
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘सत्यं वद:, धर्मम् चर:’ की मूल भावना को अपनाने की जरूरत पर जोर देते हुए सोमवार को कहा कि अपने बड़ों के प्रति कृतज्ञता का भाव हमारे मन में हमेशा होना चाहिए और यह हमारी पहचान बननी चाहिए.
मुख्यमंत्री ने बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय लखनऊ के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की प्राचीन परंपरा में जब अपनी शिक्षा पूरी करके कोई स्नातक अपने गुरुकुल से बाहर निकलता था तो कुलगुरु उसे ‘सत्यं वद: धर्मम् चर:’ की दीक्षा और उपदेश देते थे. इसका अर्थ है कि जीवन में सत्य बोलना और धर्म का आचरण करना.
उन्होंने कहा, ”किसी भी अच्छे कार्य के लिए हमेशा अपने आप को तैयार करना, अपने कर्तव्यों के प्रति सदैव ईमानदार बने रहकर उसका अनुपालन करना और अपने जीवन में सदैव अपने से बड़ों का सम्मान करना, यह संस्कार हमारे मन में सदैव बना रहना चाहिए.” आदित्यनाथ ने कहा, ”भारत का कोई स्नातक जब अपनी शिक्षा पूरी करके इस भाव को लेकर अपने गुरुकुल से बाहर निकलता था तब भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपने आप को स्थापित पाता था.”
उन्होंने कहा, ”भारत तब दुनिया की सबसे बड़ी ताकत था. हम जो करते थे दुनिया उसका अनुसरण करती थी लेकिन जब हमने दुनिया का अनुसरण करना प्रारंभ कर दिया तो हमारी ताकत भी उसी प्रकार से कम होती गई और आज भारत की स्थिति क्या है यह किसी से छुपा हुआ नहीं है.” उन्होंने कहा कि यह प्रश्न हम सबके सामने सदैव बना रहना चाहिए और इसीलिए कृतज्ञता का भाव हमारे मन में हमेशा होना चाहिए. यह हमारी पहचान बननी चाहिए. मुख्यमंत्री ने तकनीक के मामले में बाकी दुनिया से 10 कदम आगे की सोच अपनाने का आ”ान किया.
उन्होंने कहा, ”हमें इस बात को ध्यान में रखना होगा कि दुनिया तकनीक को तेजी से अपना रही है. इसमें हम अपने आप को रोक नहीं सकते. जब हम दुनिया से 10 कदम आगे की सोच लेकर चलेंगे तब दुनिया हमारा अनुगमन करने के लिए मजबूर होगी. हम लकीर के फकीर नहीं बन सकते.” आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत की विकास यात्रा ने दुनिया को हिंदुस्तान के पीछे चलने के लिए मजबूर किया है और हर भारतवासी इस पर गौरव की अनुभूति कर सकता है. वर्ष 2014 से पहले लोगों में जो हताशा और निराशा थी, उसे आशा और उत्साह में बदलने का काम 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देखने को मिल रहा है. हर एक क्षेत्र में भारत ने एक नयी छलांग लगाई है.
उन्होंने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबू बनारसी दास को याद करते हुए कहा कि देश की आजादी के प्रति उनके मन में जो जज्बा था, उसके साथ जुड़कर देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में उन्होंने काम किया. उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा, ”ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से दुनिया ने भारत के पराक्रम को देखा. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उत्तर प्रदेश में यहां के नौजवानों द्वारा बनाए गए ड्रोन ने पाकिस्तान के होश उड़ा दिए थे. उत्तर प्रदेश भी देश की रक्षा सेनाओं के साथ रहा.” योगी ने यह भी कहा, ”ब्रह्मोस मिसाइल लखनऊ में बनाई गई है, जिसके लिए भूमि मुफ्त में उपलब्ध कराई गई. ब्रह्मोस के पूर्ण क्षमता से कार्य करने पर उत्तर प्रदेश को हर वर्ष 300-500 करोड़ रुपये का जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) मिलेगा.” मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज कृत्रिम मेधा, डेटा सेंटर, रोबोटिक-ड्रोन प्रौद्योगिकी जैसी उभरती तकनीकों का केंद्र बन चुका है.
उन्होंने विश्वविद्यालय से अपील की कि उभरती प्रौद्योगिकी को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए-ड्रोन, रोबोटिक्स, आईओटी, कृत्रिम मेधा आदि में र्सिटफिकेट व डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू किए जाएं. योगी ने कहा कि तकनीक की प्रगति से नौकरियां खत्म नहीं होतीं, बल्कि नई संभावनाएं उत्पन्न होती हैं. उन्होंने कहा कि 1990 के दशक में जब कंप्यूटर आए थे, तब रोजगार पर सकंट की आशंका जताई गई थी, जबकि वास्तव में रोजगार के अवसर बढ़े. मुख्यमंत्री ने निवेश के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा, “आज अन्य प्रदेश भी उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को आदर्श के रूप में देखते हैं. कानून-व्यवस्था बेहतर हुई तो निवेश में तेजी आई. जिस प्रदेश में पांच साल में 50 हजार करोड़ का निवेश मुश्किल से आता था, वहां पिछले आठ वर्षों में 45 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव आए हैं.”



