
नयी दिल्ली. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि सरकार चीन से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को समर्थन देने पर पुनर्विचार नहीं कर रही है, जैसा कि हाल में आर्थिक समीक्षा में कहा गया था. उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी रिपोर्ट है जो नए विचारों के बारे में बात करती है. गोयल ने कहा कि यह समीक्षा सरकार के लिए बिल्कुल भी बाध्यकारी नहीं है. देश में चीनी निवेश को समर्थन देने पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है.
मंत्री ने यहां पत्रकारों से कहा, ” देश में चीनी निवेश को समर्थन देने पर फिलहाल कोई पुर्निवचार नहीं किया जा रहा है.” सरकार ने 2020 में भारत के साथ सीमा साझा करने वाले देशों से एफडीआई के लिए उसकी मंजूरी अनिवार्य कर दी. भारत के साथ स्थलीय सीमा साझा करने वाले देश चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमा और अफगानिस्तान हैं.
चीन के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बीच संसद में 22 जुलाई को पेश बजट-पूर्व आर्थिक समीक्षा 2023-24 में स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने और निर्यात बाजार का दोहन करने के लिए पड़ोसी देश चीन से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़ाने की वकालत की गई थी. मंत्री ने इसी पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए यह बयान दिया. आर्थिक समीक्षा में कहा गया था, चूंकि अमेरिका तथा यूरोप अपनी तात्कालिक आपूर्ति चीन से हटा रहे हैं, इसलिए पड़ोसी देश से आयात करने के बजाय चीनी कंपनियों द्वारा भारत में निवेश करना और फिर इन बाजारों में उत्पादों का निर्यात करना अधिक प्रभावी है.
‘इंडी’ गठबंधन की कोई राष्ट्रवादी सोच नहीं : पीयूष गोयल
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर उनके एक दिन पहले दिए गए भाषण को लेकर हमला बोला और कहा कि ‘इंडी’ गठबंधन के पास कोई राष्ट्रवादी सोच नहीं है और देश की जनता के लिए उसके पास कोई सकारात्मक एजेंडा भी नहीं है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री गोयल ने कहा कि गांधी ने अपने भाषण में जो भी दावे किए, वे सभी निराधार हैं. उन्होंने दावा किया कि 2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आई थी, तब देश की अर्थव्यवस्था खराब स्थिति में थी.
राहुल गांधी ने सोमवार को कहा था कि चारों ओर भय का माहौल है और छह लोगों का एक समूह पूरे देश को ‘चक्रव्यूह’ में फंसा रहा है. उन्होंने दावा किया कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) इस चक्रव्यूह को तोड़ेगा.
गोयल ने यहां संवाददाताओं से कहा, ”राहुल गांधी के कल (सोमवार) के भाषण से यह स्पष्ट हो गया …. देश में संवैधानिक प्राधिकारों और व्यक्तियों पर सिर्फ आरोप लगाने या कुछ कटाक्ष करने के लिए उन्होंने यह साफ कर दिया कि तथाकथित ‘इंडी’ गठबंधन में कोई राष्ट्रवादी सोच नहीं है, जो संप्रग का नया नाम है. तर्कहीन दावे और मांग करने के अलावा, उनके पास भारत के लोगों के लिए कोई सकारात्मक एजेंडा नहीं है.”
गोयल ने आरोप लगाया कि लोकसभा अध्यक्ष को विपक्ष के नेता से बार-बार कहना पड़ा कि सदन की गरिमा बनाए रखें और निराधार दावे न करें. मंत्री ने कहा कि गांधी के भाषण ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की खोखली सोच को ही प्रर्दिशत किया है. गोयल ने कहा कि जब संप्रग सत्ता में थी, तो उसने किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी लागू नहीं की थी और यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे सदन के अंदर और बाहर अक्सर उठाया जाता है.



