न्यायालय ने नोटबंदी की प्रक्रिया पर फैसला सुनाया, परिणाम और प्रभाव पर नहीं: कांग्रेस

नोटबंदी पर उच्चतम न्यायालय ने सरकार को हल्की फटकार लगाई है: चिदंबरम

नयी दिल्ली. कांग्रेस ने नोटबंदी पर आए उच्चतम न्यायालय के बहुमत के एक फैसले को लेकर सोमवार को कहा कि यह निर्णय सिर्फ नोटबंदी की प्रक्रिया पर है, इसके परिणाम एवं प्रभाव पर नहीं है तथा ऐसे में यह कहना गलत है कि सर्वोच्च अदालत ने मोदी सरकार के कदम को जायज ठहराया है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि नोटबंदी जैसे ‘विनाशकारी’ कदम के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देश से माफी मांगनी चाहिए.

उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने केंद्र सरकार के 2016 में 500 और 1000 रुपये की श्रृंखला वाले नोटों को बंद करने के फैसले को सोमवार को 4:1 के बहुमत के साथ सही ठहराया. पीठ ने बहुमत से लिए गए फैसले में कहा कि नोटबंदी की निर्णय प्रक्रिया दोषपूर्ण नहीं थी . हालांकि न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना ने सरकार के फैसले पर कई सवाल उठाए. न्यायमूर्ति एस. ए. नजÞीर की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि आर्थिक मामले में संयम बरतने की जरूरत होती है और अदालत सरकार के फैसले की न्यायिक समीक्षा नहीं कर सकती.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश ने एक बयान में कहा, ‘‘उच्चतम न्­यायालय ने केवल इस संदर्भ में अपना निर्णय दिया है कि क्­या आठ नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा से पूर्व रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 26(2) की समुचित अनुपालना की गई थी या नहीं. एक माननीय न्­यायाधीश ने अपनी अ­स­हमति दर्ज करते हुए कहा है कि संसद को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए था.’’

उनका यह भी कहना है, ‘‘इस निर्णय में नोटबंदी के असर पर कोई टिप्­पणी नहीं की गई है, जो कि एक नितांत विनाशकारी निर्णय था. इस निर्णय ने विकास की गति को क्षति पहुंचाई, सूक्ष्­म, लघु और मझौले स्­तर की इकाईयों को पंगु बनाया, अनौपचारिक क्षेत्र को समाप्­त कर दिया और लाखों लोगों की अजीविका को नष्­ट कर­ दिया.’’

रमेश ने दावा किया, ‘‘निर्णय में इस संबंध में कुछ नहीं कहा गया है कि क्­या नोटबंदी अपने घोषित उद्देश्­यों को प्राप्­त करने में सफल रही या नहीं. चलन में मुद्रा को कम करना, कैशलेस अर्थव्­यवस्­था की ओर आगे बढ़ना, नकली मुद्रा पर अंकुश लगाना, आतंकवाद को समाप्­त करना और काले धन का पर्दाफाश करना जैसे घोषित उद्देश्­यों में से किसी उद्देश्­य को प्राप्­त करने में कोई भी उल्­लेखनीय उपलब्धि हासिल नहीं की जा सकी.’’

उनके मुताबिक, उच्चतम न्­यायालय द्वारा बहुमत से लिया गया ‘‘यह फैसला केवल निर्णय लेने की प्रक्रिया के मुद्दे तक सीमित है और नोटबंदी के परिणामों से इसका कोई संबंध नहीं है. यह कहना कि माननीय सर्वोच्­च न्यायालय ने नोटबंदी के निर्णय को सही ठहराया है, पूरी तरह से भ्रामक और गलत है.’’ पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा कि उच्चतम न्यालय के बहुमत के फैसले में इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं मिला कि क्या नोटबंदी का उद्देश्य पूरा हुआ.

उन्होंने यह दावा भी किया कि ‘अल्पमत‘ के फैसले ने नोटबंदी में ‘अवैधता’ और ‘अनियमितताओं’ की ओर इशारा किया है. चिदंबरम ने कहा कि अपने फैसले में न्यायालय ने सरकार को हल्की फटकार लगाई है. कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने नोटबंदी पर उच्चतम न्यायालय के फैसले को निराशजनक करार दिया और दावा किया कि इस भयावह विफलता के लिए सरकार को जवादेह ठहराने में शीर्ष अदालत विफल रही.

कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा, ‘‘नोटबंदी को लेकर उच्चतम न्यालय का फैसला आया है. यह नोटबंदी की प्रक्रिया पर फैसला है, इसके परिणाम और प्रभाव पर नहीं है. भाजपा झूठ फैला रही है कि नोटबंदी के फैसले पर उच्चतम न्यायालय ने मुहर लगाई है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘नोटबंदी के कारण लाखों नौकरियां खत्म हो गईं, एमएसएमई बर्बाद हो गईं, आतंकवाद जस का तस बना हुआ है, काला धन बरकरार है.’’ खेड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री को नोटबंदी पर एक संवाददाता सम्मेलन करना चाहिए.

नोटबंदी पर उच्चतम न्यायालय ने सरकार को हल्की फटकार लगाई है: चिदंबरम

पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने सोमवार को कहा कि उच्चतम न्यालय के बहुमत के फैसले में इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं मिला कि क्या नोटबंदी के उद्देश्य पूरा हुए. उन्होंने यह दावा भी किया कहा कि ‘अल्पमत‘ के फैसले ने नोटबंदी में ‘अवैधता’ और ‘अनियमितताओं’ की ओर इशारा किया है. चिदंबरम ने कहा कि अपने फैसले में न्यायालय ने सरकार को हल्की फटकार लगाई है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ट्वीट किया, ‘‘उच्चतम न्यायालय जब एक बार किसी कानून को स्वीकृति दे दी तो हम उसे स्वीकार करने के लिए बाध्य है. बहरहाल, यह उल्लेख करना जरूरी है कि बहुमत के फैसले ने (नोटबंदी के) निर्णय के विवेक को सही नहीं ठहराया है और न ही बहुमत का फैसला इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि जिन उद्देश्यों की बात की गई थी वो पूरा हो गए.’’

उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने केंद्र सरकार के 2016 में 500 और 1000 रुपये की श्रृंखला वाले नोटों को बंद करने के फैसले को सोमवार को 4:1 के बहुमत के साथ सही ठहराया. पीठ ने बहुमत से लिए गए फैसले में कहा कि नोटबंदी की निर्णय प्रक्रिया दोषपूर्ण नहीं थी . हालांकि न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना ने सरकार के फैसले पर कई सवाल उठाए. न्यायमूर्ति एस. ए. नजÞीर की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि आर्थिक मामले में संयम बरतने की जरूरत होती है और अदालत सरकार के फैसले की न्यायिक समीक्षा नहीं कर सकती.

 

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