”लैटरल एंट्री” के माध्यम से की जाने वाली नियुक्तियों पर आरक्षण लागू नहीं होता : सरकार

नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा को बताया कि ”लैटरल एंट्री” के माध्यम से की जाने वाली नियुक्तियों पर आरक्षण लागू नहीं होता. केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि वर्ष 2018 से अब तक तीन चरणों (2018, 2021 और 2023) में कुल 63 नियुक्तियां ”लैटरल एंट्री” के माध्यम से की गई हैं.

यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) ”लैटरल एंट्री” के जरिये सीधे उन पदों पर उम्मीदवारों की नियुक्ति करता है, जिन पदों पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों की तैनाती होती है. इसमें निजी क्षेत्रों से अलग-अलग विषयों के जानकारों को विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में सीधे संयुक्त सचिव, निदेशक और उप सचिव पद पर नियुक्त की जाती है.

केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री ने कहा ”ये नियुक्तियां विशेष कार्यों के लिए की गई हैं, जिनमें चयनित व्यक्तियों के पास संबंधित विषय में विशेष ज्ञान और विशेषज्ञता है.” सिंह ने कहा कि प्रत्येक नियुक्ति एकल पद के लिए की गई है, इसलिए इसमें आरक्षण लागू नहीं होता, जो कि ‘पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ बनाम फैकल्टी एसोसिएशन व अन्य’ मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्णय में स्पष्ट किया गया है.

उन्होंने बताया कि इसी कारण से चयनित अधिकारियों की श्रेणीवार जानकारी भी नहीं रखी गई है. वर्तमान में 43 अधिकारी विभिन्न मंत्रालयों/विभागों में कार्यरत हैं. जितेंद्र सिंह ने यह बात उन सवालों के जवाब में कही, जिनमें पिछले पांच वर्षों में केंद्र सरकार में ”लैटरल एंट्री” के जरिए हुई नियुक्तियों के ब्यौरे के साथ ही यह जानकारी मांगी गई थी कि इनमें आरक्षण व्यवस्था का पालन किया गया या नहीं. गौरतलब है कि आरक्षण प्रावधान के अभाव को लेकर राजनीतिक विवाद उठने के बाद, संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने पिछले वर्ष अगस्त में ”लैटरल एंट्री” के जरिए प्रमुख पदों पर नियुक्तियों के लिए जारी विज्ञापन रद्द कर दिया था.

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