नुपुर के खिलाफ न्यायालय की टिप्पणियों पर विपक्ष ने कहा : भाजपा का सिर शर्म से झुक जाना चाहिए

नयी दिल्ली. पैगंबर मोहम्मद पर विवादास्पद टिप्पणी के लिए निलंबित भाजपा नेता नुपुर शर्मा के खिलाफ उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों को लेकर विपक्ष ने शुक्रवार को सरकार पर तीखा हमला किया और उस पर देश में ‘‘गुस्सा और नफरत का माहौल’’ बनाने का आरोप लगाया.

शीर्ष अदालत की एक पीठ ने शर्मा की टिप्पणियों के लिए उनकी कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि उनकी ‘अनियंत्रित जुबान’ ने ‘पूरे देश को आग में झोंक दिया है.’ न्यायालय ने यह भी कहा कि ‘देश में जो हो रहा है उसके लिए वह (शर्मा) अकेले जिम्मेदार हैं’. कांग्रेस ने कहा कि पैगंबर के खिलाफ टिप्पणी करके देश भर में भावनाओं को भड़काने के लिए शर्मा को जिम्मेदार ठहराकर शीर्ष अदालत ने सही किया है और सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी को शर्म से सिर झुकाना चाहिए.

कांग्रसे नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि यह स्थिति केंद्र की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने बनाई है.
राहुल ने कलपेट्टा में अपने कार्यालय का दौरा करने के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह माहौल प्रधानमंत्री ने, गृहमंत्री ने, भाजपा और आरएसएस ने बनाया है…यह माहौल गुस्से और नफरत का है. ईमानदारी से कहूं तो देश में बना यह माहौल राष्ट्र विरोधी गतिविधि है.’’

गौरतलब है कि राहुल के इस कार्यालय में पिछले सप्ताह स्टूडेंट्स फेडरेशन आॅफ इंडिया (एसएफआई) कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की थी.
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, ‘‘इस तरह का माहौल बनाना भारत और उसके लोगों के हितों के खिलाफ है. उन्होंने कहा, ‘‘…यह पूरी तरह से गलत है और यह त्रासदी साबित होगी.’’ पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक बयान में कहा कि उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी से ‘विभाजनकारी विचाधाराओं’ के खिलाफ लड़ने के कांग्रेस के संकल्प को बल मिला है. उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने महत्वपूर्ण एवं दूरगामी टिप्पणियां की हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘न्यायालय ने बिल्कुल सही कहा है कि भाजपा की प्रवक्ता देश में भावनाएं भड़काने के लिए अकेले जिम्मेदार हैं और उन्हें पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए.’’ वाम दलों ने शीर्ष अदालत की टिप्पणियों को लेकर सरकार पर भी निशाना साधा. भाकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि शब्दों से परे, अगर उच्चतम न्यायालय के अनुसार, शर्मा नफरत की बढ़ती घटनाओं और ंिहसा के हालिया ंिनदनीय कार्यों की जिम्मेदार हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन अगर कानून के दायरे में शर्मा और उनके जैसे अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती है, तो गलत संदेश जाएगा. हम पाएंगे कि आरएसएस/भाजपा की नफरत की ‘फैक्ट्री’ और कटु टीवी डिबेट से उत्पन्न उनके जैसे और भी कई लोग पनप रहे हैं.’’ भाकपा सांसद बिनॉय विश्वम ने ट्वीट किया, ‘‘नुपुर शर्मा के लिए रेड कार्पेट तथा तीस्ता और श्रीकुमार के लिए जेल की कोठरी! शीर्ष अदालत की टिप्पणियों से मोदी सरकार को सतर्क रहना चाहिए. कट्टरता से प्रेरित गैर-जिम्मेदारी किसी प्रवक्ता की पहचान नहीं होनी चाहिए.’’

न्यायालय की टिप्पणियों के बाद टीवी चैनल से बात करते हुए, आॅल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि केंद्र दिल्ली पुलिस पर शर्मा के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का दबाव बना रहा है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कानून को अपना काम करने देने का आग्रह किया.

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