आरजी कर प्रदर्शन: तृणमूल के सामने अभूतपूर्व चुनौती, हालात ने नयी राजनीतिक ताकत की गुंजाइश पैदा की

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Mon, 09 Sep 2024 12:26 PM
आरजी कर प्रदर्शन: तृणमूल के सामने अभूतपूर्व चुनौती, हालात ने नयी राजनीतिक ताकत की गुंजाइश पैदा की
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कोलकाता: आरजी कर अस्पताल में एक महिला चिकित्सक के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या मामले ने पश्चिम बंगाल में व्यापक जन आक्रोश पैदा कर दिया है जिससे सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया और यह 2011 में सत्ता संभालने के बाद से अब तक ममता बनर्जी के नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों और नेताओं का मानना है कि इस घटना के बाद निरंतर जन आंदोलन ने पश्चिम बंगाल में आम नागरिकों, छात्रों और पेशेवरों के नेतृत्व में एक नए राजनीतिक दल के लिए उर्वर जमीन तैयार की है, जिनका सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) से मोहभंग हो चुका है।

राजनीतिक विशेषज्ञ मैदुल इस्लाम ने कहा, ‘‘इस आंदोलन की ताकत पारंपरिक राजनीतिक बैनर से इसकी आजादी में है जो न्याय, पारर्दिशता तथा प्रभावी शासन के लिए उसकी व्यापक मांग को दर्शाता है। इसने मौजूदा विपक्षी दलों में नेतृत्व के अभाव को उजागर कर दिया है, जिसे जवाबदेही के लिए प्रदर्शनकारियों के आह्वान के साथ जुड़कर एक नयी पार्टी संभावित रूप से पूरा कर सकती है।’’ कोलकाता के सरकारी अस्पताल में महिला चिकित्सक से उस वक्त कथित तौर पर दुष्कर्म और उसकी हत्या की गयी जब वह ड्यूटी पर थी। उसका शव नौ अगस्त को मिला था। इसके अगले दिन कोलकाता पुलिस ने एक स्वयंसेवी को गिरफ्तार किया था।

इस घटना को लेकर जन आक्रोश इतना ज्यादा था कि हजारों चिकित्सा पेशेवर, छात्र, कार्यकर्ता और आम नागरिक कोलकाता तथा अन्य शहरों की सड़कों पर उतर गए थे। तृणमूल ने शुरुआत में इस मामले में धीमी प्रतिक्रिया दी और विवादास्पद टिप्पणियां कीं। उसकी इस मामले को संभालने में नाकामी के लिए व्यापक आलोचना की गयी।

मुख्यमंत्री की सार्वजनिक ंिनदा और त्वरित न्याय के वादे जनता के गुस्से को शांत करने या अपने नागरिकों की रक्षा करने में उनके प्रशासन की क्षमता में विश्वास बहाल करने में विफल रहे। तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न उजागर करने की शर्त पर ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया ‘‘कोलकाता पुलिस ने मुख्य आरोपी को 24 घंटे के भीतर ही गिरफ्तार कर लिया’’ लेकिन प्रशासनिक तौर पर गलत कदमों और पीड़िता के माता-पिता के आरोपों के कारण जनता के बीच यह धारणा बन गयी कि सरकार ने इस मामले पर लीपापोती की है।

तृणमूल प्रवक्ता कृष्णु मित्रा ने यह कहकर न्याय के लिए पार्टी की प्रतिबद्धता का बचाव किया कि ‘‘ये प्रदर्शन साबित करते हैं कि पश्चिम बंगाल में आंदोलन के लिए लोकतांत्रिक गुंजाइश है जबकि भाजपा शासित राज्यों में ऐसा नहीं है।’’ बहरहाल, उन्होंने स्वीकार किया कि इस घटना ने मजबूत जन समर्थन होने के बावजूद तृणमूल कांग्रेस को मुश्किल स्थिति में डाल दिया है क्योंकि विपक्षी ताकतें इस घटना को भुनाने में लग गयी हैं।

इस घटना ने सत्तारूढ़ पार्टी के बीच मतभेदों को भी उजागर कर दिया है। राज्यसभा में तृणमूल के उप नेता सुखेंदु शेखर रे को ‘रीक्लेम द नाइट’ प्रदर्शन का सार्वजनिक रूप से समर्थन करने के बाद पार्टी की नाराजगी झेलनी पड़ी। उन्होंने सीबीआई से आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष और कोलकाता पुलिस आयुक्त विनीत गोयल से पूछताछ करने के लिए भी कहा था।

इस बीच, उनके सहकर्मी जवाहर सरकार ने भ्रष्ट चिकित्सकों के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा कार्रवाई न किए जाने पर निराशा जताते हुए राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने और राजनीति छोड़ने की घोषणा की। राजनीतिक विश्लेषक बिस्वनाथ चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘आरजी कर घटना ने नागरिक समाज आंदोलनों की शक्ति को फिर से सामने ला दिया है जो तृणमूल के पिछले 13 साल के शासन में नदारद थे।

इसके अलावा, इस स्वत? स्फूर्त जन आंदोलन का नेतृत्व करने में भाजपा और माकपा की विफलता से पता चला है कि लोग तृणमूल को चुनौती देने के लिए एक नयी राजनीतिक ताकत के लिए तरस रहे हैं।’’ ‘रीक्लेम द नाइट’ पहल शुरू करने वाली रिमझिम सिन्हा ने इस आंदोलन के भविष्य के बारे में बोलते हुए इसे महिलाओं की आजादी के लिए एक नयी लड़ाई बताया।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं राजनीति के बारे में बात करना नहीं चाहती लेकिन तथ्य यह है कि सभी राजनीतिक दल महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ने में नाकाम रहे हैं। अगर राजनीतिक दल हमारे अधिकारों के लिए लड़ने को लेकर गंभीर नहीं है तो हम खुद यह लड़ाई लड़ेंगे।’’

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