तमिलनाडु : अभिनेता-नेता विजय ने करूर भगदड़ के पीड़ित परिवारों से बात की

चेन्नई. अभिनेता-नेता विजय ने व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल के माध्यम से करूर भगदड़ के पीड़ितों के परिवारों से संपर्क शुरू किया और उन्हें सहायता का आश्वासन दिया. एक पीड़ित परिवार ने बताया कि तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) पार्टी के प्रमुख ने छह अक्टूबर की शाम को वीडियो कॉल की थी. पीड़ित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिलने नहीं जाने के कारण विजय को कुछ वर्गों की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा.

पीड़ित परिवार के एक सदस्य ने करूर में पत्रकारों को बताया, ”उन्होंने मेरे दामाद को फोन किया और संवेदनाएं जतायीं. उन्होंने इस घटना पर खेद व्यक्त किया और कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए था. साथ ही उन्होंने परिवार को अपनी सहायता का आश्वासन भी दिया.” एक अन्य परिवार से बात करते हुए विजय ने एक महिला को सांत्वना देते हुए कहा, ”मैं आपके बेटे जैसा हूं.” टीवीके के एक सूत्र ने बताया कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि विजय करूर जाएंगे या नहीं. उन्होंने कहा, ”लेकिन उन्होंने पार्टी सदस्यों से पीड़ित परिवारों से संपर्क करने को कहा है.” टीवीके ने अभी तक विजय के व्हाट्सएप वीडियो कॉल के संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन कम से कम तीन परिवारों ने पुष्टि की है कि छह अक्टूबर की रात से उनकी सहानुभूतिपूर्ण बातचीत आज भी जारी रही.

विजय ने जिस युवती से बात की, वह उस पीड़ित की बहन थी जो 27 सितंबर को वेलुसामीपुरम में टीवीके प्रमुख की रैली में मची भगदड़ में मारे गए 41 लोगों में शामिल था. युवती ने कहा कि वह इस घटना के लिए अभिनेता को दोषी नहीं ठहरा सकती. उन्होंने करूर में मीडिया को बताया, “मेरा भाई विजय से मिलने गया था, और वह वापस नहीं लौटा. ब­ढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अधिकारी और पुलिस बल तैनात कर सकते थे,” युवती ने कहा, “उन्होंने (विजय) मुझे सांत्वना दी. उन्होंने कहा कि वह मेरे लिए भाई जैसा हैं.

विजय ने कहा कि वह अदालती मामले के कारण नहीं आ सकते और अधिकारियों से अनुमति मिलने के बाद ही हमसे मिलने आएंगे.” टीवीके की पांच सदस्यीय टीम शोक संतप्त परिवारों के घर गई और उनकी विजय से बातचीत का इंतजाम किया. प्रभावित परिवारों से संपर्क करने के विजय के प्रयासों को लेकर एक सवाल पर, तमिलनाडु के जल संसाधन मंत्री दुरईमुरुगन ने कहा, “अगर विजय (भगदड़ में मौतों के लिए) दोषी नहीं हैं, तो उन्हें शोक संतप्त परिवारों को संवेदना व्यक्त करने के लिए व्यक्तिगत रूप से जाना चाहिए था. लेकिन वह बाहर निकलने से डरते हैं.”

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