
हैदराबाद. कांग्रेस विधायक दल के नेता ए. रेवंत रेड्डी ने बृहस्पतिवार को यहां एक समारोह में तेलंगाना के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. इस दौरान सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे सहित कांग्रेस के शीर्ष नेता मौजूद थे. राज्यपाल तमिलिसाई सौंदरराजन ने यहां एलबी स्टेडियम में रेवंत रेड्डी और मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. रेवंत रेड्डी के अलावा, मल्लू बी. विक्रमार्क (उपमुख्यमंत्री), एन. उत्तम कुमार रेड्डी, कोमाटिरेड्डी वेंकट रेड्डी, सी. दामोदर राजनरसिम्हा, डी. श्रीधर बाबू, पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी, पोन्नम प्रभाकर, कोंडा सुरेखा, डी. अनसूया (सीथक्का के नाम से मशहूर), तुम्मला नागेश्वर राव और जुपल्ली कृष्णा राव ने मंत्री पद की शपथ ली.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत पार्टी नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाद्रा और कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू यहां एलबी स्टेडियम में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए.
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद रेवंत रेड्डी ने दो फाइल पर हस्ताक्षर किये. उनमें से एक कांग्रेस की छह चुनावी ‘गारंटी’ के कार्यान्वयन से संबंधित है और दूसरी फाइल रेवंत रेड्डी द्वारा अतीत में किए गए वादे के अनुसार एक दिव्यांग महिला को नौकरी प्रदान करने से जुड़ी है.
कार्यक्रम के दौरान रेवंत रेड्डी ने अपनी पत्नी के साथ सोनिया गांधी का आशीर्वाद लिया. मंत्री पद की शपथ लेने के बाद, सोनिया ने सीथक्का और सुरेखा को गले लगाया. सभा को संबोधित करते हुए, रेवंत रेड्डी ने कहा कि मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय-सह-आधिकारिक आवास ‘प्रगति भवन’ के चारों ओर बैरिकेड और लोहे की बाड़ को हटाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का कैंप कार्यालय-सह-आधिकारिक आवास अब से सभी के लिए सुलभ होगा.
‘प्रगति भवन’ का नाम बदलकर ‘ज्योतिराव फुले प्रजा भवन’ करते हुए उन्होंने कहा कि आठ दिसंबर को पूर्वाह्न 10 बजे ‘प्रजा दरबार’ आयोजित किया जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों के दौरान लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया गया, जबकि कांग्रेस ने स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय और समान विकास सुनिश्चित करने के लिए तेलंगाना का गठन किया था.
उन्होंने कहा कि ‘इंदिरम्मा राज्यम’ (पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का कल्याणकारी शासन) तेलंगाना के लोगों के लिए स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय और विकास की शुरुआत करता है. रेड्डी ने यह भी कहा कि राज्य का विकास दुनिया के साथ प्रतिस्पर्धा करेगा और सरकार लोगों के लिए ”सेवक” की तरह काम करेगी न कि शासक की तरह.
रेड्डी ने यह भी आश्वासन दिया कि वह पिछले 10 वर्षों में कड़ी मेहनत करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं का ध्यान रखेंगे. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार छात्रों और बेरोजगार युवाओं के साथ उन लोगों के परिवारों के साथ न्याय करेगी जिन्होंने तेलंगाना राज्य के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया.
उन्होंने उपस्थित लोगों से तेलंगाना के जनता की ओर से, अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों, वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं, सांसदों और इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले ‘इंडिया’ गठबंधन के दलों के प्रतिनिधियों को धन्यवाद देने का आग्रह किया. इससे पहले, सोनिया गांधी और रेवंत रेड्डी फूलों से विशेष रूप से सजाए गए एक खुले वाहन में कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे. इस बीच, अधिकारियों ने यहां बेगमपेट में सीएम के कैंप कार्यालय-सह-आधिकारिक आवास के सामने बाड़ लगाने के लिए लगाए गए लोहे के ढांचे को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी.
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) नेतृत्व ने दो दिन पहले रेवंत रेड्डी को कांग्रेस विधायक दल का नेता नामित किया था. राज्य की 119 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनावों में कांग्रेस ने 64 सीटें जीतकर भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) से सत्ता छीन ली.
रेवंत रेड्डी: तेलंगाना में कांग्रेस को बुलंदी पर पहुंचाने वाले जुझारू नेता
एबीवीपी से राजनीतिक सफर शुरू कर तेलंगाना के मुख्यमंत्री बनने तक अनुमूला रेवंत रेड्डी का राजनीतिक सफर जमीनी स्तर के एक नेता के हौसले और चुनावी लड़ाई को अपनी पार्टी के पक्ष में अंजाम तक पहुंचाने का शानदार उदाहरण है. ‘केसीआर’ के नाम से मशहूर के. चंद्रशेखर राव के बाद तेलंगाना के दूसरे मुख्यमंत्री बने रेवंत रेड्डी बेहद जुझारू हैं और कभी हार न मानने वाले अपने जज्बे के लिए साथी नेताओं, पार्टीजनों और लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं.
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के प्रमुख केसीआर के मुखर आलोचक प्रदेश कांग्रेस प्रमुख रेड्डी अक्सर बीआरएस और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के तीखे राजनीतिक हमलों का निशाना बनते रहे हैं. बीआरएस नेता उन पर पार्टी बदलने को लेकर निशाना साधते रहे हैं. 2015 के ‘नोट के बदले वोट’ मामले में रेड्डी को गिरफ्तार किया गया था और उस समय उन्हें तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू का ‘एजेंट’ बताया गया था.
एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की रेड्डी की पृष्ठभूमि को लेकर उन पर निशाना साधते रहे हैं. रेड्डी पहले कुछ समय के लिए बीआरएस (तब तेलंगाना राष्ट्र समिति) में रह चुके हैं. वह 2006 में जिला परिषद चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीते थे.
वह 2007 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अविभाजित आंध्र प्रदेश में विधान परिषद में निर्वाचित हुए. रेड्डी तेदेपा में शामिल हो गए थे और पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के करीबी थे. कला में स्नातक रेड्डी ने 2009 में तेदेपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता था और 2014 में तेलंगाना के अलग राज्य बनने पर भी उन्होंने चुनाव में जीत दर्ज की थी.
रेड्डी को 2015 में अपने राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी चुनौती का तब सामना करना पड़ा जब उन्होंने विधान परिषद चुनाव में तेदेपा के पक्ष में वोट देने के लिए एक मनोनीत विधायक को रिश्वत देने की कोशिश की थी. यह घटना कैमरे के सामने हुई थी. रेड्डी को हैदराबाद की एक जेल में भेज दिया गया था और बाद में उन्हें जमानत मिल गई.
रेड्डी 2018 के विधानसभा चुनाव में बीआरएस उम्मीदवार से हार गए थे और कुछ समय तक चर्चाओं से दूर रहे. उन्होंने तेदेपा छोड़कर 2017-18 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उपस्थिति में दिल्ली में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी. रेड्डी 2019 के लोकसभा चुनाव में तेलंगाना की मल्काजगिरि संसदीय सीट से कांग्रेस सांसद के रूप में निर्वाचित हुए. इस निर्वाचन क्षेत्र में देश भर के लोगों की मौजूदगी के कारण इसे ‘मिनी-इंडिया’ बताया जाता है.
उन्हें 2021 में कांग्रेस में ‘जूनियर’ नेता होने के बावजूद प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई. इससे प्रदेश कांग्रेस इकाई में अनेक वरिष्ठ नेता असंतुष्ट दिखे. रेड्डी के सामने चुनौतीपूर्ण हालात के बीच कांग्रेस का भविष्य संवारने का कठिन कार्य था और वह पार्टी नेताओं को एकजुट करने में लग गए. तेलंगाना में 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के 12 विधायकों का 2019 में बीआरएस में शामिल हो जाना भी कांग्रेस पार्टी को असहज करने वाला घटनाक्रम था.
तेलंगाना में बंडी संजय कुमार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कमान मिलने के बाद 2020 और 2021 में दो विधानसभा उपचुनावों और ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव में भाजपा को बड़ी सफलता मिली और कांग्रेस को एक बार फिर झटका लगा.
इन कड़ी चुनौतियों के बावजूद रेड्डी कांग्रेस को सफलता दिलाने की मशक्कत करते रहे और इस साल मई में कर्नाटक चुनाव के बाद कांग्रेस को थोड़ी ऊर्जा मिली.
कर्नाटक में जीत के बाद तेलंगाना की जनता में कांग्रेस को लेकर धारणाएं बदलने के साथ पार्टी का ग्राफ बढ़ता दिखाई दिया. बीआरएस और भाजपा के बीच कथित मौन सहमति के बारे में लोगों और राजनीतिक हलकों के बीच धारणा के मद्देनजर तेलंगाना में कांग्रेस अपनी पकड़ बनाने लगी. केसीआर की बेटी के. कविता पर दिल्ली आबकारी नीति मामले में लगे आरोपों ने भी कांग्रेस को बल प्रदान किया. फुटबॉल प्रेमी रेड्डी को राहुल गांधी और कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी शिवकुमार का करीबी माना जाता है.



