बाढ़ प्रभावित पाकिस्तान को राहत सहायता भेजने के बारे में कोई जानकारी नहीं : विदेश मंत्रालय

नयी दिल्ली/इस्लामाबाद. विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि पाकिस्तान में आई विनाशकारी बाढ़ के मद्देनजर राहत सहायता भेजने के बारे में कोई जानकारी नहीं है और बाढ़ पीड़ितों के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संवेदना प्रकट करने को कारोबार या अन्य बातों से जोड़ना ठीक नहीं है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अंिरदम बागची ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में संवाददाताओं से कहा कि पड़ोसी देश में आई बाढ़ के कारण तबाही पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख प्रकट किया था तथा प्राकृतिक आपदा के पीड़ितों एवं घायलों के प्रति संवेदना प्रकट की थी .
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के बयान को कारोबार या अन्य बातों से जोड़ने की बात उन्हें समझ नहीं आ रही. पाकिस्तान के बाढ़ पीड़ितों को भारत से राहत सहायता भेजने को लेकर एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि अभी इस बारे में उनके पास कोई जानकारी नहीं है.

बागची ने कहा कि उन्होंने दोनों देशों के बीच कुछ स्तर पर कारोबार शुरू करने को लेकर पाकिस्तान की मीडिया में आई खबरों को देखा है, लेकिन उनके पास इस बारे में कहने को कुछ नहीं है. प्रवक्ता ने कहा कि इस बारे में उन्हें जब जानकारी मिलेगी, तब बतायेंगे. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान में बाढ़ से हुई तबाही पर सोमवार को दुख व्यक्त करते हुए पड़ोसी देश में जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल होने की उम्मीद जतायी थी .

पाकिस्तान में आई विनाशकारी बाढ़ से 1,100 से अधिक लोग मारे गए हैं तथा सम्पत्ति का नुकसान हुआ है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार ने संकट से निपटने के लिए सहायता की अपील की है. बाढ़ से देश की लगभग तीन करोड़ 30 लाख आबादी विस्थापित हुई है.

पड़ोसी देश में बाढ़ की स्थिति पर प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया था, ”पाकिस्तान में बाढ़ से हुई तबाही को देखकर दुख हुआ. हम पीड़ितों, घायलों और इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित सभी लोगों के परिवारों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हैं और जल्द ही सामान्य स्थिति बहाल होने की उम्मीद करते हैं.” पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने विनाशकारी बाढ़ से हुए भारी नुकसान पर चिंता जताने के लिए बुधवार को अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया था.

शरीफ ने ट्वीट किया था, ‘‘ मैं भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बाढ़ के कारण हुए मानवीय और भौतिक नुकसान पर शोक जताने के लिए धन्यवाद देता हूं. अपने विशिष्ट गुणों के साथ पाकिस्तान के लोग, इंशाअल्लाह, इस प्राकृतिक आपदा के प्रतिकूल प्रभावों को दूर करेंगे और अपने जीवन तथा समुदायों का पुर्निनर्माण करेंगे.’’ वहीं, पाकिस्तान के वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने बुधवार को कहा था कि सरकार अपने गठबंधन सहयोगियों तथा अहम हितधारकों से विचार-विमर्श करने के बाद भारत से वस्तुओं के आयात के बारे में सोचेगी.

नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में बाढ़ की वजह से हालात खराब हैं और खाद्य वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं. भारत से खाद्य वस्तुओं के आयात के बारे में वित्त मंत्री ने अपने विचार पहली बार सोमवार को जताए थे. भारत और पाकिस्तान के संबंध अक्सर कश्मीर मुद्दे और पाकिस्तान से संचालित सीमा पार आतंकवाद को लेकर तनावपूर्ण रहे हैं. हालांकि, भारत द्वारा संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने, जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को हटाने और पांच अगस्त, 2019 को राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित किए जाने के बाद दोनों देशों के संबंध निचले स्तर पर पहुंच गए थे.

पाकिस्तान में बाढ़ प्रभावित लोगों में फैल रही जलजनित बीमारियां

पाकिस्तान में हाल में आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में जलजनित बीमारियों के फैलने के मद्देनजर अधिकारियों ने लोगों तक स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के प्रयास तेज कर दिए हैं. सरकार द्वारा देश भर में लगाए गए राहत शिविरों में लोग डायरिया, त्वचा संबंधी बीमारियों और आंखों में संक्रमण से प्रभावित हो रहे हैं. स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा प्रभावित प्रांतों में से एक सिंध में पिछले 24 घंटे में डायरिया के 90,000 से ज्यादा मामले आए हैं.

एक दिन पहले पाकिस्तान और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बाढ़ प्रभावितों के बीच जलजनित बीमारियों के फैलने पर चिंता प्रकट की थी. पाकिस्तान ने समय पूर्व मॉनसून और भारी बारिश के लिए जलवायु परिवर्तन को मुख्य कारण बताया है. जून के बाद से अचानक आई बाढ़ में 1191 लोगों की मौत हुई है और 3.3 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं. करीब 10 लाख मकान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं.

देश के अधिकांश हिस्सों में बाढ़ का पानी कम होता जा रहा है, लेकिन सिंध प्रांत के दक्षिणी हिस्से में कई जिलों में अब भी पानी नहीं घटा है. बाढ़ से विस्थापित हुए लगभग पांच लाख लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं. सिंध के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. अजरा फजल पेचुहो ने कहा कि प्रांत में बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रभावित लोगों के इलाज के लिए हजारों चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं. मोबाइल चिकित्सा इकाइयों को भी तैनात किया गया है. डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि वह डायरिया, हैजा और अन्य संक्रामक रोगों के लिए निगरानी बढ़ा रहा है और स्वास्थ्य केंद्रों को चिकित्सा आपूर्ति प्रदान कर रहा है.

डॉक्टरों का कहना है कि शुरू में ज्यादातर मरीज बाढ़ से सदमाग्रस्त थे. लेकिन, अब डायरिया, त्वचा संक्रमण और अन्य जलजनित बीमारियों से पीड़ित हजारों लोग इलाज करवा रहे हैं. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाली कई गर्भवती महिलाओं को भी जोखिम का सामना करना पड़ा.

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनपीएफ) के अनुसार, पाकिस्तान में 64 लाख बाढ़ प्रभावित लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है. यूएनपीएफ ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 6,50,000 गर्भवती महिलाओं को मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता है, जिनमें से 73,000 के अगले महीने प्रसव होने की संभावना है.

इस बीच, सेना के सहयोग के साथ बचाव टीम ने फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए अभियान जारी रखा. बचाव टीम ज्यादातर नावों का इस्तेमाल कर रही हैं, लेकिन उन क्षेत्रों से फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर भी उड़ान भर रहे हैं जहां पुल और सड़कें नष्ट हो गई हैं.

कुछ दिन पहले, पाकिस्तान और संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान को आपातकालीन कोष के तौर पर 16 करोड़ डॉलर की सहायता की अपील की थी. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बृहस्पतिवार को ट्वीट कर पर संयुक्त अरब अमीरात को पांच करोड़ डॉलर के राहत सामान की पहली किश्त देने के लिए धन्यवाद दिया. उन्होंने तीन करोड़ डॉलर की सहायता की घोषणा करने के लिए अमेरिका को भी धन्यवाद दिया. अब तक, तुर्की, चीन, कतर और सऊदी अरब सहित कई देशों ने पाकिस्तान में बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए राहत सामग्री की खेप भेजी है. शुरुआती आधिकारिक अनुमानों के अनुसार बाढ़ के कारण 10 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है.

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