
नयी दिल्ली. भारत ने बृहस्पतिवार को जोर देकर कहा कि पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशक (डीजीएमओ) ने 10 मई को अपने भारतीय समकक्ष से गोलीबारी और सैन्य गतिविधियां रोकने का अनुरोध किया था, जिस पर उसी दिन बाद में सहमति बनी थी. भारत ने कहा कि यह सहमति दोनों डीजीएमओ के बीच सीधे तौर पर बनी थी. विदेश राज्य मंत्री कीर्तवर्धन सिंह ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी.
आईयूएमएल सदस्य हारिस बीरान ने उनसे सवाल किया था, ” क्या यह सच है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम वार्ता में किसी तीसरे पक्ष द्वारा हस्तक्षेप किया गया था?” इसके जवाब में सिंह ने कहा, ”जी नहीं. 10 मई 2025 को, पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशक ने अपने भारतीय समकक्ष से गोलीबारी और सैन्य गतिविधियां बंद करने का अनुरोध किया, जिस पर उसी दिन सहमति दी गई. यह समझौता दोनों डीजीएमओ के बीच सीधे तौर पर हुआ.” बीरान ने यह सवाल भी किया कि क्या युद्ध विराम के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच किसी द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे.
इसके जवाब में सिंह ने कहा, ”जी नहीं.” एक दिन पहले, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उच्च सदन में आपरेशन सिंदूर पर हुई विशेष चर्चा का जवाब देते हुए कहा था, ”ऑपरेशन सिंदूर किसी के कहने पर नहीं रोका गया. पाकिस्तान घुटनों के बल आ गया और वहां के डीजीएमओ ने कॉल करके कहा…’बहुत हो गया, अब कृपया इसे रोक दीजिए’.”
भारत ने हमेशा बातचीत के ज़रिए दो-राज्य समाधान का समर्थन किया है : इजराइल-फलस्तीन संघर्ष पर सरकार
सरकार ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि भारत ने हमेशा बातचीत के जरिए दो-राज्य समाधान का समर्थन किया है, जिसके तहत सुरक्षित सीमाओं के भीतर संप्रभु एवं स्वतंत्र फलस्तीन की स्थापना होगी, जो इजराइल के साथ शांति से रह सके. विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी.
उन्होंने कहा, ”फलस्तीन के प्रति भारत की नीति लंबे समय से चली आ रही है. भारत ने हमेशा बातचीत के ज़रिए दो-राज्य समाधान का समर्थन किया है, जिसके तहत सुरक्षित और अधिकृत सीमाओं के भीतर संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फलस्तीन राज्य की स्थापना होगी, जो इजराइल के साथ शांति से रह सके.” सिंह ने कहा कि भारत ने सात अक्टूबर 2023 को इजराइल पर हुए आतंकवादी हमलों और मौजूदा इजराइल- हमास संघर्ष में नागरिकों की मौत की कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा कि भारत सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंतित है और उसने युद्धविराम, सभी बंधकों की रिहाई और बातचीत एवं कूटनीति के जरिए संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान का आ”ान किया है.” उन्होंने कहा कि भारत ने फलस्तीन के लोगों को सुरक्षित तरीके से, निरंतर और समय से मानवीय सहायता पहुंचाने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया है.
सिंह ने कहा कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स, गुटनिरपेक्ष आंदोलन, ‘वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ’ जैसे विभिन्न द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मंचों पर उपरोक्त स्थिति को दोहराया है. उन्होंने कहा कि उपर्युक्त नीति के अनुरूप तथा वार्ताओं के अभाव और प्रस्ताव की विषयवस्तु में असंतुलन को ध्यान में रखते हुए, भारत ने 12 जून को संयुक्त राष्ट्र महासभा के आपातकालीन विशेष सत्र में प्रस्ताव पर मतदान में भाग नहीं लिया.



