सरकार जवाब देकर डोनाल्ड ट्रंप का मुंह बंद करवाए या ‘मैकडोनाल्ड्स’ बंद करवाए: दीपेंद्र हुड्डा

विदेश मंत्री ने स्पष्ट रूप से नहीं कहा कि मध्यस्थता में अमेरिका की भूमिका नहीं थी: प्रियंका

नयी दिल्ली. कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मध्यस्थता संबंधी दावों पर सरकार को जवाब देकर उनका मुंह बंद करवाना चाहिए या फिर भारत में अमेरिकी ब्रांड ‘मैकडोनाल्ड्स’ को बंद करवाए क्योंकि ये दोनों साथ नहीं चल सकते. उन्होंने सदन में ऑपरेशन सिंदूर पर विशेष चर्चा में भाग लेते हुए दावा किया कि पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद कोई देश भारत के साथ खड़ा नहीं हुआ.

हुड्डा ने कहा, ” ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में हमारी सेना ने अपना पराक्रम दिखाया और जब हम पाकिस्तान पर हावी थे, तो युद्धविराम कर दिया गया. देश चाहता था कि पाकिस्तान को वैसा ही जवाब दिया जाए, जैसा 1971 में इंदिरा गांधी जी ने दिया था. पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए थे.” उन्होंने कहा, ”जब पाकिस्तान घुटनों पर था, तो आपसे पहले अमेरिका की ओर से किए गए एक ट्वीट ने युद्धविराम की घोषणा कर दी. ऐसे में आपको देश को बताना चाहिए कि युद्ध विराम की क्या शर्तें थीं?” हुड्डा ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने 28 बार कहा है कि उन्होंने व्यापार की धमकी देकर युद्धविराम करवाया.

उनका कहना था, ”ट्रंप यहीं नहीं रुके, उन्होंने भारत के जहाज गिरने और कश्मीर मुद्दे तक का जिक्र किया, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार भी उनकी बातों का खंडन नहीं किया.” कांग्रेस सांसद ने कहा, ”अमेरिका, भारत के साथ पाकिस्तान की बराबरी नहीं कर सकता. इसलिए सरकार को एक रास्ता चुनना होगा कि या तो हाथ मिलाओ या आंख दिखाओ. सरकार या तो डोनाल्ड ट्रंप को जवाब देकर उनका मुंह बंद करे या फिर हिंदुस्तान में अमेरिका के ‘मैकडोनाल्ड्स’ बंद करवाए. ये दोनों चीजें साथ-साथ नहीं चल सकतीं.” उन्होंने पहलगाम हमले के बाद सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शामिल नहीं होने की आलोचना की.

विदेश मंत्री ने स्पष्ट रूप से नहीं कहा कि मध्यस्थता में अमेरिका की भूमिका नहीं थी: प्रियंका

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने सोमवार को दावा किया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लोकसभा में यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा कि मध्यस्थता में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी. प्रियंका ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, ”विदेश मंत्री ने कई चीजें स्पष्ट नहीं कीं. मिसाल के तौर पर उन्होंने कहा कि कुछ दिनों तक प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति से बात नहीं की, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा कि मध्यस्थता में अमेरिका की भूमिका नहीं थी.” पहलगाम हमले के बाद भारत को विदेश से समर्थन नहीं मिलने के विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए विदेश मंत्री ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्यों में से पाकिस्तान और तीन अन्य देशों को छोड़कर सभी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का समर्थन किया था.

‘ऑपरेशन सिंदूर’ विषय पर लोकसभा में चर्चा में हिस्सा लेते हुए जयशंकर ने पाकिस्तान को चीन के समर्थन पर विपक्ष के आक्षेपों को नकारते हुए कहा कि दोनों देशों की साझेदारी 60 साल से कांग्रेस के समय से चल रही है. उन्होंने यह भी कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय अमेरिका के साथ बातचीत में व्यापार का कोई जिक्र नहीं हुआ था, 22 अप्रैल से 17 जून के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर कोई संवाद नहीं हुआ.

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