नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी सरकार के तीसरे कार्यकाल का एक साल पूरे होने से एक दिन पहले रविवार को कहा कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने अपने 11 साल के कार्यकाल में महिला नीत विकास को पुन: परिभाषित किया है.
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पर कहा कि विज्ञान, शिक्षा, खेल, स्टार्टअप और सशस्त्र बलों सहित सभी क्षेत्रों में महिलाएं उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और लोगों के लिए प्रेरणा बन रही हैं. उन्होंने कई कल्याणकारी कार्यक्रमों का हवाला देते हुए कहा कि इनसे महिलाओं को काफी लाभ हुआ है. प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वच्छ भारत के माध्यम से गरिमा सुनिश्चित करने से लेकर जन धन खातों के जरिए वित्तीय समावेशन तक, विभिन्न पहलों में महिलाओं को सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है.
उन्होंने कहा कि जहां धुआं मुक्त रसोई प्रदान करते हुए उज्ज्वला योजना के माध्यम से गरीब परिवारों को गैस सिलेंडर मिले, वहीं मुद्रा ऋण ने लाखों महिला उद्यमियों को खुद की शर्तों पर अपने सपने पूरे करने में सक्षम बनाया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना में महिलाओं के नाम पर बने घरों ने भी उल्लेखनीय प्रभाव डाला है. मोदी ने कहा कि ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम ने बालिकाओं की सुरक्षा के लिए एक राष्ट्रीय आंदोलन की लौ जगाई.
प्रधानमंत्री ने सरकार द्वारा संचालित उन पहलों संबंधी पोस्ट भी साझा किए जिनमें सरकारी योजनाओं द्वारा महिलाओं को दिए गए लाभों को सूचीबद्ध किया गया. इन पोस्ट में कहा गया है कि देश में जीवित जन्मों (‘लाइव बर्थ’) पर मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) 2011-13 में प्रति लाख 167 से घटकर 2019-21 में प्रति लाख 93 हो गया और नल से जल प्राप्त करने वाले घरों की संख्या अगस्त 2019 में 3.23 करोड़ से बढ़कर मई 2025 में 15.64 करोड़ हो गई.
इनमें महिलाओं के लिए कई अन्य कल्याणकारी कदमों पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक रसोई गैस कनेक्शन दिए गए. प्रधानमंत्री ने पोस्ट में कहा, ”हमारी माताओं-बहनों और बेटियों ने वह दौर भी देखा है, जब उन्हें कदम-कदम पर मुश्किलों का सामना करना पड़ता था लेकिन आज वे ना सिर्फ विकसित भारत के संकल्प में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभा रही हैं, बल्कि शिक्षा और व्यवसाय से लेकर हर क्षेत्र में मिसाल कायम कर रही हैं. बीते 11 वर्ष में हमारी नारीशक्ति की सफलताएं देशवासियों को गौरवान्वित करने वाली हैं.”
मोदी सरकार के 11 साल पूरे, पहले की तरह मजबूत और आत्मविश्वास में नजर आ रहे प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नौ जून 2024 को जब तीसरे कार्यकाल के लिए शपथ ली थी, तो उस वक्त राहुल गांधी बेहद उत्साहित नजर आये थे क्योंकि लोकसभा चुनाव में भाजपा अपने दम पर बहुमत हासिल करने से चूक गई थी, जबकि चुनाव प्रचार अभियान के दौरान उसने 543 सदस्यीय निचले सदन में 400 से अधिक सीट हासिल करने का दावा किया था.
लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद आलोचकों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की तेदेपा प्रमुख चंद्रबाबू नायडू और जदयू नेता नीतीश कुमार पर निर्भरता को रेखांकित किया था. आलोचकों ने कहा था कि नायडू और कुमार का गठबंधन बदलने का इतिहास रहा है और उत्तर प्रदेश तथा महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों में लोकसभा चुनाव में इसका (भाजपा) प्रदर्शन उम्मीद से कम रहा है, जिससे भविष्य में राजनीतिक उथल-पुथल की संभावना है.
कांग्रेस के एक नेता ने कहा था, ”हमने मोदी को मनोवैज्ञानिक रूप से खत्म कर दिया है. उनकी सरकार को जल्द ही सत्ता से हटा दिया जायेगा.” सोमवार को मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल की पहली वर्षगांठ तथा कुल मिलाकर 11वीं वर्षगांठ मनायेगी और प्रधानमंत्री पहले की ही तरह मजबूत स्थिति में और पूरे आत्मविश्वास के साथ नेतृत्व करते नजर आ रहे हैं. वहीं, उनके दो प्रमुख सहयोगी (नायडू और कुमार), जिन्हें विपक्ष बैसाखी बता रहा था, न केवल भरोसेमंद साबित हुए हैं, बल्कि जमकर मोदी के नेतृत्व की सराहना कर रहे हैं.
भाजपा ने अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक पहुंच को नये सिरे से तैयार करने के लिए फिर से काम शुरू किया है और विधानसभा चुनावों में आश्चर्यजनक रूप से बड़ी जीत हासिल करके अपनी गति फिर से हासिल कर ली. लोकसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन हरियाणा और महाराष्ट्र में उम्मीद से कम रहा था, लेकिन इस पार्टी ने अपने कल्याणकारी उपायों और क्षेत्रीय नेतृत्व के प्रयासों से स्थिति को बदल दिया और विधानसभा चुनाव में इन दोनों राज्यों में जीत हासिल की. भाजपा ने अंतत? 26 वर्षों के बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी जीत हासिल की और अपने प्रतिद्वंद्वी आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल को पछाड़ दिया.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और केजरीवाल जैसे अन्य भाजपा के प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस से दूर हो गए हैं और शिवसेना (उबाठा) और राकांपा (एसपी) जैसे दलों का भविष्य अनिश्चित है. दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर मनोज कुमार इस बात पर जोर देते हैं कि विपक्ष द्वारा मोदी के खिलाफ लड़ाई में विफल रहने के बावजूद मोदी के नेतृत्व की स्थिति लगभग निर्विवाद है.
उन्होंने कहा, ”राजनीति में किसी भी मोड़ पर हमेशा अवसर और चुनौतियां होती हैं. लेकिन ऐसा लगता है कि जब तक प्रधानमंत्री मोदी हैं, उनका कोई ठोस विकल्प नहीं है.” उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सैन्य कार्रवाई ने एक बार फिर राष्ट्रीय हित में काम करने वाले नेता के रूप में उनकी छवि को मजबूती प्रदान की है. कुमार ने कहा कि जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने का सरकार का निर्णय राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मुद्दों को अपने पक्ष में करने में भाजपा की ताकत को रेखांकित करता है.
उन्होंने कहा कि पार्टी ने हमेशा जातिगत चिंताओं को दूर करने के लिए काम किया है और यह सुनिश्चित किया है कि जाति आधारित राजनीति उसके एजेंडे में न हो. उन्होंने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ के ईद-गिर्द निर्मित मोदी के कल्याण मॉडल से भाजपा को मदद मिली है और यह आगे भी मिलती रहेगी, क्योंकि पार्टी के पास प्रधानमंत्री के रूप में एक ऐसा लोकप्रिय करिश्माई और भरोसेमंद नेता है, जिनका कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं है. कुमार ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता भी अपनी सर्वश्रेष्ठ स्थिति में लोकप्रिय स्वीकृति के मामले में इसी स्तर के थे.
संसद में वक्फ (संशोधन) विधेयक को पारित कराने में तेदेपा, जद(यू) और चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोजपा (रामविलास) से मिले समर्थन और विधानसभा चुनावों में जीत के बाद भाजपा के निर्विवाद प्रभुत्व को रेखांकित किया. यदि भाजपा अपनी सरकार के तीसरे कार्यकाल के पहले वर्ष में आम चुनाव में विपक्ष से खोई अपनी राजनीतिक जमीन वापस पाने में सफल होती दिखती है तो अगले वर्ष यह पता चलेगा कि क्या पार्टी अपने प्रतिद्वंद्वियों को और अधिक हैरान कर सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि विपक्ष के कई गढ़ जैसे तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल के अलावा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासित दो राज्यों असम और बिहार में भी विधानसभा चुनाव होने हैं.