SIR भाजपा-नीत केंद्र सरकार के दिमाग की है उपज: ममता बनर्जी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 05 Aug 2025 08:12 PM
SIR भाजपा-नीत केंद्र सरकार के दिमाग की है उपज: ममता बनर्जी
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कोलकाता/कामारपुकुर. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि बिहार में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) निर्वाचन आयोग की मिलीभगत से भाजपा-नीत केंद्र सरकार के दिमाग की उपज है. पश्चिम मेदिनीपुर जिले के बाढ़ प्रभावित घाटल के दौरे पर आईं बनर्जी ने यह भी कहा कि बांग्ला भाषी भारतीय नागरिकों को बांग्लादेशी बताकर पड़ोसी देश भेजा जा रहा है.

उन्होंने कहा, ”यह (एसआईआर) योजना केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई है, जिसमें निर्वाचन आयोग को भी शामिल किया गया है. हम इससे सहमत नहीं हैं.” उन्होंने तर्क दिया कि इस प्रक्रिया के लिए माता-पिता के जन्म प्रमाण-पत्र सुरक्षित रखना सभी के लिए संभव नहीं है. मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पश्चिम बंगाल में एसआईआर लागू करने के किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं करेंगी. राज्य में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं.

बनर्जी ने दावा किया, ”यदि राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण लागू किया जाता है, तो सभी धर्मों के लोगों को नुकसान होगा.” विपक्षी दल संसद के दोनों सदनों में एसआईआर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि निर्वाचन आयोग की इस कवायद का उद्देश्य बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले ‘मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करना’ है.

बनर्जी ने दोहराया कि पश्चिम बंगाल के प्रवासी कामगारों को ‘अपनी मातृभाषा के कारण’ कुछ राज्यों में उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है. मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि चूंकि उन्होंने इस तरह के कृत्यों का विरोध किया है, इसलिए कुछ हलकों में यह मांग उठ रही है कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत गिरफ्तार किया जाए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर एनआरसी लागू करने की कोशिशें चल रही हैं.

किसी को भी बांग्ला भाषा से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए : ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि किसी को भी बांग्ला भाषा के साथ खिलवाड़ करने या उसका अपमान करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. उन्होंने यह सवाल किया कि क्या पश्चिम बंगाल के बिना भारत हो सकता है. ममता बनर्जी ने बंगाली साहित्यकार एवं राष्ट्रगान के रचयिता रवींद्रनाथ टैगोर और राष्ट्र गीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का उल्लेख किया.

उन्होंने कहा, ”किसी को भी हमारी भाषा के साथ खिलवाड़ या उसका अपमान करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.” मुख्यमंत्री ने सवाल किया, ”क्या बांग्ला के बिना भारत हो सकता है?” मुख्यमंत्री ने रामकृष्ण परमहंस की शिक्षाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने सभी को सद्भावना से रहने की शिक्षा दी.

बनर्जी ने हुगली जिले के कामारपुकुर में रामकृष्ण मठ एवं मिशन के अतिथि गृह की आधारशिला रखने के बाद लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ”मैं रामकृष्ण परमहंस की सभी धर्मों के बीच सद्भाव की शिक्षा में विश्वास करती हूं.” उन्होंने कहा, ”हमारे बीच कोई विभाजन नहीं है, हमने रामकृष्ण परमहंस से सभी के साथ मिलकर रहना सीखा है.” राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख बनर्ती ने स्वामी विवेकानंद की सीख ‘एकता में शक्ति है’का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी मातृभाषा बांग्ला है, ठीक वैसे ही जैसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस या राजा राममोहन राय की थी.

उन्होंने कहा, ” सभी लोगों और अन्य लोगों के साथ प्रेम और सम्मान का व्यवहार ही धर्म है.” बनर्जी ने सभी से रामकृष्ण परमहंस की ‘कथामृत’ पढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि लोग पानी को अलग-अलग नामों से पुकारते हैं, लेकिन यह एक ही है. उन्होंने पश्चिम मेदिनीपुर जिले के बाढ़ प्रभावित घाटल का दौरा करने से पहले कहा, ”इसी तरह, मां को अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है, लेकिन वह एक ही हैं.” मुख्यमंत्री ने इस मौके पर जयरामबती-कामारपुकुर विकास बोर्ड के गठन की भी घोषणा की, जिसके अध्यक्ष कामारपुकुर स्थित रामकृष्ण मठ के सचिव स्वामी लोकोत्तरानंद होंगे.

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