जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा रणनीति में सावधानीपूर्वक बदलाव करने की जरूरत: कांग्रेस

त्रिपुरा में 'सरकार प्रायोजित आतंकवाद'

नयी दिल्ली. कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में चार जवानों की मौत होने के बाद मंगलवार को केन्द्र सरकार पर निशान साधा और कहा कि सात महीनों में छह आतंकी हमले सरकार के तमाम दावों को ख.ारिज करते हैं तथा ऐसे में सुरक्षा रणनीति में सावधानीपूर्वक बदलाव करने की जरूरत है.

पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने यह भी कहा कि “फर्जी विमर्श और लीपापोती” करके राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में नहीं डाला जा सकता और सीमा पार आतंकवाद से सामूहिक रूप से लड़ना होगा. जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल हुए एक अधिकारी समेत सेना के चार जवानों की मंगलवार तड़के मौत हो गई. अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय राइफल्स और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह के जवानों ने सोमवार देर शाम देसा वन क्षेत्र के धारी गोटे उरबागी में संयुक्त घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हुई.

खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”जम्मू-कश्मीर के डोडा में आतंकी मुठभेड़ में एक अधिकारी सहित सेना के चार बहादुर जवानों की शहादत से बहुत व्यथित हूं. हम अपने उन बहादुरों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं, जिन्होंने भारत माता की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया.” उन्होंने कहा, ”हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं घायलों के साथ हैं और हम उनके शीघ्र एवं पूर्ण स्वस्थ होने की कामना करते हैं. कायर आतंकवादियों द्वारा किए जा रहे हिंसा के इन कृत्यों के लिए कड़ी और स्पष्ट निंदा के लिए कोई भी शब्द पर्याप्त नहीं है.” कांग्रेस अध्यक्ष के अनुसार, पिछले 36 दिनों में जम्मू-कश्मीर में जिस तरह से आतंकी हमले हुए हैं, उसे देखते हुए हमारी सुरक्षा रणनीति में सावधानीपूर्वक बदलाव करने की जरूरत है.

उन्होंने कहा, ”मोदी सरकार ऐसे व्यवहार कर रही है मानो सब कुछ ‘सामान्य रूप से चल रहा है’ और कुछ भी नहीं बदला है. उन्हें पता होना चाहिए कि जम्मू क्षेत्र तेजी से इन हमलों का खमियाजा भुगत रहा है.” खरगे ने कहा, ”हम झूठी शेखी बघारने, फर्जी विमर्श और लीपापोती में शामिल होकर अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में नहीं डाल सकते. एक राष्ट्र के रूप में, हमें सीमा पार आतंकवाद से सामूहिक रूप से लड़ना होगा. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस हमारी बहादुर सशस्त्र सेनाओं के साथ मजबूती से खड़ी है.” कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”सुबह सुबह जम्मू-कश्मीर में एक और आतंकी हमले की बुरी खबर मिली. चार बहादुर जवान और एक अधिकारी शहीद हो गये.” उन्होंने कहा, ”सात महीनों में छह आतंकी हमले सरकार के तमाम दावों को ख.ारिज करते हैं. देश जवाब चाहता है. सिफ.र् नारों से देश नहीं चला करते.”

त्रिपुरा में ‘सरकार प्रायोजित आतंकवाद’

कांग्रेस ने त्रिपुरा में हुई हालिया हिंसा को लेकर मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा केंद्र सरकार पर निशाना साधा और दावा किया कि पंचायत चुनाव से पहले वहां ”सरकार प्रायोजित आतंकवाद” को अंजाम दिया जा रहा है और ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पूर्वोत्तर का यह राज्य भी मणिपुर जैसे संकट की तरफ बढ़ रहा है.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्य में पंचायत चुनावों की घोषणा के बाद ”सत्तारूढ़ दल द्वारा पार्टी कार्यकर्ताओं और कार्यालयों पर हाल की हिंसा और हमलों” के संबंध में लोकसभा सदस्यों तारिक अनवर और गौरव गोगोई को त्रिपुरा में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का पर्येवक्षक नियुक्त किया है. कांग्रेस प्रवक्ता अजय कुमार ने संवाददाताओं से बातचीत में भाजपा कार्यकर्ताओं को “जन्मजात दंगाई” करार दिया और दावा किया कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता त्रिपुरा में लगातार अन्यायपूर्ण और हिंसक स्थितियों का सामना कर रहे हैं.

उनका कहना था, ”त्रिपुरा की भाजपा सरकार के तहत कांग्रेस कार्यकर्ताओं को निशाना बनाकर हमला किया जा रहा है. राज्य में कानून और व्यवस्था की चिंताजनक स्थिति है. सत्तारूढ़ दल ने आंखें मूंद रखी हैं.” कुमार ने आरोप लगाया, ”मणिपुर और त्रिपुरा में सरकार प्रायोजित आतंकवाद को अंजाम दिया जा रहा है. सरकार इस देश को ऐसे कगार पर ले जा रही है, जहां से लौटना बहुत मुश्किल हो जाएगा. कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर लगातार हमले हो रहे हैं. मणिपुर की हिंसा से इनका मन नहीं भरा, इसलिए अब ये त्रिपुरा में भी वही हालात पैदा कर रहे हैं. ये पूरी तरह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की जिम्मेदारी बनती है.”

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