
बेंगलुरु. कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे ने सोमवार को आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ”दुनिया का सबसे गुप्त संगठन” है, जिसने खुद को पंजीकृत नहीं कराया है, लेकिन फिर भी उसे सैकड़ों करोड़ रुपये का धन मिलता है. खरगे ने हाल ही में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को पत्र लिखकर पूरे राज्य के सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक परिसरों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सभी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी और कहा था कि इस तरह की गतिविधियां भारत की एकता और संविधान की भावना के विपरीत हैं.
मंत्री ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”यह दुनिया का सबसे गोपनीय संगठन है. इतनी गोपनीयता क्यों. ये लोग कौन हैं. आरएसएस प्रमुख के संबोधन का सीधा प्रसारण क्यों होना चाहिए? उनका योगदान क्या है? वे मुझे अपने 100 साल के इतिहास में अपने दस योगदान बताएं.” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आरएसएस की ‘कठपुतली’ है.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे एवं राज्य के मंत्री प्रियंक खरगे ने कहा, ”अगर आप आरएसएस को हटा दें, तो भाजपा नहीं रहेगी. आरएसएस के बिना यह शून्य है. धर्म के बिना आरएसएस शून्य है.” खरगे ने कहा कि वह हिंदुओं या हिंदू धर्म के खिलाफ नहीं हैं और उनका विरोध केवल आरएसएस और उसकी विचारधारा से है. उन्होंने दावा किया, ”मैं आरएसएस के खिलाफ हूं. इसकी विचारधारा में समानता नहीं है, यह हमारे संविधान को स्वीकार नहीं करती और मनुस्मृति पर जोर देती है.”
उन्होंने सवाल किया कि आरएसएस को लाठी लेकर मार्च करने की अनुमति क्यों है. मंत्री ने कहा, ”उन्हें लाठी लेकर मार्च करने की अनुमति क्यों है? क्या वे विशेष हैं? अगर वे एक एनजीओ हैं, तो मुझे उसकी पंजीकृत प्रति दिखाएं. उन्हें कैसे वित्त पोषण मिलता है? उनके वित्तपोषण की क्या व्यवस्था है? वे 300 करोड़ रुपये से 400 करोड़ रुपये कैसे कमा रहे हैं.” उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन संघ नेताओं के यह वादा करने के बाद कि वे सरकार की नीति का पालन करेंगे, पटेल ने इसे वापस ले लिया था.
खरगे ने आरएसएस के राष्ट्रवाद पर भी सवाल उठाते हुए कहा, ”जिस संगठन ने कई दशकों तक तिरंगा नहीं फहराया और भारतीय संविधान को मानने से इनकार किया, उसे देशभक्त कैसे कहा जा सकता है.” उन्होंने कहा कि अगर वे अपने संगठन को एनजीओ के रूप में पंजीकृत करने से इनकार कर रहे हैं, तो वे देशभक्त कैसे हैं? उन्होंने यह भी सवाल किया कि आरएसएस प्रमुख “मोहन भागवत को इतनी सुरक्षा की आवश्यकता क्यों है.” इससे पहले, चार अक्टूबर को मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को लिखे एक पत्र में, खरगे ने आरोप लगाया था कि आरएसएस सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के साथ-साथ सार्वजनिक स्थानों पर भी अपनी शाखाएं चला रहा है, जहां “नारे लगाए जाते हैं और बच्चों व युवाओं के मन में नकारात्मक विचार भरे जाते हैं.”
खरगे ने कहा कि आरएसएस की मान्यताएं “भारत की एकता और धर्मनिरपेक्ष ढांचे के आदर्शों के विपरीत हैं.” मंत्री ने लिखा, ”जब लोगों में नफरत फैलाने वाली विभाजनकारी ताकतें अपना सिर उठाती हैं, तो हमारा संविधान, जो अखंडता, समानता और एकता के मूल सिद्धांतों पर आधारित है, हमें ऐसे तत्वों पर अंकुश लगाने और राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को बनाए रखने का अधिकार देता है.” उन्होंने आरोप लगाया कि ”पुलिस की अनुमति लिये बिना, लाठी-डंडे लेकर आक्रामक प्रदर्शन किए जा रहे हैं,” जिसका, उन्होंने दावा किया, ”बच्चों और युवाओं पर हानिकारक मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ सकता है.”



