए. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की नेता एनी राजा ने कहा कि मुकेश के विधायक बने रहने का अब कानूनी या नैतिक आधार नहीं है, क्योंकि उनके खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया गया है. उन्होंने विधायक से पद छोड़ने की अपील की.

मुकेश पर एक अभिनेत्री ने आरोप लगाया है कि अभिनेता ने कई साल पहले उसका यौन उत्पीड़न किया था जिसके आधार पर उन पर मामला दर्ज किया गया. लोकप्रिय मलयालम अभिनेताओं जयसूर्या और मनियनपिला राजू के खिलाफ भी यौन उत्पीड़न के आरोप में अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं. पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी. सारा घटनाक्रम न्यायमूर्ति के हेमा समिति की रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले निष्कर्षों से जुड़ा माना जा रहा है.

कुछ फिल्मों में काम कर चुकी शिकायतकर्ता ने जाने माने अभिनेता एवं विधायक एम. मुकेश, जयसूर्या और मनियानपिला राजू के अलावा अभिनेताओं के संघ में प्रमुख भूमिका निभाने वाले इडावेला बाबू के खिलाफ यौन शोषण के आरोप लगाए हैं. अभिनेत्री ने फेसबुक पर पोस्ट में लिखा था, ”मैं मलयालम फिल्म उद्योग में मुकेश, मनियनपिला राजू, इडावेला बाबू, जयसूर्या, चंद्रशेखरन, प्रोडक्शन कंट्रोलर नोबल और विचू द्वारा मेरे साथ शारीरिक और मौखिक दुर्व्यवहार किए जाने की घटनाओं की रिपोर्ट करने के लिए यह पोस्ट लिख रही हूं.”

अभिनेत्री ने लिखा, ”वर्ष 2013 में एक प्रोजेक्ट पर काम करते समय इन व्यक्तियों ने मुझे शारीरिक और मौखिक रूप से प्रताड़ित किया. मैंने सहयोग करने और काम जारी रखने की कोशिश की, लेकिन यह दुर्व्यवहार बर्दाश्त से बाहर हो गया.” कोच्चि शहर के मरदु पुलिस थाने में मुकेश के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) के तहत बुधवार रात प्राथमिकी दर्ज की गई. पुलिस ने बताया कि यह मामला भारतीय दंड संहिता के तहत इसलिए दर्ज किया गया है, क्योंकि कथित अपराध भारतीय न्याय संहिता के लागू होने से पहले हुआ था.

माकपा की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री के. के. शैलजा ने कहा कि यदि यह साबित हो जाता है कि पार्टी विधायक एम. मुकेश पर लगाए गए आरोप सही हैं तो उन्हें विधायक के पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है. शैलजा ने कहा कि न्यायमूर्ति हेमा समिति की रिपोर्ट के मद्देनजर वर्तमान में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) मुकेश के खिलाफ लगे आरोपों सहित अन्य मामलों में लगाए गए सभी आरोपों की जांच कर रहा है. उन्होंने कहा कि एसआईटी के अपनी रिपोर्ट देने के बाद सरकार इस मामले में उचित कार्रवाई करेगी.

शैलजा ने कहा, ”यदि उन्होंने कोई अपराध किया है, तो वह अपने पद पर बने रहने के योग्य नहीं हैं. लेकिन अभी हम जांच के शुरुआती चरण में हैं और हम यह नहीं कह सकते कि उन्हें इस्तीफा देना चाहिए या नहीं.” एनी राजा ने कहा, ”अब जब उनके (मुकेश के) खिलाफ मामला दर्ज हो गया है तो उनके पास उस पद पर बने रहने का नैतिक या कानूनी आधार नहीं रह गया है. उन्हें विधायक के रूप में अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.”

उन्होंने कहा, ”यह कदम हेमा समिति के निष्कर्षों और सिफारिशों के मद्देनजर फिल्म उद्योग में कार्य के दौरान महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के राज्य सरकार के प्रयासों के अनुरूप होगा.” भाकपा नेता ने कहा कि अगर मुकेश विधायक पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो राज्य सरकार के ”ईमानदार” प्रयास बाधित हो जाएंगे. उन्होंने कहा, ”इससे राज्य सरकार की छवि पर भी असर पड़ेगा. वाम मोर्चा महिलाओं का समर्थक है.” एलडीएफ के विधायकों पर विपक्ष के तीखे हमले के बीच गठबंधन ने कहा कि बलात्कार के आरोपों का सामना करने वाले कांग्रेस विधायकों ने इस्तीफा नहीं दिया है.

एलडीएफ के संयोजक ई पी जयराजन ने कहा कि विभिन्न अभिनेताओं और निर्देशकों के खिलाफ लगे आरोपों के संबंध में दर्ज किसी भी मामले में न तो माकपा और न ही वामपंथी सरकार, गलत काम करने वाले को बचाएगी. संवाददाताओं ने जयराजन से सवाल किया था कि मुकेश इस्तीफा देंगे या नहीं. जयराजन ने कहा कि इससे पहले दो अन्य विधायकों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के बड़े मामले दर्ज किए गए और उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है. उनका इशारा कांग्रेस विधायक एम विंसेंट और एल्डहोस कुन्नापिल्ली की ओर था.

जयराजन ने कहा, ”अगर वे इस्तीफा दे देते तो तीसरे विधायक (मुकेश) को भी इस्तीफा देना पड़ता. कानून सभी विधायकों पर समान रूप से लागू होता है. आप मुकेश का इस्तीफा मांग रहे हैं और बाकी दो विधायकों को बचा रहे हैं.” जब उनसे कहा गया कि एनी राजा सहित भाकपा के कुछ नेताओं ने मुकेश का इस्तीफा मांगा है तो जयराजन ने कहा कि ”कोई भी कुछ भी मांग सकता है.” जयराजन ने कहा कि राज्य की वामपंथी सरकार ने न्यायमूर्ति हेमा समिति की रिपोर्ट के मद्देनजर महिला सुरक्षा और फिल्म उद्योग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी और कड़े कदम उठाए हैं.

उन्होंने कहा कि सरकार का नैतिक स्तर उच्च है क्योंकि मुकेश के खिलाफ गैर-जमानती प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है.
जयराजन ने कहा, ”सरकार किसी भी गलत काम करने वाले को न तो बचाएगी और न ही उसके प्रति कोई नरमी दिखाएगी. चाहे वे कोई भी हों, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. सरकार हमेशा सही रुख अपनाती है. आप बस, इंतजार करें और देखें.” इससे पहले, तिरुवनंतपुरम ‘म्यूजियम पुलिस’ ने आठ साल पहले एक होटल में एक अभिनेत्री से बलात्कार करने के आरोप में अभिनेता सिद्दीकी के खिलाफ बुधवार को मामला दर्ज किया था.

इससे पहले भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला करना या आपराधिक बल प्रयोग) के तहत निर्देशक रंजीत के खिलाफ एक मामला पश्चिम बंगाल की एक अभिनेत्री की शिकायत पर दर्ज किया गया था. यह शिकायत 2009 की एक घटना के संबंध में की गई है. वर्ष 2017 में एक अभिनेत्री पर हमले के बाद केरल सरकार द्वारा गठित न्यायमूर्ति हेमा समिति की रिपोर्ट में मलयालम फिल्म उद्योग में महिलाओं के उत्पीड़न एवं शोषण के मामलों का खुलासा किया गया है.

मलयालम अभिनेता मुकेश को दुष्कर्म मामले में गिरफ्तारी से राहत मिली

कोच्चि की एक अदालत ने दुष्कर्म के आरोपी अभिनेता और विधायक के. मुकेश को बृहस्पतिवार को गिरफ्तारी से राहत प्रदान करते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि तीन सितंबर तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाए. कोल्लम से माकपा विधायक मुकेश पर एक अभिनेत्री ने कुछ साल पहले यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है जिसके बाद 28 अगस्त को उनके खिलाफ दुष्कर्म का एक मामला दर्ज किया गया. इसके बाद मुकेश ने अदालत में अग्रिम जमानत की गुहार लगाई. यहां प्रधान सत्र अदालत ने मुकेश को अंतरिम राहत देते हुए कहा कि अभिनेता के कानून से भागने की संभावना कम है.

अदालत ने अपने आदेश में कहा, ”इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए कि कानून के शिकंजे से भागने की कोई संभावना नहीं है, आईओ (जांच अधिकारी) को निर्देश दिया जाता है कि याचिकाकर्ता को 3/9/24 तक गिरफ्तार नहीं किया जाए.” अभिनेता ने अपनी अग्रिम जमानत अर्जी में दावा किया कि पीड़िता द्वारा उनके खिलाफ दिया बयान दुर्भावनापूर्ण इरादों वाला है. उन्होंने दावा किया कि मामला गुप्त मकसद से और उनके राजनीतिक तथा फिल्मी करियर को नुकसान पहुंचाने के लिए दर्ज किया गया.

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