
नयी दिल्ली. संसद में मंगलवार को पेश केंद्रीय बजट 2024-25 में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) के लिए 1,168 करोड़ रुपये आवंटन किए गए, जो 2023-24 में आवंटित राशि के बराबर है. दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की वित्त मंत्री आतिशी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजधानी को न तो केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के तौर पर और न ही दिल्ली नगर निगम को वित्तीय सहायता के रूप में कोई राशि दी गयी, जबकि शहर ने केंद्रीय पूल में 2.32 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया है.
बजट दस्तावेज से पता चलता है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय से दिल्ली को हस्तांतरित राशि में राजस्व मद में 1,168 करोड़ रुपये और पूंजी मद में 0.01 करोड़ रुपये शामिल हैं. वर्ष 2022-23 के बजट में दिल्ली को 960 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जो 2023-24 में बढ़कर 1,168.01 करोड़ रुपये हो गई और 2024-25 में भी यह समान रही. दिल्ली के लिए केंद्रीय करों और शुल्कों में उसके हिस्से के बदले कोई अनुदान नहीं था. वर्ष 2022-23 के बजट में यह 325 करोड़ रुपये था.
केंद्रीय करों और शुल्कों के मद में दिल्ली के हिस्से के बदले अनुदान की राशि को 2023-24 के बजट अनुमानों में “केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्रीय सहायता” में शामिल किया गया था. वर्ष 2024-25 के बजट में भी यही प्रथा अपनाई गई. वित्त वर्ष 2024-25 के बजट अनुमानों में दिल्ली को केंद्रीय सहायता के तहत 951 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो 2023-24 के बजट के समान है. यह दिल्ली सरकार की योजनाओं के वित्त-पोषण के लिए प्रदान किया जाता है.
आतिशी ने भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार ने बुनियादी ढांचे के विकास और नगर निगम के लिए 20,000 करोड़ रुपये की मांग की थी, जो उनके द्वारा करों के रूप में दिए गए 2.32 लाख करोड़ रुपये का 10 प्रतिशत है, लेकिन बजट में एक भी रुपया नहीं दिया गया.
उन्होंने कहा, “दूसरी ओर, केजरीवाल सरकार ने हर साल करों के रूप में दिए जाने वाले 40,000 करोड़ रुपये से दिल्ली के लोगों को बेहतरीन स्कूल, मुफ्त बिजली, महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, मोहल्ला क्लीनिक प्रदान किए हैं.” उन्होंने भाजपा को चुनौती दी कि वह पिछले 11 बजटों में दिल्ली के लिए सरकार द्वारा किए गए कम से कम एक काम का जिक्र करे.



