एनसीईआरटी ने विवादित न्यायपालिका अध्याय हटाया, सार्वजनिक माफी मांगी

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक से न्यायपालिका पर अध्याय हटाया गया, किताब की बिक्री भी रोक दी गई

NCERT विवादित अध्याय: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने अपनी नई कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक ‘Exploring Society: India and Beyond’ से विवादित अध्याय ‘The Role of Judiciary in Our Society’ को हटा दिया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद उठाया गया, जिसमें कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कंटेंट स्वीकार्य नहीं है।

पुस्तक के अध्याय IV में न्यायपालिका के सामने चुनौतियों जैसे भ्रष्टाचार, मामलों का भारी बैकलॉग और जजों की कमी का जिक्र किया गया था। इस विवरण ने कोर्ट की गरिमा से जुड़ी बहस को जन्म दिया और विवाद बढ़ गया। एनसीईआरटी ने प्रेस रिलीज में कहा कि इस अध्याय में ‘अनुचित टेक्स्चुअल कंटेंट और त्रुटि’ शामिल थी, जो गलती से किताब में शामिल हो गई। परिषद ने कहा कि उनका किसी भी संवैधानिक संस्थान की गरिमा को गिराने का कोई इरादा नहीं था, और उन्होंने इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि न्यायपालिका जैसी संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कंटेंट मंजूर नहीं है। कोर्ट ने किताब को प्रतिबंधित कर सभी प्रतियों को वापस लेने के निर्देश दिए हैं, और अगली सुनवाई 11 मार्च को होने वाली है।

एनसीईआरटी ने कहा कि वे हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त करते हैं और हितधारकों की समझदारी की सराहना करते हैं।
यह कदम उस समय लिया गया है जब स्कूल की किताबों और उनके संवैधानिक संस्थाओं के चित्रण पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि यह छात्रों और शिक्षकों दोनों पर प्रभाव डालता है। आने वाले शैक्षणिक सत्र के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव की जानकारी भी जल्द ही जारी की जाएगी।

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