रायपुर: ग्रामीण नल-जल योजनाओं के संचालन के लिए नई नियमावली पर मंथन, ग्राम पंचायतों को मिलेंगे पूर्ण अधिकार

Author: www.navabharat.news
UPDATED: Sat, 19 Sep 2026 09:10 AM
रायपुर: ग्रामीण नल-जल योजनाओं के संचालन के लिए नई नियमावली पर मंथन, ग्राम पंचायतों को मिलेंगे पूर्ण अधिकार
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रायपुर, 18 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन और नल-जल योजनाओं के तहत निर्मित पेयजल परिसंपत्तियों के सुचारू संचालन और नियमित रखरखाव को लेकर राज्य सरकार नियमावली तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में इस संबंध में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को लंबे समय तक सुरक्षित और प्रभावी बनाए रखने के लिए संचालन, संधारण, नियंत्रण और जल सुरक्षा से जुड़े विभिन्न प्रावधानों पर विचार-विमर्श किया गया।

ग्राम पंचायतों को संचालन और नियंत्रण की जिम्मेदारी

प्रस्तावित छत्तीसगढ़ पंचायत (ग्रामीण नलजल संचालन, संधारण एवं प्रबंधन) नियम के तहत ग्राम पंचायतों को ग्रामीण नल-जल योजनाओं के संचालन और रखरखाव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने पर चर्चा हुई।

ग्राम पंचायतों में निर्मित और हस्तांतरित नल-जल योजनाओं के संचालन, संधारण, रखरखाव, विस्तार और नियंत्रण का अधिकार ग्राम पंचायतों के पास रहेगा। पंचायतें जलापूर्ति की समय-सारणी तय करने के साथ जल प्रभार की वसूली भी करेंगी।

नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना और सेवा निलंबन जैसी कार्रवाई का भी प्रावधान प्रस्तावित है।

ग्राम सभा की मंजूरी से होगी जल एवं स्वच्छता सहायक की नियुक्ति

योजनाओं के दैनिक संचालन के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम जल एवं स्वच्छता सहायक की नियुक्ति ग्राम सभा के अनुमोदन से की जाएगी। ये सहायक पंप और वॉल्व संचालन तथा आवश्यक मरम्मत कार्यों में भूमिका निभाएंगे।

इनके लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 10वीं पास रखी गई है, जबकि आईटीआई उत्तीर्ण उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने का प्रस्ताव है। सहायक को अधिकतम 5,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय और एकत्रित मासिक जल प्रभार राशि का 10 प्रतिशत प्रोत्साहन देने का प्रावधान प्रस्तावित है।

अलग-अलग क्षेत्रों के लिए न्यूनतम जल प्रभार

प्रस्तावित नियमों में घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए न्यूनतम जल प्रभार तय करने पर भी चर्चा हुई।

  • जनजातीय विकासखंड: न्यूनतम 60 रुपये प्रति परिवार प्रति माह
  • सामान्य गैर-जनजातीय विकासखंड: न्यूनतम 100 रुपये प्रति परिवार प्रति माह
  • मास्टर प्लान अधिसूचित क्षेत्र: न्यूनतम 120 रुपये प्रति परिवार प्रति माह
  • व्यावसायिक प्रतिष्ठान: न्यूनतम 500 रुपये प्रति माह या मीटर आधारित देयक

जल प्रभार के बिल जारी करने और राशि संग्रह की व्यवस्था समर्थ पंचायत पोर्टल के माध्यम से करने का प्रस्ताव है।

तीन महीने तक जल प्रभार नहीं देने पर कट सकता है कनेक्शन

पेयजल के अपव्यय को रोकने के लिए भी दंडात्मक प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। वाहन धोने, मवेशियों को नहलाने, टुल्लू या विद्युत पंप लगाकर पानी खींचने अथवा कृषि कार्यों में पेयजल का उपयोग करने जैसी गतिविधियों पर जुर्माना लगाया जा सकता है।

पहली बार पानी की बर्बादी पाए जाने पर न्यूनतम 100 रुपये और बार-बार ऐसा करने पर न्यूनतम 500 रुपये जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है। जरूरत पड़ने पर कनेक्शन भी काटा जा सकता है।

लगातार तीन महीने तक जल प्रभार जमा नहीं करने पर नल कनेक्शन विच्छेद करने की कार्रवाई की जा सकती है।

पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाने पर वसूली

किसी तीसरे पक्ष या निर्माण एजेंसी द्वारा पाइपलाइन अथवा अन्य पेयजल परिसंपत्ति को नुकसान पहुंचाने की स्थिति में मरम्मत की लागत के साथ शास्ति वसूलने के प्रावधान पर भी बैठक में विचार किया गया।

महिला समूहों की मदद से होगी पानी की गुणवत्ता जांच

ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल की गुणवत्ता की नियमित निगरानी के लिए जल बहिनी/वाहिनी/सुजलम शक्ति समूहों यानी महिला समूहों को जोड़े जाने का प्रस्ताव है।

फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से पानी की नियमित भौतिक और रासायनिक जांच की जाएगी। जांच से जुड़ी रिपोर्ट को संबंधित पोर्टल पर अपलोड करने की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई।

भू-जल संरक्षण पर जोर, उद्योगों के लिए सख्त प्रावधान

प्रस्तावित नियमों में ग्राम पंचायत क्षेत्रों में उद्योगों द्वारा भू-जल के निष्कर्षण पर पूर्ण प्रतिबंध रखने की बात कही गई है। औद्योगिक इकाइयों को केवल सतही जल या उपचारित ग्रे-वाटर का इस्तेमाल करना होगा।

पेयजल पाइपलाइन से औद्योगिक कार्यों के लिए पानी लेना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

GIS और जियो-टैगिंग से होगी योजनाओं की निगरानी

ग्रामीण जलापूर्ति व्यवस्था की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। पानी की टंकियों, जल स्रोतों और नल कनेक्शनों की जियो-टैगिंग कर सुजलम भारत आईडी जनरेट करने का प्रस्ताव है।

GIS मैपिंग और अन्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से योजनाओं की सतत निगरानी की जाएगी।

आपत्तियां और सुझाव भी मांगे जाएंगे

बैठक में प्रस्तावित नियमों पर संबंधित पक्षों और प्रभावित व्यक्तियों से निर्धारित समयावधि में आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित करने के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह सहित ऊर्जा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनसंपर्क और अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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