ओडिशा की रथ यात्रा, बाली यात्रा अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल

यूनेस्को से मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया में यह पहला कदम

भुवनेश्वर. ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि दुनियाभर में प्रसिद्ध राज्य के दो प्रमुख उत्सव रथ यात्रा और बाली यात्रा को केंद्र के संस्कृति मंत्रालय के अधीन आने वाले संगीत नाटक अकादमी की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय सूची में शामिल किया गया है. संगीत नाटक अकादमी भारत की शीर्ष सांस्कृतिक संस्था है.

मुख्यमंत्री ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करके कहा, ‘मुझे खुशी है कि ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की प्रतीक रथ यात्रा और बाली यात्रा को संगीत नाटक अकादमी द्वारा अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय सूची में शामिल किया गया है. यह ओडिशा के हर नागरिक के लिए गर्व का क्षण है और हम यूनेस्को के वैश्विक मंच पर मान्यता दिए जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं.’ उन्होंने कहा कि यूनेस्को से मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया में यह पहला कदम है.

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरविंद कुमार पाढ़ी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करके कहा, ‘यह जानकर बहुत खुशी हुई कि भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन संगीत नाटक अकादमी ने ओडिशा की रथ यात्रा और बाली यात्रा को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की अपनी राष्ट्रीय सूची में शामिल किया है.’ उन्होंने कहा कि श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने हाल ही में रथ यात्रा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल कराने के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को नामांकन फाइल सौंपी थी. संगीत नाटक अकादमी ने अपनी वेबसाइट पर भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में ओडिशा की बाली यात्रा को 45वें स्थान पर और पुरी की रथ यात्रा को 54वें स्थान पर सूचीबद्ध किया है. पुरी में हर साल आयोजित होने वाली प्रसिद्ध रथ यात्रा भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन को समर्पित है, जबकि बाली यात्रा से जुड़े उत्सव का आयोजन कटक में किया जाता है.

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