मुंबई. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा है कि पार्टी में पिछले विद्रोहों के विपरीत, इस बार बगावत का उद्देश्य शिवसेना को खत्म करना है. ठाकरे ने रविवार को दक्षिण मुंबई में एक वार्ड स्तरीय पार्टी कार्यालय का उद्घाटन करने के बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दावा किया कि शिवसेना हिंदुत्व के लिए राजनीति में है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने राजनीतिक हितों के लिए हिंदुत्व का इस्तेमाल करती है.
पिछले महीने, शिवसेना विधायक एकनाथ ंिशदे और 39 अन्य विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह किया था, जिससे ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार गिर गई. 30 जून को ंिशदे ने मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी.
ठाकरे ने कहा, ‘‘पहले के विद्रोहों के विपरीत, यह बगावत शिवसेना को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए है. उन्होंने हमारा मुकाबला करने के लिए पेशेवर एजेंसियों को लगा रखा है. यह धन और निष्ठा के बीच की लड़ाई है.’’ ठाकरे 27 जुलाई को 62 वर्ष के हो जाएंगे. उन्होंने कहा कि इस बार उन्हें अपने जन्मदिन पर गुलदस्ता नहीं चाहिए, लेकिन शिवसेना कार्यकर्ताओं से हलफनामा चाहिए कि वे पार्टी पर भरोसा करते हैं और अधिक से अधिक लोगों को पार्टी के सदस्य के रूप में जोड़ेंगे.
ठाकरे ने कहा, ‘‘लड़ाई अब भारत निर्वाचन आयोग के पास भी पहुंची है, जिसमें दोनों गुट मूल शिवसेना होने का दावा कर रहे हैं. हमें न केवल जोश की जरूरत है, बल्कि पार्टी के सदस्यों के रूप में लोगों के ठोस समर्थन और पंजीकरण की भी जरूरत है.’’ पूर्व मुख्यमंत्री ने बिना किसी का नाम लिए अपने चचेरे भाई और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे पर निशाना साधा, जिन्होंने कथित तौर पर कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो वह शिवसेना के 40 बागी विधायकों को अपनी पार्टी में विलय करने की अनुमति देने पर विचार करेंगे.
उद्धव ठाकरे ने कहा, ‘‘मुझे पता है कि इन लोगों के लिए एक प्रस्ताव दिया गया है. मुझे नहीं पता कि यह किस प्रकार का ‘केमिकल लोचा’ (असंतुलन) है, लेकिन इन लोगों को पता नहीं है कि उन्होंने किसके साथ खिलवाड़ किया है.’’ उन्होंने बागी विधायकों का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि आपको क्या कहकर बुलाऊं.’’ इस पर वहां मौजूद भीड़ ने नारा लगाया, ‘‘गद्दार’’ .
शिवसेना प्रमुख ने तब कहा, ‘‘यह उनके सिर पर ठप्पा है और वे जहां भी जाएंगे उन्हें इसे अपने साथ ले जाना होगा. उन्होंने इसे अपने कर्मों से अर्जित किया है. लोगों के प्रतिनिधि होने के बावजूद, वे केंद्र सरकार की सुरक्षा के साथ घूम रहे हैं.’’ उन्होंने कहा कि ‘‘शिवसेना ने आम लोगों को खास बना दिया’’ और इस इसी कारण इन 40 (बागी) विधायकों ने चुनाव जीता. उन्होंने कहा कि अब इसे शिवसेना कार्यकर्ताओं के नए समूह के साथ दोहराने का समय है.
सत्ता में रहने के दौरान उद्धव ठाकरे कितनी बार मुख्यमंत्री कार्यालय गए : शिंदे खेमा
शिवसेना के एकनाथ शिंदे धड़े ने सोमवार को पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे पर कटाक्ष करते हुए सवाल किया कि जब वह सत्ता में थे तो वह कितनी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के कार्यालय गए और क्या उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को समय दिया. एकनाथ शिंदे खेमे के प्रवक्ता दीपक केसरकर ने पिछले महीने ठाकरे नीत सरकार के गिरने के बाद शिवसेना अध्यक्ष द्वारा शुरू किए गए पार्टी के जनसंपर्क कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि ठाकरे परिवार की ‘‘सार्वजनिक उपस्थिति’’ अब बढ़ गई है.
एक दिन पहले, ठाकरे ने दक्षिण मुंबई में एक वार्ड-स्तरीय शिवसेना कार्यालय का उद्घाटन किया और पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. केसरकर ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने तीन सवाल उठाए हैं और हमें अभी तक जवाब नहीं मिला है. मुख्यमंत्री (नवंबर 2019-जून 2022) के रूप में उद्धव ठाकरे कितनी बार मंत्रालय में (मुख्यमंत्री कार्यालय) गए और शिवसेना कार्यकर्ताओं से मिले? अब, उनकी सार्वजनिक उपस्थिति बढ़ गई है.’’
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कोविड-19 महामारी के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय में उद्धव ठाकरे की ‘अनुपस्थिति’ की आलोचना की थी. शिवसेना के नेता एकनाथ शिंदे और 39 विधायकों की बगावत के कारण पिछले महीने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार गिर गई. शिंदे ने 30 जून को मुख्यमंत्री के रूप में तथा भाजपा के देवेंद्र फडणवीस ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी.
केसरकर ने शिवसेना के बागी सांसद राहुल शेवाले द्वारा किए गए दावों पर भी ठाकरे से जवाब मांगा. शेवाले ने कहा था 2021 में यह तय किया गया था कि शिवसेना पूर्व सहयोगी भाजपा के साथ हाथ मिलाएगी, जबकि वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और कांग्रेस के साथ गठबंधन में राज्य की सत्ता में बनी रही.
उन्होंने पूछा, ‘‘हमने ठाकरे से शिवसेना के बागी सांसद राहुल शेवाले द्वारा किए गए दावों के विवरण के बारे में भी पूछा है कि क्या भाजपा के साथ हाथ मिलाने पर 2021 में ही तय हो चुका था. अगर यह सच है तो 12 विधायकों को क्यों निलंबित किया गया और समझौता रद्द कर दिया गया.’’ पिछले साल महाराष्ट्र विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान भाजपा के 12 विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष के कक्ष में पीठासीन अधिकारी के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार करने के लिए एक साल के लिए निलंबित कर दिया गया था. बाद में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इन विधायकों का एक साल के लिए निलंबन प्रथम दृष्टया असंवैधानिक है.