
मुंबई. शिवसेना (उद्धव बाला साहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने 20 वर्षों की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता खत्म करते हुए 15 जनवरी को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव से पहले बुधवार को अपनी पार्टियों के गठबंधन की घोषणा की. चचेरे भाइयों ने वर्ली के एक होटल में 16 मिनट तक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया. वर्ली उद्धव के बेटे आदित्य ठाकरे का विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र है.
इस पुर्निमलन को दोनों ने “महाराष्ट्र के प्रति कर्तव्य” करार दिया और सत्तारूढ़ महायुति का सामना करने के लिए विशेष रूप से ‘मराठी मानुष’ (मूल निवासी) वोट बैंक को सुदृढ़ करने पर जोर दिया . राज ठाकरे ने कहा, “मुंबई का महापौर मराठी होगा और वह हमारा अपना होगा.” इसे दोनों गुटों की ओर से महानगरपालिका पर शासन के लिए संयुक्त प्रयास का संकेत माना जा रहा है. बीएमसी पर 25 वर्ष तक अविभाजित शिवसेना का शासन रहा था.
उद्धव ने कहा कि दोनों पार्टियों ने नासिक नगर निगम के लिए सीटों के बंटवारे को अंतिम रूप दे दिया है जहां 15 जनवरी को चुनाव होने हैं. इसके साथ ही मुंबई और राज्य के 27 अन्य नगर निगमों में भी चुनाव होने हैं. हालांकि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने इस शिवसेना(उबाठा)-मनसे गठबंधन को उनके “राजनीतिक अस्तित्व” को बचाने के लिए एक हताश प्रयास करार दिया, क्योंकि हाल के राज्य और स्थानीय निकाय चुनावों में दोनों पार्टियों का प्रदर्शन कमजोर रहा था.
राज्य में हाल ही में 288 नगर परिषदों में से 207 पर जीत हासिल करने वाले महायुति के प्रमुख नेता फडणवीस ने गठबंधन की घोषणा के बाद कहा, “टीवी न्यूज चैनल तो ऐसे दिखा रहे थे जैसे रूस-यूक्रेन के बीच गठबंधन हो गया हो.” फडणवीस ने कहा, “उनका ट्रैक रिकॉर्ड केवल भ्रष्टाचार और स्वार्थ का रहा है. उनका गठबंधन सिर्फ केवल अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए और इससे कोई महत्वपूर्ण राजनीतिक फर्क नहीं पड़ेगा.
उन्होंने कहा, “उद्धव ठाकरे को नगर निकाय पर 25 साल के कुशासन के बारे में जवाब देना होगा. पुराने पापों को मिटाया नहीं जा सकता. ” साल 2005 में राज ठाकरे ने शिवसेना से अपने रास्ते अलग कर लिए थे, जिसकी स्थापना उनके चाचा बाल ठाकरे ने की थी. राज ने यह स्पष्ट होने के बाद अलग होने का फैसला लिया था कि बाल ठाकरे ने पार्टी का नेतृत्व करने के लिए अपने बेटे का समर्थन किया है. राज ठाकरे ने उस समय कहा था कि उनके चाचा उनके लिए भगवान के समान हैं, लेकिन वह बाल ठाकरे को घेरे रखने वाली मंडली के साथ काम नहीं कर सकते.
बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में उद्धव ने 1950 के दशक में संपन्न संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन में ठाकरे परिवार की भूमिका का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि ठाकरे परिवार ने महाराष्ट्र को राज्य और मुंबई को इसकी राजधानी बनाने की मांग की थी.उद्धव ने कहा कि समाज सुधारक और लेखक रहे उनके दादा ैप्रबोधनकर’ ठाकरे इस आंदोलन के प्रमुख व्यक्तियों में शुमार थे. उद्धव ने कहा कि उनके पिता बाल ठाकरे और चाचा श्रीकांत (राज ठाकरे के पिता) ने भी यह सुनिश्चित करने में भूमिका निभाई कि मुंबई राज्य का हिस्सा बने.
हालांकि, बीएमसी चुनावों के लिए सीटों के बंटवारे को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है जिससे यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि शिवसेना (उबाठा) और मनसे कुछ वार्डों को लेकर निर्णय नहीं कर पाए हैं. इससे पहले राज और उद्धव ने शिवाजी पार्क में बाल ठाकरे की समाधि पर श्रद्धांजलि दी. फिर दोनों राज की गाड़ी में एक साथ संवाददाता सम्मेलन स्थल पहुंचे. परिवारिक सौहार्द संवाददाता सम्मेलन में भरपूर दिखा. इस दौरान उद्धव की पत्नी रश्मि और पुत्र आदित्य तथा राज की पत्नी र्शिमला और पुत्र अमित भी मौजूद थे.
पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव में शिवसेना (उबाठा) ने महा विकास आघाडी (एमवीए) के हिस्से के तौर पर 94 सीट पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 20 पर उसे जीत मिली थी जबकि अलग से 125 सीट पर चुनाव लड़ने वाली मनसे को कोई सफलता नहीं मिली थी.
निराशाजनक प्रदर्शन के बाद दोनों दल पहली से पांचवीं कक्षा में हिंदी पढ़ाने के राज्य सरकार के फैसले के विरोध में इस साल जुलाई में साथ आए.
इस बीच मुख्यमंत्री फडणवीस ने दोनों दलों के बीच हुए गठबंधन को ज्यादा तवज्जो न देते हुए कहा कि इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा और “मुंबई हमारी सरकार के साथ खड़ी रहेगी.” फडणवीस ने कहा, “ठाकरे मराठी लोगों और मुंबई के अकेले प्रतिनिधि नहीं हैं.” फडणवीस ने 2019 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को छोड़कर कांग्रेस और राकांपा से हाथ मिलाने वाले शिवसेना (उबाठा) के प्रमुख उद्धव पर निशाना साधते हुए कहा, “उद्धव ठाकरे को नगर निकाय पर 25 साल के कुशासन के बारे में जवाब देना होगा. पुराने पापों को मिटाया नहीं जा सकता. मैं जन्म से ही हिंदुत्ववादी हूं और इसी रूप में मरूंगा. मैं वह नहीं हूं जो वोटों के लिए केसरिया चोला पहनकर राजनीतिक रुख बदलता है.”
भाजपा नेता और महाराष्ट्र के मंत्री आशीष शेलार ने कहा कि मराठी मतदाता यह पूछ रहे हैं कि उद्धव और राज ठाकरे पहले क्यों अलग हुए. उन्होंने राज को उद्धव के खिलाफ किए गए उनके पुराने तंज. की याद दिलाई. साल 2022 में उद्धव के खिलाफ बगावत कर शिवसेना को विभाजित करने वाले उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि ठाकरे बंधु केवल सत्ता के लिए एकजुट हुए हैं और मुंबई के विकास के लिए उनके पास कोई कार्यक्रम नहीं है. दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, ” राजघराने के दो लोग एक साथ आए हैं. उन्होंने हार के डर से अपने-अपने दलों के बीच गठबंधन किया है. मुंबई के लोग राजग-भाजपा के तहत विकास चुनना चाहते हैं.” भाषा जोहेब नरेश



