
खड़गपुर. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को जोर देकर कहा कि प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल समाज में मतभेद बढ़ाने के बजाय सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देने के लिए होना चाहिए. राष्ट्रपति मुर्मू ने सोमवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)खड़गपुर के 69वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि हर किसी को प्रौद्योगिकी तक पहुंच का अधिकार होना चाहिए और इसका उपयोग मतभेदों को बढ़ाने के बजाय सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देने के लिए किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, ”हमारा मानना है कि हर किसी को प्रौद्योगिकी तक पहुंच का अधिकार होना चाहिए. हमारा मानना है कि प्रौद्योगिकी का उपयोग समाज में असमानताओं को बढ़ाने के बजाय सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देने के लिए होना चाहिए.” राष्ट्रपति ने डिजिटल भुगतान प्रणाली का उदाहरण देते हुए कहा कि कैसे प्रौद्योगिकी ने जीवन को सरल बना दिया है, यहां तक कि छोटे व्यापारियों को भी इससे लाभ हुआ है.
उन्होंने कहा कि आईआईटी की वैश्विक प्रतिष्ठा है. राष्ट्रपति ने कहा, ”आईआईटी को प्रतिभाओं और प्रौद्योगिकी का ‘इन्क्यूबेशन सेंटर’ माना जाता है. खड़गपुर स्थित आईआईटी को देश का पहला ऐसा संस्थान होने का गौरव प्राप्त है. इस संस्थान ने अपनी 73 साल की यात्रा में महान प्रतिभाओं को पोषित किया है और देश के विकास में इसका योगदान अतुलनीय है.” राष्ट्रपति इस बात पर खुशी जताई कि भारत सरकार की आईआईटी के अंतरराष्ट्रीयकरण और वैश्वीकरण करने की नीति के अनुरूप, आईआईटी खड़गपुर अन्य वैश्विक संस्थानों के साथ गठबंधन और सहयोग पर काम कर रहा है.
उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल आईआईटी खड़गपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में मदद करेगा, बल्कि भारतीय शिक्षा प्रणाली को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम होगा. इस संदर्भ में राष्ट्रपति ने ध्यान दिलाया कि दुनिया की सबसे पुरानी ज्ञान परंपरा वाले इतने विशाल देश का एक भी शैक्षणिक संस्थान दुनिया के शीर्ष 50 शैक्षणिक संस्थानों में शामिल नहीं है.
राष्ट्रपति ने कहा कि आज भारत नयी ऊंचाइयों को छू रहा है, नए मानक स्थापित कर रहा है और एक प्रमुख विश्व शक्ति के रूप में उभर रहा है. उन्होंने कहा, ”हम वसुधैव कुटुंबकम की भावना से दुनिया के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए तत्पर हैं. भारत के इस अमृत काल में प्रौद्योगिकी से ही स्वर्ण युग आएगा.”
राष्ट्रपति ने कहा, ”कम्प्यूटरीकरण, सौर ऊर्जा, जीनोम अध्ययन और लार्ज लैंग्वेज मॉडल ऐसे कुछ प्रयोग हैं जो सामाजिक जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं. 150 साल पहले जो बीमारियां असाध्य लगती थीं, उनका अब लगभग मुफ्त में इलाज किया जाता है. इस दुनिया को बेहतर और समावेशी बनाने में प्रौद्योगिकी की अहम भूमिका है.”
संस्थान में सोमवार को जिन विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई, उनमें 21 प्रतिशत छात्राएं हैं. इसे रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, ” और अधिक छात्राओं को विज्ञान और प्रौद्योगिकी की पढ़ाई के लिए आगे आना चाहिए.” संस्थान के निदेशक वी.के. तिवारी ने कहा कि 2030 तक आईआईटी खड़गपुर दुनिया के शीर्ष 10 संस्थानों में शामिल होगा. उन्होंने बताया कि दीक्षांत समारोह के दौरान करीब 3,200 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई.
इस साल संस्थान ने गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई (उनकी अनुपस्थिति में), प्रतिष्ठित संस्कृत विद्वान महामहोपाध्याय भद्रेशदास स्वामी, इले्ट्रिरकल इंजीनियरिंग उद्यमी रवींद्र नाथ खन्ना और उद्यमी अजित जैन को डीएससी की मानद उपाधि प्रदान की.
संस्थान ने रामचंद्र प्रभाकर गोकम को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया.



