न्यायालय ने योजनाओं में मुख्यमंत्री के नाम, तस्वीर के इस्तेमाल पर रोक लगाने का आदेश रद्द किया

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश को बुधवार को रद्द कर दिया, जिसमें द्रमुक सरकार को कल्याणकारी योजनाओं में वर्तमान और पूर्व मुख्यमंत्रियों के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल नहीं करने को कहा गया था।

प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई, न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन वी अंजरिया की पीठ ने मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने के लिए अन्ना द्रमुक नेता सी. वी. षणमुगम पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

न्यायालय ने कहा कि तमिलनाडु की कल्याणकारी योजनाओं के लिए मुख्यमंत्री के नाम के इस्तेमाल के खिलाफ याचिका अनुचित और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। मद्रास उच्च न्यायालय ने 31 जुलाई को तमिलनाडु सरकार को किसी भी नयी या पुन? पेश की गयी जन कल्याणकारी योजना का नाम जीवित व्यक्तियों के नाम पर रखने से रोक दिया।

अदालत ने ऐसी योजनाओं के प्रचार के विज्ञापनों में पूर्व मुख्यमंत्रियों, नेताओं या द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के किसी भी प्रतीक, चिह्न या झंडे के चित्रों के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी। मुख्य न्यायाधीश मनींद्र मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सुंदर मोहन की खंडपीठ ने षणमुगम द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया था।

सांसद षणमुगम ने सरकार के जनसंपर्क कार्यक्रम ‘उंगलुदन स्टालिन’ (आपके साथ, स्टालिन) के नामकरण और प्रचार को चुनौती देते हुए आरोप लगाया था कि यह स्थापित मानदंडों का उल्लंघन करता है। हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया था कि आदेश राज्य को किसी भी कल्याणकारी योजना को शुरू करने, लागू करने या संचालित करने से नहीं रोकता है लेकिन उसने कहा कि पाबंदियां केवल ऐसी योजनाओं से जुड़े नामकरण और प्रचार सामग्री पर लागू होती हैं।

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