हम इस बिल के खिलाफ में करेंगे वोट- खरगे; अनुप्रिया पटेल ने कहा- देश की आधी आबादी को इंतजार

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Fri, 17 Apr 2026 01:54 PM
हम इस बिल के खिलाफ में करेंगे वोट- खरगे; अनुप्रिया पटेल ने कहा- देश की आधी आबादी को इंतजार
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नई दिल्ली: संविधान में संशोधन के लिए पेश किए गए विधेयकों पर पर आज भी चर्चा जारी रहेगी। विपक्ष के नेता राहुल गांधी लोकसभा में इन विधेयकों पर विचार रखेंगे। इससे पहले संसद के विशेष सत्र में पहले दिन की चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी, असदुद्दीन ओवैसी, प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं ने अपने विचार रखे।

सांसद शांभवी चौधरी ने विपक्ष से पूछा सवाल

एलजेपी (रामविलास) सांसद शांभवी चौधरी ने महिला आरक्षण विधेयक पर कहा, ‘2029 तक ये सही तरीके से ये लागू हो जाए उसके लिए आज पास किया जा रहा है। अब 2029 में जनगणना की कोई बाधा नहीं रहे और वो सही तरीके से पारित हो जाए और देश में लागू हो जाए इसमें कोई गलत बात नहीं है। जब परिसीमन अगर हो रहा है और परिसीमन से सुशासन धरातल पर उतारा जा रहा है तो इससे विपक्ष को दिक्कत क्यों है?’

विपक्ष पर बरसे केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल

केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा, ‘प्रधानमंत्री महिलाओं के राजनीतिक और सामाजिक उत्थान के लिए बिल लेकर आए हैं। देश के सबसे बड़े पंचायत में जाने का अवसर प्रदान किया। उन्होंने अपनी नीति और नियत स्पष्ट की और नेतृत्व महिलाओं को देने का काम किया। विपक्ष इसका विरोध कर रहा है और विपक्ष का ये विरोध महिलाओं के हक को समाप्त करने का काम कर रहा है।’

डीएमके सांसद ए. राजा ने बिल का किया विरोध

लोकसभा में तमिलनाडु के नीलगिरि से डीएमके सांसद ए. राजा ने संविधान संशोधन बिल का विरोध किया।

खरगे बोले- हम इस बिल को पास नहीं होने देंगे

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि हम इस बिल के खिलाफ वोट करेंगे और इस बिल को पास नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि हमारे लोग लड़ रहे हैं और इसे लोकसभा में हरा देंगे।

कांग्रेस सांसद हैबी ईडन ने किया बिल का विरोध

केरल के एर्नाकुलम से कांग्रेस के सांसद हैबी ईडन ने इस बिल का विरोध किया और कहा कि यह बिल परिसीमन के एजेंडे के साथ जुड़ा है।

अनुप्रिया पटेल ने संविधान संशोधन का किया समर्थन

केंद्रीय मंत्री और अपना दल (एस) से सांसद अनुप्रिया पटेल ने संविधान संशोधन पर चर्चा के दौरान कहा कि आज देश के आधी आबादी की निगाहें संसद पर टिकी हुई है और वो देख रही हैं कि क्या भारतीय राजनीति में जिस बड़े बदलाव का संकेत मिल रहा है, वो सही मायने में अपने वास्तिवक अंजाम तक पहुंच पाएगा। उन्होंने कहा कि तीन दशक से अधिक समय बीत चुका है और अनेक राजनीतिक दलों के घोषणा पत्रों का हिस्सा होने के बाद भी महिला की राजनीतिक भागीदारी का मसला इतने वर्षों से हाशिए पर रहा है। ये सच है कि 2023 में सभी दलों ने इस संयुक्त रूप से पारित किया है। लेकिन अभी भी इस बिल के लागू होने का इंतजार है।

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