
नयी दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने मंगलवार को राज्यसभा को बताया कि भारत ने 2020 तक मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) को घटाकर, प्रति लाख जीवित जन्म पर 100 करने का राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (एनएचपी) 2017 का लक्ष्य हासिल कर लिया है और 2030 तक इसे 70 करने के एसडीजी लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में अग्रसर है.
उच्च सदन को एक प्रश्न के उत्तर में नड्डा ने बताया कि भारत के महा पंजीयक (आरजीआई) द्वारा जारी नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) के अनुसार, देश का वर्तमान मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) प्रति लाख जीवित जन्म पर 97 है. उन्होंने कहा कि एमएमआर 2014-16 में 130 था जो 2018-20 में 97 हो गया. इस प्रकार एमएमआर में 33 अंकों की उल्लेखनीय गिरावट आई है.
नड्डा ने कहा, ”भारत ने 2020 तक राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (एनएचपी) 2017 के,प्रति लाख जीवित जन्मों पर 100 एमएमआर का लक्ष्य हासिल कर लिया है और 2030 तक एमएमआर प्रति लाख जीवित जन्मों पर 70 का एसडीजी लक्ष्य हासिल करने की दिशा में अग्रसर है.” उन्होंने कहा कि भारत में एमएमआर में 83 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि वैश्विक स्तर पर इसमें 42 प्रतिशत की कमी आई है. इसी तरह, भारत में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (यू5एमआर) में 75 प्रतिशत की कमी आई है, जो वैश्विक स्तर पर 58 प्रतिशत की गिरावट से अधिक है.
उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने 2019 में सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) पहल शुरू की, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधा में आने वाली हर महिला और नवजात शिशु को बिना किसी खर्च के सुनिश्चित, सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना और सेवाओं से इनकार को कतई बर्दाश्त नहीं करना है.
सभी 22 नए एम्स में कैंसर के इलाज के लिए सुविधा केंद्रों को मंजूरी दी गई : नड्डा
कैंसर रोगियों के इलाज के लिए सभी 22 नए अखिल भारतीय आयुर्वज्ञिान संस्थानों (एम्स) में सुविधा केंद्रों को मंजूरी दी गई है और समय रहते इस बीमारी का पता लगाने के लिए इसकी जांच पर जोर दिया जा रहा है. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे पी नड्डा ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान बताया कि देश में एक लाख 75 हजार आयुष्मान आरोग्य मंदिर हैं जहां कैंसर की जांच की जा रही है. उन्होंने बताया कि मुख कैंसर की करीब 29.32 करोड़ जांच हुई जिसमें से एक लाख 63 हजार मामलों में कैंसर का पता चला. उन्होंने कहा कि इसी तरह स्तन कैंसर के लिए 15 करोड़ 60 लाख जांच हुई और 57 हजार मामलों में स्तन कैंसर का पता चला.
नड्डा ने बताया कि गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के लिए नौ करोड़ 48 हजार जांच हुई और 97 हजार मामलों में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का पता चला. उन्होंने कहा कि वह आंकड़े इसलिए बता रहे हैं ताकि पता चल सके कि लाखों जांच हुई हैं. उन्होंने बताया कि कैंसर का पता चलने के बाद मरीजों का इलाज शुरू कर दिया जाता है. उन्होंने बताया कि सभी 22 नए एम्स में कैंसर के इलाज के लिए सुविधा केंद्रों को मंजूरी दी गई है.
उन्होंने कैंसर के इलाज की सुविधा के बारे में बताया कि 372 ‘जिला कैंसर डे केयर केंद्र’ हैं जहां कीमोथैरेपी सहित अन्य इलाज किया जाता है. वित्त मंत्री ने बजट में घोषणा की हर जिले में ऐसे केंद्र खोले जाएंगे. नड्डा ने कहा कि इस साल सरकार ने 200 ‘जिला कैंसर डे केयर केंद्र’ खोलने का फैसला किया है. अगले दो साल में हर जिले में ‘जिला कैंसर डे केयर केंद्र’ होगा.
एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि कैंसर की जांच के साथ साथ सरकार टेलिमेडिसिन पर भी ध्यान और महत्व दे रही है. इसके लिए सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे मरीज की जांच कर पता कर सकें कि क्या उन्हें कैंसर है और अगर है तो किस स्टेज पर है.
उन्होंने कहा कि ‘लैन्सेट’ पत्रिका में हाल में आए एक अध्ययन में कहा गया है कि भारत ने कैंसर के उपचार शुरू करने में होने वाली देरी को कम करने में प्रगति की है. उनके अनुसार, लैंसेट द्वारा प्रकाशित अध्ययन से पता चलता है कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत, समय पर कैंसर उपचार शुरू करने में उल्लेखनीय सुधार हुआ है तथा नामांकित रोगियों को 30 दिनों के भीतर कैंसर उपचार तक पहुंच में 90 फीसदी की वृद्धि हुई है.
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने बताया कि राष्ट्रीय गैर संचारी रोग रोकथाम और नियंत्रण कार्यक्रम (एनपी-एनसीडी) के अंतर्गत 770 जिला एनसीडी क्लीनिक, 233 हृदय देखभाल इकाइयों, 372 जिला डे केयर सेंटर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 6,410 एनसीडी क्लीनिक स्थापित किए गए हैं. उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न भागों में 19 राज्य कैंसर संस्थान (एससीआई) और 20 विशिष्ट कैंसर परिचर्या केंद्र (टीसीसीसी) स्थापित किए गए हैं ताकि कैंसर का इलाज हो सके.



