
नयी दिल्ली. कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जनसभाओं के मद्देनजर शुक्रवार को राज्य से जुड़े कई मुद्दों को लेकर उन पर निशाना साधा और सवाल किया कि उनकी सरकार ने पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि को क्यों खत्म कर दिया. प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी, फतेहपुर और हमीरपुर में चुनावी जनसभाओं को संबोधित किया.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”मोदी सरकार ने पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि को क्यों ख.त्म कर दिया है? भाजपा ने उत्तर प्रदेश के मेंथा किसानों की उपेक्षा क्यों की है? बुढ.वल चीनी मिल को दोबारा खोलने को लेकर बीजेपी ने बार-बार झूठ क्यों बोला? उन्होंने कहा, ”पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि को 2015 में मोदी सरकार ने समाप्त कर दिया. इसका उद्देश्य भारत के पिछड़े ज.लिों का उत्थान करना था. यह दूरदर्शी योजना 2006 में संप्रग सरकार लाई थी. 2013 तक, उत्तर प्रदेश के पिछड़े ज.लिों को इससे 4000 करोड़ रुपए का लाभ मिल चुका था. 2015 में, मोदी सरकार ने इस योजना के लिए अलग बजटीय आवंटन बंद कर दिया, इसे राज्यों को हस्तांतरित कर दिया.”
रमेश ने कहा, ”राजीव गांधी पंचायत सशक्तीकरण अभियान (आरजीपीएसए) के लिए वार्षिक धनराशि भी 1,006 करोड़ रुपए से घटाकर केवल 60 करोड़ रुपए कर दी गई. यह फ.तेहपुर जैसे ज.लिों के लिए एक बड़ा झटका था, जिन्हें इनसे बेहद आवश्यक विकास निधि प्राप्त होती थी.” उन्होंने सवाल किया, ”क्या निवर्तमान प्रधानमंत्री बता सकते हैं कि उनकी सरकार ने पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि को क्यों ख.त्म कर दिया?” रमेश ने एक अन्य पोस्ट में प्रश्न किया, ”उद्घाटन के 5 दिन बाद ही बुन्देलखंड एक्सप्रेस-वे में गड्ढे क्यों हो गए? भाजपा शासन में बुन्देलखण्ड में असिंचित क्षेत्र क्यों बढ. गए हैं? मोदी सरकार बिना किसी व्यावहारिक दृष्टिकोण के केन-बेतवा लिंक को लेकर इतनी उत्सुक क्यों है?”
‘इंडिया’ गठबंधन की सरकार दिल्ली में प्रदूषण की समस्या को दूर करने को प्राथमिकता देगी: कांग्रेस
कांग्रेस ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर दिल्ली में प्रदूषण की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया और कहा कि केंद्र में ‘इंडिया’ गठबंधन की सरकार बनने पर राष्ट्रीय राजधानी को इस समस्या से मुक्ति दिलाने को प्राथमिकता दी जाएगी.
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि दिल्ली में प्रशासनिक संरचना अलग है तथा यहां प्रदूषण की समस्या पड़ोसी राज्यों से संबंधित है, इसलिए यह विषय केंद्र सरकार के अधीन आता है और उसकी जिम्मेदारी बनती है. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ”दिल्ली के चुनाव में पर्यावरण एक विशेष स्थान रखता है. दिल्ली के पर्यावरण के लिए केंद्र सरकार प्राथमिक रूप से जिम्मेदार है, क्योंकि दिल्ली में प्रदूषण की समस्या आसपास के अलग-अलग राज्यों से भी जुड़ी हुई है.” रमेश का कहना है कि वायु प्रदूषण को लेकर पिछले 10 वर्षों में जो प्रयास किए गए उनका असर नहीं दिख रहा है.
उन्होंने कहा, ”आज सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए वायु प्रदूषण एक बहुत बड़ी समस्या बन गई है. दिल्ली के आसपास 11 बिजली स्टेशन हैं, जो कोयले का उपयोग करते हैं. 2009 में सारे बिजली स्टेशनों के लिए वायु प्रदूषण मानक तय किए गए था, जो इसको लागू नहीं करते थे, उन्हें बंद करा दिया जाता था.” रमेश ने दावा किया, ”आज असलियत यह है कि 11 बिजली स्टेशनों में से 9 में किसी न किसी तरह मानकों का उल्लंघन हुआ है. लेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की.” उन्होंने कहा कि रसायनों से होने वाला संदूषण भी एक बड़ी समस्या है.



