GST : चार बड़े बदलाव की तैयारी, 5 करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी पर ही चलेगा आपराधिक केस? ये नियम भी बदलेंगे

Author: Navabharat News Group
UPDATED: Sun, 04 Oct 2026 08:43 PM
GST : चार बड़े बदलाव की तैयारी, 5 करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी पर ही चलेगा आपराधिक केस? ये नियम भी बदलेंगे

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जीएसटी व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। जीएसटी परिषद सात अक्तूबर को होने वाली बैठक में कर अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्तियां खत्म करने और गिरफ्तारी के लिए अदालत की मंजूरी अनिवार्य करने के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है। इसके साथ ही, कर चोरी से जुड़े अपराधों में आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है।

सरकार का जोर अब गिरफ्तारी के बजाय टैक्स वसूली, ब्याज और जुर्माने के जरिए कार्रवाई करने पर है। ये प्रस्ताव मंजूर होने पर जीएसटी के तहत कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई का तरीका बदल सकता है। जीएसटी परिषद के सामने केंद्रीय जीएसटी कानून की धारा 69 में बदलाव का प्रस्ताव है। अभी इस धारा के तहत तय शर्तें पूरी होने और निर्धारित अपराध होने का विश्वास करने के आधार पर आयुक्त किसी अधिकारी को गिरफ्तारी की अनुमति दे सकता है। प्रस्ताव के मुताबिक, यह शक्ति कर अधिकारियों से वापस ली जा सकती है। इसके बाद किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए अदालत की मंजूरी जरूरी होगी। हालांकि, इस प्रस्ताव पर परिषद की मुहर लगना बाकी है।

आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा कितनी बढ़ेगी?
अभी जीएसटी के बड़े अपराधों में एक करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट या गलत रिफंड के मामलों में आयुक्त स्तर के अधिकारी की मंजूरी के बाद गिरफ्तारी हो सकती है। प्रस्ताव में आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने की बात है। इसका मतलब यह नहीं है कि पांच करोड़ रुपये तक की कर चोरी माफ हो जाएगी। ऐसे मामलों में भी सरकार टैक्स वसूल सकती है और ब्याज तथा जुर्माना लगा सकती है। गंभीर धोखाधड़ी के मामलों में अदालत के जरिए आपराधिक कार्रवाई जारी रह सकती है।

किन मामलों में कारोबारियों को राहत मिल सकती है?
प्रस्ताव का उद्देश्य सामान्य कर विवादों को आपराधिक कार्रवाई से अलग रखना है। वस्तुओं के वर्गीकरण, उनकी कीमत तय करने या इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर कारोबारी और कर अधिकारी अलग-अलग राय रखते हैं। ऐसे विवादों में हर मामले को आपराधिक मुकदमे तक ले जाने के बजाय टैक्स वसूली और आर्थिक दंड पर जोर दिया जा सकता है। देर से रिटर्न दाखिल करने, कर भुगतान में देरी या कारोबार की नकदी स्थिति के कारण भुगतान अटकने जैसे मामलों में भी टैक्स, ब्याज और उचित जुर्माना चुकाकर राहत पाने का रास्ता आसान हो सकता है। हालांकि, यह प्रस्तावित बदलावों के लागू होने पर निर्भर करेगा।

जीएसटी कानून में कितने अपराधों से जुड़े प्रावधान बदल सकते हैं?
प्रस्ताव के मुताबिक, जीएसटी कानून में आपराधिक कार्रवाई से जुड़े 24 अपराधों के प्रावधानों को नरम करने, नौ अपराधों को पूरी तरह हटाने और 11 अपराधों को मौजूदा रूप में बनाए रखने पर विचार किया जा रहा है। न्यूनतम सजा का प्रावधान हटाने का प्रस्ताव भी है, ताकि अदालत हर मामले में कैद की सजा देने के लिए बाध्य न हो। इसके अलावा, सजा की एक श्रेणी में अधिकतम कैद की अवधि तीन साल से घटाकर दो साल करने की बात है। हर मामले में जुर्माने का विकल्प उपलब्ध कराने और छोटे करदाताओं के लिए देर से भुगतान पर लगने वाले शुल्क में राहत देने पर भी विचार किया जा सकता है।

टैक्स वसूली पर जोर क्यों दे रही है सरकार?
जीएसटी लागू होने के समय, एक जुलाई 2017 को फर्जी बिल और कर चोरी पकड़ना मुश्किल था। रिटर्न में दर्ज हर बिल का दूसरे पक्ष के रिकॉर्ड से मिलान करना आसान नहीं था। इसलिए गिरफ्तारी की शक्ति को डर पैदा करने वाले उपाय के रूप में शामिल किया गया था। अब व्यवस्था में विक्रेता की ओर से दर्ज जानकारी और खरीदार की ओर से दावा किए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट का मिलान किया जा सकता है। इससे फर्जी क्रेडिट का पता शुरुआती स्तर पर लगाने और उसे आगे बढ़ने से रोकने में मदद मिलती है। सरकार अब इसी तकनीकी व्यवस्था के आधार पर जांच मजबूत करने और टैक्स, ब्याज व जुर्माने के जरिये कार्रवाई करने पर जोर दे रही है।

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