
एक साल पहलगाम: जम्मू — एक साल पहले हुए आतंकी हमले के बाद कश्मीर की घाटियों में डर और अनिश्चितता का माहौल था। लेकिन अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और पर्यटकों की वापसी इस बदलाव का सबसे बड़ा संकेत है। पहलगाम में फिर से रौनक लौट आई है और स्थानीय लोगों के चेहरे पर मुस्कान छाई हुई है।
पर्यटक लौट रहे हैं, भरोसा फिर जाग रहा है
पहलगाम ने दर्द भी देखा और हौसला भी। आतंकी हमले के बाद सन्नाटा छाया था, लेकिन अब सुरक्षा मजबूत हुई है और व्यवस्थाएं बेहतर हुई हैं। पर्यटक फिर से घाटी में आ रहे हैं। स्थानीय लोग भी इस बदलाव से खुश हैं। घोड़े वाले, गाइड और दुकानदार फिर से सक्रिय हो गए हैं। यह दर्शाता है कि पहलगाम कभी झुका नहीं है, बल्कि और मजबूत होकर उभरा है।
पर्यटकों की प्रतिक्रियाएं
गुजरात से आई नीलम कहती हैं, “यहां के लोग बहुत मेहमाननवाज हैं। यह यात्रा केवल घूमने की नहीं बल्कि समर्थन का भी संदेश है। यदि पर्यटक नहीं आएंगे तो स्थानीय जीवन प्रभावित होगा।”
स्थानीय कारोबार में नई उम्मीद
पर्यटकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय कारोबारियों में नई उम्मीद जगी है। होटलों, घोड़ा संचालकों, टैक्सी चालकों और दुकानदारों की आय में सुधार हो रहा है। पिछले साल की घटनाओं के बाद इनकी स्थिति कमजोर हुई थी, लेकिन अब धीरे-धीरे स्थिति सुधरने लगी है।
पर्यटन का भरोसे का आधार
हरियाणा से अपने परिवार के साथ पहलगाम पहुंचे दीपक कुमार कहते हैं, “हालात के डर से हम पहले कश्मीर आना छोड़ चुके थे, लेकिन अब यहाँ के लोग बहुत सहयोगी हैं। हमने अपने परिवार को भरोसा दिलाया है कि यहां के हालात सामान्य हैं।”
आगे की योजना
बायसरन, बांदीपोरा, गुरेज वैली, अथवातू और बंगस घाटी जैसे पर्यटन स्थल जल्द ही फिर से खोलने का फैसला हो सकता है।
यह बदलाव साबित करता है कि आतंक के साए से निकली घाटी अब फिर से मुस्कुरा रही है और पर्यटन ही इसका सबसे बड़ा जवाब है।



