
नयी दिल्ली. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को संसद को बताया कि ट्रेन से यात्रा करते समय यात्रियों को निर्धारित सीमा से अधिक सामान ले जाने पर शुल्क देना होगा. वैष्णव ने तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) सांसद वेमिरेड्डी प्रभाकर रेड्डी द्वारा पूछे गए प्रश्नों के लिखित उत्तर में यह बात कही. रेड्डी ने जानना चाहा था कि क्या रेलवे, हवाई अड्डों पर अपनाई गई व्यवस्था के अनुरूप ट्रेन यात्रियों के लिए सामान संबंधी नियम लागू करेगा.
वैष्णव ने कहा, ”वर्तमान में, यात्रियों द्वारा डिब्बों के अंदर अपने साथ सामान ले जाने की श्रेणीवार अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है.” रेल मंत्री द्वारा लिखित उत्तर में साझा की गई जानकारी के अनुसार, द्वितीय श्रेणी में यात्रा करने वाले यात्री को 35 किलोग्राम वजन तक सामान निशुल्क ले जाने की अनुमति है और शुल्क देकर 70 किलोग्राम तक सामान ले जाया जा सकता है. वहीं, स्लीपर श्रेणी के यात्रियों के लिए 40 किग्रा सामान निशुल्क ले जाने की अनुमति है और अधिकतम सीमा 80 किग्रा है.
मंत्री द्वारा सदन को उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, ‘एसी थ्री टियर’ या ‘चेयर कार’ में यात्रा करने वाले यात्रियों को 40 किग्रा तक निशुल्क सामान ले जाने की अनुमति है, जो इसकी अधिकतम सीमा भी है. वहीं, प्रथम श्रेणी और ‘एसी टू टियर’ के यात्रियों को 50 किग्रा तक सामान निशुल्क ले जाने की अनुमति है, जिसकी अधिकतम सीमा 100 किग्रा है. एसी प्रथम श्रेणी के यात्री 70 किग्रा तक सामान निशुल्क ले जा सकते हैं, जबकि शुल्क देकर 150 किग्रा तक सामान ले जाया जा सकता है.
वैष्णव के अनुसार, 100 सेंटीमीटर लंबे, 60 सेमी चौड़े और 25 सेमी ऊंचाई तक के बाहरी माप वाले ट्रंक, सूटकेस और बक्से को व्यक्तिगत सामान के रूप में यात्री डिब्बों में ले जाने की अनुमति है. मंत्री ने स्पष्ट किया, ”यदि ट्रंक, सूटकेस और बक्से, जिनका बाहरी माप किसी भी रूप में अधिक है, तो ऐसी वस्तुओं को यात्रियों के डिब्बों में नहीं, बल्कि ब्रेकवैन (एसएलआर)/पार्सल वैन में बुक करके ले जाना होगा.” उन्होंने कहा कि निजी सामान के रूप में वाणज्यिक वस्तुओं की डिब्बे में बुकिंग और परिवहन की अनुमति नहीं है.
दो हजार किलोमीटर रेल मार्ग पर कवच का काम पूरा हुआ, हादसों में कमी आई: वैष्णव
रेल दुर्घटनाओं और कवच सुरक्षा प्रणाली को लेकर द्रमुक के एक सांसद के दावों को खारिज करते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि आज दो हजार किलोमीटर से अधिक रेल मार्ग पर कवच सुरक्षा प्रणाली लगाने का काम पूरा हो चुका है और देश में यह काम तेजी से चल रहा है. लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान द्रमुक सदस्य कलानिधि वीरस्वामी ने एक अखबार की खबर के हवाले से आरोप लगाया कि कवच सुरक्षा प्रणाली पर काम शुरू हो गया है, लेकिन अभी तक एक भी किलोमीटर मार्ग पर यह पूरा नहीं हुआ है.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लगभग ढाई साल पहले ओडिशा के बालासोर में हुई ट्रेन दुर्घटना में सरकार की ओर से ट्रेन के लोको पायलट पर आक्षेप लगाया गया और उनके परिवार को लंबे समय तक परेशानी झेलनी पड़ी, जबकि बाद में रिपोर्ट आई कि यह हादसा प्रणाली की विफलता की वजह से हुआ था. वीरास्वामी के दावों को सिरे से खारिज करते हुए रेल मंत्री ने कहा कि द्रमुक सांसद ने सदन में पूरी तरह गलत बयान दिया है और उन्हें बालासोर दुर्घटना के बारे में अपने बयान को यहां प्रमाणित करना चाहिए और ”गलत आक्षेप नहीं लगाने चाहिए”.
उन्होंने कहा, ”दुर्घटना की जांच पूरी तरह की गई, सभी कार्रवाई की गईं. एक बार भी लोको पायलट को इस मामले में जवाबदेह नहीं ठहराया गया. सदस्य (वीरास्वामी) को अपने बयान को वापस लेना चाहिए. यह पूरी तरह गलत बयान है, जिसे सदन स्वीकार नहीं कर सकता.” रेल मंत्री ने कहा कि बालासोर हादसा बहुत दुखद था जिसकी जांच पहले तकनीकी दल ने, फिर रेलवे सुरक्षा आयोग (सीआरएस) ने और बाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने की थी.
उन्होंने कहा, ”सभी तीनों रिपोर्ट जमा कर दी गई हैं. जांच के आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किये गये. मैं आरोपियों के नाम नहीं लूंगा, नहीं तो (विपक्षी) सदस्य कहेंगे कि इसमें सामुदायिक एंगल निकाला जा रहा है.” परिणामी (कांसिक्वेंशियल) रेल दुर्घटनाओं के बारे में जानकारी देते हुए वैष्णव ने कहा कि 2014-15 में जहां ऐसे रेल हादसों की संख्या 135 थी और इसमें 90 प्रतिशत कमी के साथ संख्या इस साल 11 रह गई.
रेल मंत्री ने कवच प्रणाली के संदर्भ में द्रमुक सदस्य के बयानों को गलत ठहराते हुए कहा, ”सदस्य ने इस संबंध में इस सदन में दिए गए उत्तरों और बयानों को सही से नहीं पढ़ा है.” उन्होंने कहा कि कवच जटिल प्रणाली है जिसमे ऑप्टिकल फाइबर तार (ओएफसी) पूरी लाइन पर बिछाने, हर स्टेशन पर एक छोटा डेटा केंद्र बनाने, पटरियों पर उपकरण बनाने और सारे लोकोमोटिव में उपकरण लगाने सहित पांच प्रणालियां होती हैं.
वैष्णव ने बताया, ”हमने अब तक 7,129 किलोमीटर ओएफसी लाइन पूरी कर ली है, 860 दूरसंचार टॉवर लगाए जा चुके हैं, 767 स्टेशन पर डेटा सेंटर बन चुके हैं और 3,413 पटरियों पर उपकरण लग चुके हैं. 4,154 लोकोमोटिव में इसके उपकरण लग चुके हैं.” उन्होंने कहा, ”आज दो हजार किलोमीटर से अधिक रेल लाइन पर कवच प्रणाली लगाने का काम पूरा हो चुका है. प्रगति तेज है और कवच का काम रफ्तार से चल रहा है.” उन्होंने कहा कि इसके अलावा 40,000 टेक्नीशियन और ऑपरेटर को प्रशिक्षण दिया जा चुका है.
वैष्णव ने विपक्षी दलों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि स्वचालित रेल सुरक्षा प्रणाली के संबंध में बाकी देशों ने 1970 और 80 के दशक में ही काम कर लिया था, लेकिन भारत में तब की सरकारों ने क्या किया? उन्होंने कहा, ”हमने 2014 में सरकार बनने के बाद तुरंत इस पर काम चालू किया. 2016 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसके विकास की शुरुआत की. 2019 तक कवच का पहला संस्करण विकसित हुआ. अंतिम और चौथा संस्करण 2024 तक विकसित हुआ. इस काम की पूरी दुनिया प्रशंसा कर रही है.”



