
मुंबई/अफुला (इजराइल). महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैस और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 15 साल पहले आज के ही दिन मुंबई पर हुए आतंकी हमले में आतंकवादियों से लड़ते हुए जान गंवाने वाले शहीदों को रविवार को पुष्पांजलि अर्पित की. बैस और शिंदे ने दक्षिण मुंबई में पुलिस आयुक्त के कार्यालय के परिसर में शहीदों के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की, जहां राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मंत्री मंगल प्रभात लोढ.ा, दीपक केसरकर, शहर के पुलिस प्रमुख विवेक फणसालकर और पुलिस के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे.
पुलिसर्किमयों के परिवार के सदस्यों ने भी 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमले के दौरान जान गंवाने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि दी.
राज्यपाल ने हमले में जान गंवाने वाले पुलिसर्किमयों के परिवार के सदस्यों से भी मुलाकात की. राष्ट्रीय सुरक्षा गारद, मुंबई पुलिस के र्किमयों और भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी समीर वानखेड़े ने ताज महल पैलेस होटल के सामने ‘गेटवे ऑफ इंडिया’ पर आयोजित कैंडल मार्च में हिस्सा लिया. आतंकवादियों ने जिन जगहों पर हमला किया उनमें से एक ताज महल पैलेस होटल भी था.
शहीदों की याद में आयोजित मार्च में रोटरी क्लब के सदस्य और मीठीभाई कॉलेज के छात्र भी शामिल हुए. दस पाकिस्तानी आतंकवादी समुद्री मार्ग से 26 नवंबर, 2008 को मुंबई में घुसे और अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें 18 सुरक्षार्किमयों सहित 166 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे. हमले में करोड़ों रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा था.
आतंकी हमलों में शहीद हुए सुरक्षा बलों के जवानों में आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के तत्कालीन प्रमुख हेमंत करकरे, मेजर संदीप उन्नीकृष्णन, मुंबई के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अशोक कामटे और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विजय सालस्कर शामिल थे.
सुरक्षा बलों ने बाद में नौ आतंकवादियों को मार गिराया था. अजमल कसाब एकमात्र आतंकवादी था, जिसे जिंदा पकड़ा गया था. उसे चार साल बाद 21 नवंबर 2012 को फांसी दी गई थी.
मुंबई हमले के 15 वर्ष: मोशे के नाना ने भारत का आभार व्यक्त किया
मुंबई में 2008 के आतंकवादी हमले में बाल-बाल बचे मोशे होल्त्सबर्ग के नाना-नानी ने उनका दुख महसूस करने और उसे अपना समझने के लिए भारत के लोगों का आभार व्यक्त किया है. पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने 26 नवंबर 2008 को मुंबई में कई स्थानों पर हमला किया था जिनमें से एक ‘नरीमन हाउस’ भी था जिसे चाबड हाउस भी कहा जाता है. मोशे उस वक्त सिर्फ दो वर्ष का था और हमले के वक्त अपने माता-पिता गैब्रिएल होल्त्बर्ग एवं रिवका होल्त्सबर्ग के साथ नरीमन हाउस में था. उस बर्बर हमले में मोशे के माता-पिता मारे गए थे.
मोशे के नाना रब्बी शिमोन रोसेनबर्ग ने पीटीआई से कहा, ”भारत के लोगों को याद है कि 15 वर्ष पहले आज के दिन क्या हुआ था. हमारे परिवार पर और अन्य इजराइली परिवारों पर जो कहर टूटा था आपको याद है.” उन्होंने कहा, ”मैं, मेरी पत्नी येहुदित और मोशे दिल से ये मानते हैं और इस बात के लिए भारत में आप सबका आभार व्यक्त करना चाहते हैं कि आपने हमारे दुख को महसूस किया और उसे अपना समझा.” हजराइल और हमास के बीच युद्ध की पृष्ठभूमि में उन्होंने कहा, ”इस वर्ष ने खासतौर पर दिखाया कि आतंकवादी किस तरह से यहूदियों की हत्या करना चाहते हैं, लेकिन हम पूरी दुनिया में शांति चाहते हैं.” नन्हे मोशे को हमले से बचाकर उसे सीने से चिपकाए उसकी नैनी सैंड्रा की एक तस्वीर सामने आई थी जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था.
रोसेनबर्ग ने कहा, ”मोशे ठीक है और येशिवा में पढ.ाई कर रहा है. सैंड्रा इजराइल में है और सप्ताहांत में यरूशलम से हमारे पास आती है. वह हमारे परिवार की सदस्य की ही तरह है और यह घर उसका भी है.” सैंड्रा को इजराइल सरकार ने मानद नागरिकता दी थी और उसे ‘राइटियस जंटिले’ की उपाधि से सम्मानित किया था. यह एक दुर्लभ सम्मान है और यह उन लोगों को दिया गया जिन्होंने नरसंहार के दौरान यहूदियों को बचाने में अपनी जान जोखिम में डाली.
परिवार ने इस वर्ष हिब्रू कैलेंडर के अनुसार 13 नवंबर को अपने निकट संबंधियों की याद में अफुला में र्विषक प्रार्थना की थी.
पिछले वर्ष मोशे ने एक वीडियो संदेश जारी कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंक का मुकाबला करने के तरीकों की तलाश करने की मार्मिक अपील की थी ताकि ”किसी को भी उस पीड़ा से नहीं गुजरना पड़े जिससे वह गुजरा है.” उस वीडियो में मोशे ने अपने बचने की कहानी भी साझा की. वह सिर्फ सैंड्रा के साहस के कारण ही बच सका ”जिसने उसे बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली थी.” मोशे ने अपनी परवरिश की कहानी भी दुनिया के साथ साझा की. वह अपने नाना-नानी के साथ रहता है और वे उसकी परवरिश अपने बेटे की तरह कर रहे हैं.
उसने वीडियो में 2017 में इजराइल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अपनी मुलाकात को भी याद किया. उसने कहा, ”उन्होंने मुझे प्यार से गले लगाया और मुझे मेरे नाना-नादी के साथ भारत आने का न्योता दिया.” दस पाकिस्तानी आतंकवादी 26 नवंबर 2008 को समुद्री मार्ग से दक्षिण मुंबई के इलाकों में घुसे थे और उन्होंने चाबड हाउस सहित कई स्थानों पर हमला किया था. इन हमलों में छह यहूदियों और 18 सुरक्षार्किमयों सहित 166 लोग मारे गए थे.



