
कोलकाता. पश्चिम बंगाल पुलिस ने मंगलवार को राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के चार छात्र कार्यकर्ताओं के ”लापता” होने के दावे का खंडन किया है. पुलिस ने कहा कि उन्हें हत्या की साजिश के साथ-साथ हत्या के प्रयास में कथित रूप से शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया गया था.
पुलिस ने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि ”लापता” होने का आरोप झूठा है. पुलिस ने दावा किया कि मंगलवार को ‘नबान्न अभिजन’ के दौरान चारों कथित तौर पर ”बड़े पैमाने पर हिंसा फैलाने” की योजना बना रहे थे. इससे पहले दिन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता ने आरोप लगाया था कि उनकी पार्टी के चार छात्र कार्यकर्ता आधी रात से लापता हैं. छात्र कार्यकर्ता हावड़ा पहुंचने वाले थे.
बंगाल पुलिस ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, ”एक राजनीतिक नेता उन चार छात्रों के बारे में झूठी कहानी बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो कल रात से लापता प्रतीत होते हैं. सच्चाई यह है कि कोई भी लापता नहीं है. चारों आज ‘नबान्न अभियान’ के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा की योजना बना रहे थे और हत्या एवं हत्या के प्रयास की साजिश में शामिल थे. उन्हें सार्वजनिक सुरक्षा और सुरक्षा के हित में गिरफ्तार किया गया है तथा उनके परिवारों को सूचित कर दिया गया है.” हावड़ा के पुलिस आयुक्त प्रवीण कुमार त्रिपाठी ने मीडिया से कहा कि चारों को ‘पुलिस की निवारक कार्रवाई’ के तहत भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) धारा 172 के तहत गिरफ्तार किया गया क्योंकि वे एक साजिश में शामिल थे.
शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ”हावड़ा स्टेशन पर पहुंचने वाले स्वयंसेवकों को भोजन वितरित करने वाले छात्र कार्यकर्ता आधी रात के बाद अचानक लापता हो गए. न तो उनका पता लगाया जा सका है और न ही वह अपने फोन का जवाब दे रहे हैं. हमें आशंका है कि उन्हें ममता पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया है अथवा हिरासत में लिया है.” अधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि ”अगर उन्हें कुछ हुआ तो ममता पुलिस को जवाबदेह ठहराया जाएगा.”
भाजपा नेता ने बाद में कहा, ”पुलिस ने परिवार को सूचित नहीं किया था. परिवार कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर चुका है और वकील मुख्य रूप से कोलकाता पुलिस आयुक्त विनीत गोयल, हावड़ा के पुलिस आयुक्त प्रवीण त्रिपाठी के खिलाफ मामला दायर करेंगे….” अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए तीन से चार करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जबकि रैली का आयोजन किसी राजनीतिक दल ने नहीं किया था.



