एम्स में मरीजों की कितनी भी भीड़ हो, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं: नड्डा

नयी दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने शुक्रवार को कहा कि देश भर के एम्स में उपलब्ध कराई जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा, भले ही वहां मरीजों की भारी भीड़ हो. नड्डा ने लोकसभा में यह भी कहा कि सरकार ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के तहत देश के 62 करोड़ लोगों को कवर किया है, जिसके तहत प्रति वर्ष एक परिवार को 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा दिया जाता है. उन्होंने प्रश्नकाल में पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा, ”एम्स में स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया गया है. एम्स एक ब्रांड है और इसे बनाए रखना होगा.”

मंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने एक अखिल भारतीय आयुर्वज्ञिान संस्थान (एम्स) स्थापित किया था, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छह ऐसे चिकित्सा संस्थान स्थापित किए थे और अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के विभिन्न हिस्सों में 22 एम्स स्थापित किए हैं. उन्होंने कहा कि सभी एम्स में मरीजों की भारी भीड़ रहती है और नए एम्स स्थापित करने की मांग आती रहती है.

एबी-पीएमजेएवाई पर एक अन्य पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए नड्डा ने कहा कि इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य लगभग 62 करोड़ लाभार्थियों को द्वितीयक और तृतीयक देखभाल अस्पताल में भर्ती होने के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करना है.

इसमें 4.5 करोड़ परिवारों के 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के छह करोड़ वरिष्ठ नागरिक भी शामिल हैं, चाहे उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति कुछ भी हो. नड्डा ने कहा कि एबी पीएम-जेएवाई की समीक्षा और सुधार के लिए निरंतर प्रयास किए गए हैं ताकि नई बीमारियों को इस योजना के तहत कवर किया जा सके. उन्होंने कहा, ”हाल में, हमने इस योजना के तहत अस्थि-मज्जा (बोन मैरो) प्रतिरोपण को भी शामिल किया है.”

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