शिवसेना में विभाजन: अयोग्यता याचिकाओं पर 10 जनवरी को फैसला सुनाएंगे विस अध्यक्ष-अधिकारी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 08 Jan 2024 07:18 PM
शिवसेना में विभाजन: अयोग्यता याचिकाओं पर 10 जनवरी को फैसला सुनाएंगे विस अध्यक्ष-अधिकारी
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मुंबई. महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और कई अन्य विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर अपना फैसला 10 जनवरी को सुनाएंगे. शिंदे के नेतृत्व में विधायकों की बगावत के चलते जून 2022 में शिवसेना विभाजित हो गई थी. यह जानकारी विधान भवन के अधिकारियों ने सोमवार को दी.

उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुनाने की समय-सीमा 31 दिसंबर, 2023 तय की थी, लेकिन उससे कुछ दिन पहले 15 दिसंबर को शीर्ष अदालत ने अवधि को 10 दिन बढ़ाकर फैसला सुनाने के लिए 10 जनवरी की नयी तारीख तय की. जून 2022 में, शिंदे और कई अन्य विधायकों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ विद्रोह कर दिया था, जिसके कारण शिवसेना में विभाजन हो गया और महा विकास आघाड़ी सरकार गिर गई थी. महा विकास आघाडी में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस भी शामिल थी.

शिंदे और ठाकरे गुटों द्वारा दलबदल रोधी कानूनों के तहत एक दूसरे के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की गईं.
विधान भवन के अधिकारियों ने कहा, ”फैसला 10 जनवरी को शाम 4 बजे के बाद आने की उम्मीद है. विधानसभा अध्यक्ष का कार्यालय फैसले को अंतिम रूप दे रहा है.” उन्होंने कहा, ”फैसले का महत्वपूर्ण हिस्सा उस दिन सुनाए जाने की संभावना है, जबकि विस्तृत आदेश बाद में दोनों समूहों को दिया जाएगा.” दोनों गुटों के पदाधिकारियों ने कहा कि विधानसभाध्यक्ष के प्रतिकूल फैसले की स्थिति में वे उच्चतम न्यायालय का रुख करेंगे.

जून 2022 में विद्रोह के बाद शिंदे भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से मुख्यमंत्री बने थे. पिछले साल जुलाई में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का अजित पवार गुट उनकी सरकार में शामिल हो गया था. निर्वाचन आयोग ने शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को ‘शिवसेना’ नाम और ‘तीर धनुष’ चुनाव चिह्न दिया, जबकि ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट को शिवसेना (यूबीटी) नाम और चुनाव चिह्न ‘जलती हुई मशाल’ दिया गया.

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