कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर शुरू करने के लिए तैयारियां जारी : चीन

बीजिंग. चीन के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि गर्मी के इस मौसम में भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर आरंभ करने के लिए दोनों देशों के बीच तैयारियां चल रही हैं. करीब पांच साल के अंतराल के बाद यह यात्रा फिर शुरू की जाएगी.
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने यहां प्रेस वार्ता में कहा कि चीन के तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र में कैलाश पर्वत और मानसरोवर की भारतीय श्रद्धालुओं की तीर्थयात्रा दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. चीन और भारत के बीच बनी सहमति के अनुरूप, गर्मी के इस मौसम में तीर्थयात्रा फिर शुरू की जाएगी. गुओ ने कहा कि दोनों पक्ष इस समय जरूरी तैयारियां करने में जुटे हुए हैं.

उन्होंने कहा कि इस वर्ष चीन-भारत राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ है. उन्होंने कहा कि चीन दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमति को आगे बढ.ाने और द्विपक्षीय संबंधों के सुदृढ. और स्थिर विकास को बढ.ाने के लिए भारत के साथ काम करने को तैयार है. पिछले सप्ताह नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने घोषणा की थी कि यह यात्रा जून से अगस्त तक दो मार्गों – उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रा और सिक्किम में नाथू ला – के रास्ते होगी. यह तीर्थयात्रा हिंदुओं के साथ-साथ जैन और बौद्धों के लिए भी धार्मिक महत्व रखती है.

विदेश मंत्रालय ने 26 अप्रैल को जारी बयान में कहा कि इस वर्ष, उत्तराखंड राज्य से लिपुलेख दर्रे और सिक्किम राज्य से नाथू ला दर्रे को पार करते हुए क्रमश: पांच जत्थों और 10 जत्थों (प्रत्येक में 50 श्रद्धालु) में तीर्थयात्री यात्रा करेंगे. कोविड-19 महामारी और उसके बाद पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर दोनों पक्षों के बीच सैन्य गतिरोध के कारण 2020 में यात्रा स्थगित कर दी गई थी.

भारत और चीन ने पिछले साल 21 अक्टूबर को हुए एक समझौते के तहत डेमचोक और देपसांग में टकराव वाले दो स्थानों से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी कर ली थी. इसके बाद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने रूसी शहर कजान में वार्ता की तथा विभिन्न द्विपक्षीय वार्ता तंत्रों को बहाल करने पर सहमति व्यक्त की. मोदी और शी की वार्ता के बाद पिछले कुछ महीनों में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के उद्देश्य से कई बैठकें कीं. इस यात्रा को दोनों देशों द्वारा संबंधों को सामान्य बनाने के लिए किये जा रहे उपायों में पहला कदम बताया जा रहा है.

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