
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को देश भर के प्रशासनिक अधिकारियों का आ’’ान किया कि वे हर फैसले से पहले इन सवालों के बारे में जरूर सोचें कि सत्ता में बैठी राजनीतिक पार्टियां सरकारी धन का इस्तेमाल देश के विकास में कर रही हैं या अपने दल के विस्तार में या फिर वोट बैंक बनाने के प्रयास में वह उसे लुटा रही हैं.
लोक सेवा दिवस पर राजधानी में लोक सेवकों को संबोधित करते हुए मोदी ने उनसे राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को विस्तार देने का आग्रह करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा नहीं किया तो देश का धन लुट जाएगा, करदाताओं के पैसे बर्बाद हो जाएंगे और युवाओं के सपने चकनाचूर हो जाएंगे. इस अवसर पर मोदी ने लोक प्रशासन के क्षेत्र में अभूतपूर्व कामकाज के लिए प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार भी प्रदान किए. ये पुरस्कार नागरिकों के जीवन में सुधार लाने के उद्देश्य से जिलों और संगठनों को असाधारण प्रयासों और नई पहलों के लिए दिये जाते हैं. अपने संबोधन में मोदी ने कहा कि लोक सेवकों के छोटे से छोटे फैसलों का आधार भी देश हित होना चाहिए.
लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के महत्व का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हर दल की अपनी विचारधारा होती है और संविधान ने हर दल को यह अधिकार भी दिया है लेकिन एक सरकारी कर्मचारी के तौर पर प्रशासनिक अधिकारियों को कुछ सवालों का अवश्य ही ध्यान रखना पड़ेगा.
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘जो राजनीतिक दल सत्ता में आया है क्या वह करदाताओं के पैसों का इस्तेमाल अपने दल के हित के लिए कर रहा है या देश के हित के लिए कर रहा है? उसका इस्तेमाल कहां हो रहा है ? यह आप लोगों को देखना ही होगा.’’ उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल अपने विस्तार में सरकारी धन का इस्तेमाल कर रहा है या देश के विकास में उन पैसों का उपयोग कर रहा है, वह अपना वोट बैंक बनाने के लिए सरकारी धन लुटा रहा है या सभी का जीवन आसान बनाने के लिए काम कर रहा है… ?
मोदी ने कहा, ‘‘वह राजनीतिक दल सरकारी पैसे से अपना प्रचार कर रहा है या ईमानदारी से लोगों को जागरूक कर रहा है? वह राजनीतिक दल अपने कार्यकर्ताओं को विभिन्न संस्थाओं में नियुक्त कर रहा है या फिर सब को पारदर्शी रूप से नौकरी में आने का अवसर दे रहा है? राजनीतिक दल नीतियों में कहीं इसलिए तो फेरबदल नहीं कर रहा है ताकि उसके आकाओं की काली कमाई के नए रास्ते बनें?’’
उन्होंने कहा, ‘‘आप अपने हर फैसले से पहले इन सवालों के बारे में जरूर सोचें. सरदार पटेल लोक सेवकों को ‘स्टील फ्रेम आॅफ इंडिया’ कहते थे. उनकी अपेक्षाओं पर आपको खरा उतरना है. नहीं तो देश का धन लुट जाएगा, करदाताओं का पैसा बर्बाद हो जाएगा और देश के युवाओं के सपने चकनाचूर हो जाएंगे.’’ प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर अमृत काल का भी उल्लेख किया और कहा कि मौजूदा दौर में उनकी (लोकसेवकों की) भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि पूरा विश्व भारत की ओर उम्मीदों से देख रहा है.
उन्होंने कहा, ‘‘आज पूरे विश्व की भारत से अपेक्षाएं बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं. दुनिया भर के विशेषज्ञ और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं यह कह रही हैं कि भारत का समय आ गया है.’’ उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यह ऐसा समय है जब उन्हें एक भी पल नहीं गंवाना है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले नौ सालों में सरकार के कामकाज की बदौलत भारत आज बहुत ऊंची छलांग के लिए तैयार है और विश्व पटल पर एक विशिष्ट भूमिका में आया है तो इसमें लोक सेवकों को सहयोग बहुत महत्वपूर्ण रहा है.
उन्होंने कहा कि साल 2014 के मुकाबले आज देश में 10 गुना ज्यादा तेजी से रेल लाइनों का विद्युतीकरण हो रहा है, दोगुनी रफ्तार से राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण हो रहा है, हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी हुई है और बंदरगाहों का भी दोगुनी तेजी से विकास हुआ है जबकि पहले की सरकारों के दौरान भ्रष्टाचार हावी रहा.
उन्होंने कहा कि पहले का तंत्र कैसा था इसे इसी से समझा जा सकता है कि देश में चार करोड़ से ज्यादा फर्जी गैस कनेक्शन थे, चार करोड़ से ज्यादा फर्जी राशनकार्ड थे, एक करोड़ काल्पनिक महिलाओं और बच्चों को महिला और बाल विकास मंत्रालय की सहायता जा रही थी, अल्पसंख्यक मंत्रालय करीब 30 लाख फर्जी युवाओं को स्कॉलरशिप का लाभ देता रहा, मनरेगा के तहत देश में लाखों ऐसे फर्जी श्रमिकों के पैसे हस्तांतरित किए हैं जिनका अस्तित्व ही नहीं था.
उन्होंने कहा, ‘‘आप सोचिए जिनका कभी जन्म ही नहीं हुआ…जो सिर्फ कागजों में पैदा हुए… ऐसे लाखों-करोड़ों फर्जी नामों की आड़ में एक बहुत बड़ा इकोसिस्टम भ्रष्टाचार से जुड़ा था.’’ उन्होंने दावा किया कि पिछले नौ सालों में स्थितियां बदली हैं और देश के करीब तीन लाख करोड़ रुपए गलत हाथों में जाने से बचे हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘राष्ट्र प्रथम, नागरिक प्रथम’ की भावना आज की सरकार की प्राथमिकता है जिसके मूल में वंचितों को वरीयता की सोच है. अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने पीएम गति शक्ति योजना का भी उल्लेख किया और अधिकारियों से इसका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने का अनुरोध किया.
उन्होंने कहा, ‘‘इससे लोगों की जरूरतों को पहचानने में और आने वाली मुश्किलों को दूर करने में मदद मिलेगी ही मिलेगी. इससे विभागों के बीच और जिला व ब्लाक के बीच संवाद और सरल होगा. आगे की रणनीति बनाना भी इससे आसान होगा.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी का यह अमृत काल भारत के सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए जितने बड़े अवसर लेकर आया है, वह उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है.
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आज भारत के लोगों की आकांक्षाएं बहुत तेजी से बढ़ रही हैं और वे विकसित भारत के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना चाहते. उन्होंने कहा, ‘‘देश के लोगों की इस आकांक्षा को पूरा करने के लिए, हम सभी को पूरे सामर्थ्य से जुट जाना होगा. तेजी से निर्णय लेने होंगे और तेजी से लागू भी करने होंगे.’’



