खेल रत्न विवाद पर मनु ने कहा: नामांकन दाखिल करने में चूक हुई, शायद यह मेरी ओर से हुआ हो

नयी दिल्ली. पेरिस ओलंपिक की दोहरी कांस्य पदक विजेता मनु भाकर ने खेल रत्न पुरस्कार विजेताओं की सूची से उन्हें बाहर रखे जाने को लेकर उठे विवाद के बीच मंगलवार को स्वीकार किया कि इस साल के राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों के लिए नामांकन दाखिल करते समय शायद उनकी ओर से कोई चूक हुई है.

खेल मंत्रालय ने नुकसान की भरपाई के लिए कदम उठाते हुए कहा था कि पुरस्कार के लिए नामांकन की सूची को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है जिसके एक दिन बाद 22 वर्षीय स्टार पिस्टल निशानेबाज ने देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार के लिए नामांकन नहीं मिलने पर सोशल मीडिया पर अपनी स्थिति स्पष्ट की.

मनु ने ‘एक्स’ पर लिखा, ”सबसे प्रतिष्ठित खेल रत्न पुरस्कार के लिए मेरे नामांकन को लेकर चल रहे मुद्दे के संबंध में मैं यह कहना चाहूंगी कि एक खिलाड़ी के रूप में मेरी भूमिका अपने देश के लिए खेलना और प्रदर्शन करना है.” उन्होंने कहा, ”मुझे लगता है कि नामांकन दाखिल करते समय शायद मेरी ओर से कोई चूक हुई है जिसे ठीक किया जा रहा है.” हरियाणा की इस निशानेबाज ने कहा कि उनका लक्ष्य देश के लिए प्रदर्शन करना है और इसमें बदलाव नहीं आएगा, फिर चाहे उन्हें पुरस्कार मिले या नहीं. इससे पहले उनके निजी जसपाल राणा और पिता रामकिशन भाकर ने खेल मंत्रालय और चयन समिति पर उनकी शानदार उपलब्धियों के बावजूद उन्हें नजरअंदाज करने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, ”पुरस्कार और मान्यता मुझे प्रेरित करते हैं, लेकिन ये मेरा लक्ष्य नहीं हैं.” मनु ने कहा, ”पुरस्कार मिले या नहीं, मैं अपने देश के लिए और अधिक पदक जीतने के लिए प्रेरित रहूंगी. सभी से अनुरोध है कि कृपया इस पर अटकलें न लगाएं.” राणा और रामकिशन ने खेल मंत्रालय और चयन समिति पर उनकी शानदार उपलब्धियों के बावजूद उन्हें नजरअंदाज करने का आरोप लगाया.
हालांकि खेल मंत्रालय के अनुसार सूची को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है. खेल मंत्रालय ने कहा कि कुछ दिनों में जब नामों का खुलासा होगा तो उनका नाम उसमें शामिल होने की संभावना है.

विश्वसनीय रूप से पता चला है कि पुरुष हॉकी कप्तान हरमनप्रीत सिंह और पैरालंपिक स्वर्ण विजेता ऊंची कूद खिलाड़ी प्रवीण कुमार को खेल रत्न के लिए चुना गया है. इसके अलावा 30 अर्जुन पुरस्कार विजेताओं के नाम शामिल है जिसमें 17 पैरा खेलों से हैं.
पुरस्कार चयन समिति के अध्यक्ष उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यम हैं और इसमें पूर्व महिला हॉकी कप्तान रानी रामपाल, मुक्केबाज विजेंदर सिंह और पूर्व महान क्रिकेटर अनिल कुंबले भी शामिल हैं.

समिति को उन लोगों के नाम पर विचार करने का अधिकार है जिन्होंने आवेदन किया हो. लेकिन यदि आवश्यक हो तो समिति उन नामों पर चर्चा करने के लिए भी अधिकृत है जो उस सूची में शामिल नहीं हैं. मनु ओलंपिक के एक ही सत्र में दो पदक जीतने वाली स्वतंत्र भारत की पहली खिलाड़ी हैं. उन्होंने पेरिस में 10 मीटर एयर पिस्टल व्यक्तिगत और 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम (सरबजोत सिंह के साथ) स्पर्धाओं में कांस्य पदक जीते.

खेलरत्न के लिये मनु की अवहेलना पर राणा ने एनआरएआई और खेल मंत्रालय पर सवाल उठाये
दो ओलंपिक पदक जीतने वाली निशानेबाज मनु भाकर के कोच जसपाल राणा ने खेल मंत्रालय, भारतीय खेल प्राधिकरण और भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) को ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार के लिये मनु की अनदेखी किये जाने पर आड़े हाथों लिया है . मनु का नाम सूची में नहीं होने से विवाद पैदा हो गया हालांकि खेल मंत्रालय के सूत्रों ने कहा है कि अभी नाम तय नहीं हुए हैं और अंतिम सूची में उनका नाम होगा .

राणा ने पीटीआई वीडियो से कहा ,” मैं उन सभी को जिम्मेदार ठहराऊंगा . कोई कैसे कह सकता है कि मनु ने आवेदन नहीं किया . उसने एक ही ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनकर इतिहास रचा है . उसका नाम तो अपने आप आना चाहिये . क्या अधिकारियों को पता नहीं है कि मनु भाकर कौन है और उसकी क्या उपलब्धि है . इस अपमान से उसकी प्रगति में बाधा पहुंचेगी .” उन्होंने कहा ,” मैं यही कहूंगा कि गलत परंपरा कायम की जा रही है . इससे खिलाड़ी का मनोबल टूट सकता है .”

मंत्रालय ने कहा कि मनु ने पुरस्कार के लिये आवेदन नहीं किया है लेकिन उनके पिता रामकिशन भाकर ने कहा कि उन्होंने आवेदन किया है . राणा ने कहा ,” अगर खेल जगत इससे हैरान है, अगर आप इस बारे में मुझसे बात कर रहे हैं, अगर लोग इस बारे में लिख रहे हैं तो समिति को यह क्यूं नहीं लगा कि वह पुरस्कार की हकदार है .” उन्होंने कहा ,” इसके अलावा उनका क्या काम है . क्या उन्हें पिछले चक्र में खिलाड़ियों का प्रदर्शन देखकर फैसला नहीं करना चाहिये था . अगर खिलाड़ी ने आवेदन नहीं भी किया है तो समिति को उसके नाम की अनुशंसा करने से कौन रोक रहा था . खैर, यह पहली बार नहीं हुआ है . मेरे साथ भी यह हो चुका है . मुझे कभी खेलरत्न पुरस्कार नहीं मिला .”

उन्होंने यह भी कहा कि पुरस्कार के लिये खिलाड़ियों के सीधे आवेदन करने की अनिवार्यता खेल के हित में नहीं है .
राणा ने कहा ,” यह हैरानी की बात है . कोई शीर्ष खिलाड़ी पुरस्कार के लिये आवेदन या अनुरोध क्यों करे . उसे तो अपने आप पुरस्कार मिलना चाहिये . उसकी अनदेखी कैसे हो सकती है . कोई व्यवस्था तो होनी चाहिये .” उन्होंने कहा ,” क्या हर खिलाड़ी को पता है कि कैसे आवेदन करना है . क्या इसका कोई तुक है कि सिर्फ खिलाड़ी ही आवेदन कर सकता है . महासंघ, साइ या मंत्रालय क्यों नहीं .’

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