
छत्रपति संभाजीनगर/मुंबई. मराठा आरक्षण की मांग को लेकर महाराष्ट्र में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच बुधवार को राज्य के धाराशिव जिले के अधिकारियों ने मराठा समुदाय के पात्र सदस्यों को कुनबी जाति के प्रमाण पत्र वितरित करने शुरू किए, जिसके साथ ही अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल होने का उनका मार्ग प्रशस्त हो गया.
एक अधिकारी ने बताया कि इस तरह का पहला प्रमाण पत्र सबूत के आधार पर जिले के कारी गांव के सुमित माने को सौंपा गया.
जिलाधिकारी सचिन ओम्बासे ने माने को कुनबी जाति प्रमाण पत्र सौंपा. इससे एक दिन पहले राज्य सरकार ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें संबंधित अधिकारियों से मराठा समुदाय के पात्र सदस्यों को नए कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए कहा गया है ताकि उनके लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ हासिल करने का मार्ग प्रशस्त हो सके.
महाराष्ट्र कैबिनेट ने पिछले महीने फैसला किया था कि मराठवाड़ा क्षेत्र के उन मराठों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे जिनके पास निजाम युग के ऐसे राजस्व या शिक्षा दस्तावेज हैं जिनके जरिए कुनबी के तौर पर उनकी पहचान होती हो. कृषि से जुड़ा समुदाय कुनबी समुदाय महाराष्ट्र में ओबीसी श्रेणी के अंतर्गत आता है और इसे शिक्षा व सरकारी नौकरियों में आरक्षण मिला हुआ है.
माने को कुनबी जाति प्रमाण पत्र देने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए, धाराशिव के जिलाधिकारी ओम्बासे ने कहा, “कुनबी मुद्दे पर गठित समिति ने मराठवाड़ा के हर जिले का दौरा किया और 1967 से पहले की अवधि के सबूत खोजने की कोशिश की.” उन्होंने कहा कि अकेले धाराशिव में 40 लाख अभिलेखों की जांच की गई और कुल 459 कुनबी अभिलेख मिले, जिनमें से 110 कारी गांव के हैं.
ओम्बासे ने कहा, “सरकार के निर्णय के अनुसार, हमारे जिले में कुनबी प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. अभिलेखों के अनुसार, हमने आज पहला कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी किया है. हम शेष लाभार्थियों की पहचान करके उन्हें प्रमाणपत्र सौंपेगे.”
उन्होंने कहा, “हम अगले 8-10 दिन में (आवेदकों को) ये प्रमाणपत्र जारी करने के इच्छुक हैं. राजस्व विभाग की एक टीम आवेदकों से संपर्क करेगी और उन्हें प्रमाणपत्र जारी करेगी.” उन्होंने कहा कि जो रिकॉर्ड मिलते हैं उन्हें हमारी जिला प्रशासन की वेबसाइट पर प्रमाणित प्रतियों के रूप में अपलोड किया जाता है. अधिकारी ने कहा, “शेष दस्तावेज अगले कुछ दिनों में अपलोड कर दिए जाएंगे. लोगों को उचित दस्तावेजों, पते के प्रमाण और परिवार के इतिहास के साथ ऑनलाइन आवेदन करना चाहिए.”
मराठा समुदाय को आरक्षण अन्य समुदायों के कोटा को छुए बिना दिया जाएगा : मुख्यमंत्री शिंदे
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि बुधवार को हुई सर्वदलीय बैठक में फैसला किया गया कि राज्य में अन्य समुदायों को दिये जा रहे वर्तमान आरक्षण में छेड़छड़ किए बिना मराठा समुदाय को आरक्षण दिया जाना चाहिए. यहां संवाददाताओं से बातचीत करते हुए शिंदे ने कार्यकर्ता मनोज जरांगे से अपील की कि वह अपना अनशन समाप्त कर दें और सरकार को कुछ समय दें. जरांगे 25 अक्टूबर से अनशन पर हैं.
शिंदे ने कहा, ”सर्वदलीय बैठक में सर्वसम्मति से फैसला किया गया कि मौजूदा समय में जिन समुदायों को आरक्षण मिल रहा है, उनमें छेड़छाड़ किए बिना मराठा समुदाय को आरक्षण देने की कोशिश की जानी चाहिए. मैं मनोज जरांगे से अपील और अनुरोध करता हूं कि वह अपना अनशन समाप्त कर दें और सरकार से सहयोग करें. राज्य को उच्चतम न्यायालय में दाखिल करने के लिए उपचारात्मक याचिका तैयार करने में कुछ समय की जरूरत है.”
उन्होंने कहा कि सरकार दो मोर्चों पर काम कर रही है, पहला मराठवाड़ा में मराठा समुदाय को कुनबी जाति का प्रमाणपत्र (ताकि अन्य पिछड़ा वर्ग के तहत आरक्षण का लाभ ले सके) जारी कर रही है और दूसरा शीर्ष न्यायालय में दाखिल करने के लिए त्रृटि रहित उपचारात्मक याचिका तैयार कर रही है.
शिंदे ने कहा, ” सर्वदलीय बैठक में पिछले कुछ दिनों में सामने आई हिंसक घटनाओं पर भी निराशा व्यक्त की गई. इस तरह की हिंसक घटनाएं आरक्षण के लिए मराठा समुदाय के आंदोलन पर एक धब्बा होंगी. राज्य सरकार को एक याचिका तैयार करने के लिए कुछ समय चाहिए जो कानूनी समीक्षा के दौरान सटीक हो.”
उन्होंने कहा, ” राज्य सरकार ईमानदार कोशिश कर रही है ताकि मराठा समुदाय को आरक्षण का लाभ मिल सके. पिछड़ा वर्ग आयोग युद्धस्तर पर काम कर रहा है. जब देवेन्द्र फडणवीस मुख्यमंत्री थे तब सरकार द्वारा दिए गए आरक्षण को बंबई उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा था लेकिन कुछ त्रुटियों के आधार पर उच्चतम न्यायालय ने इसे रद्द कर दिया था. हम इस स्थिति की पुनरावृत्ति से बचना चाहते हैं.” जरांगे से अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें सरकार के प्रयासों पर भरोसा करना चाहिए. उन्होंने कहा, ”कुछ हिंसक घटनाओं के कारण आम जनता को सुरक्षा संबंधी कोई चिंता नहीं होनी चाहिए. पूरे मराठा समुदाय को राज्य सरकार का समर्थन करना चाहिए.



