मोदी सरकार मजदूर विरोधी, श्रम संहिता से रोजगार की सुरक्षा को खतरा: खरगे

नयी दिल्ली. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को मोदी सरकार पर ”मजदूर विरोधी और पूंजीपति समर्थक” होने का आरोप लगाया और दावा किया कि हाल ही में लागू चार श्रम संहिताओं के कारण श्रमिकों के रोजगार की सुरक्षा एवं स्थायित्व खतरे में पड़ गया है. खरगे, कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कई अन्य विपक्षी सांसदों ने श्रम संहिताओं के खिलाफ बुधवार को संसद परिसर में प्रदर्शन किया.

बाद में खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”मोदी सरकार मजदूर विरोधी, कर्मचारी विरोधी और पूंजीपतियों की समर्थक है. विपक्षी दलों ने आज संसद में मोदी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए, नयी लागू की गई श्रम संहिताओं पर कड़ी आपत्ति जताई. नयी संहिताओं में कुछ गंभीर चिंताएं हैं.” उन्होंने दावा किया कि छंटनी की सीमा 100 से बढ.ाकर 300 श्रमिकों तक कर दी गई है, जिसका मतलब यह है कि भारत में 80 प्रतिशत से अधिक कारखाने अब सरकार की मंजूरी के बिना श्रमिकों को नौकरी से हटा सकते हैं, जिससे नौकरी की सुरक्षा कम हो जाएगी.

खरगे ने कहा कि तय समयसीमा वाले रोजगार के विस्तार से कई स्थायी नौकरियां खत्म हो जाएंगी तथा कंपनियां अब दीर्घकालिक लाभ से बचते हुए, अल्पकालिक अनुबंध पर श्रमिकों को काम पर रख सकती हैं. उनका कहना है, ”संहिता के तहत कागज पर आठ घंटे काम की बात की गई है, लेकिन 12 घंटे की शिफ्ट भी कराई जा सकती है…. इससे थकान और सुरक्षा जोखिम बढ. जाते हैं.”

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ”संहिता प्रवासियों के लिए सुरक्षा उपायों का विस्तार करने, विस्थापन भत्ते को हटाने और प्रतिबंधात्मक 18,000 रुपये की आय सीमा को बनाए रखने में विफल है, जिससे कई प्रवासियों को सुरक्षा के बिना छोड़ दिया गया है. अनिवार्य आधार-आधारित पंजीकरण से प्रवासियों और अनौपचारिक श्रमिकों के बाहर होने का जोखिम है, जिन्हें अक्सर दस्तावेज.ीकरण त्रुटियों या सीमित डिजिटल पहुंच का सामना करना पड़ता है. निश्चित रूप से इससे सामाजिक-सुरक्षा नामांकन में बाधाएं पैदा होती हैं.” केंद्र ने बीते 21 नवंबर को 2020 से लंबित चार श्रम संहिताओं को लागू कर दिया, जिनमें सभी के लिए समय पर न्यूनतम वेतन और सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा जैसे श्रमिक-अनुकूल उपायों को शामिल किया गया है.

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